पोंड बायोफ्लॉक- कम जगह, कम लागत, ज्यादा उत्पादन
सिद्धार्थ कर रहे खेती के साथ-साथ फिश फार्मिंग
20 दिसंबर 2025, बुरहानपुर: पोंड बायोफ्लॉक- कम जगह, कम लागत, ज्यादा उत्पादन – प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना मछली पालकों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सशक्त पहल साबित हो रही है। इस योजना के अंतर्गत संचालित पोण्ड बायोफ्लॉक तकनीक कम स्थान और कम पानी में अधिक मछली उत्पादन की सुविधा प्रदान करती है, जिससे परंपरागत मछली पालन की तुलना में अधिक लाभ संभव हो पाता है।
योजनांतर्गत 60 प्रतिशत मिला अनुदान- इस योजना से प्रेरित होकर बुरहानपुर जिले के शाहपुर निवासी श्री सिद्धार्थ थाटे ने मछली पालन व्यवसाय को अपनाया। माह जून-2025 में उन्होंने पोंड बायोफ्लॉक योजना अंतर्गत कार्य की शुरुआत की, जिसमें मत्स्य विभाग द्वारा योजना के तहत उन्हें 60 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया गया। शासकीय सहयोग और तकनीकी मार्गदर्शन से सिद्धार्थ ने अपने खेत में करीब 10,000 स्क्वायर फीट क्षेत्र में तालाब का निर्माण करवाया। तालाब निर्माण में भूमि समतलीकरण, मेट बिछाने, सुरक्षा जाली लगाने तथा स्वच्छ जल व्यवस्था जैसी सभी आवश्यक सुविधाओं को वैज्ञानिक तरीके से विकसित किया गया।
योजना अंतर्गत उन्हें मछली के गुणवत्तापूर्ण बीज एवं पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बनाए रखने हेतु आधुनिक ऑक्सीजन मशीन भी उपलब्ध कराई गई, जिससे मछलियों की वृद्धि बेहतर होने लगी। आज सिद्धार्थ खेती के साथ-साथ फिश फार्मिंग को भी सफलतापूर्वक संचालित कर रहे हैं। सिद्धार्थ बताते है कि, वह अपने मछली पालन के व्यवसाय को वैज्ञानिक तरीके से और आगे बढ़ायेंगे। यह तकनीक न केवल कम रख-रखाव में अधिक उत्पादन देती है, बल्कि जल संरक्षण को भी बढ़ावा देती है। पोण्ड बायोफ्लॉक तकनीक के माध्यम से सिद्धार्थ अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ग्रामीण क्षेत्र में स्वरोजगार, आयवृद्धि और आत्मनिर्भरता का एक सशक्त माध्यम बन रही है।
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