राज्य कृषि समाचार (State News)

बाजरा : कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए उपयोगी  फसल

24 जुलाई 2026, भोपाल: बाजरा : कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए उपयोगी  फसल – बाजरा भारत की प्रमुख अनाज एवं चारा फसलों में शामिल है। इसकी खेती विशेष रूप से उन क्षेत्रों में की जाती है, जहां वर्षा सीमित होती है। बाजरे की फसल के लिए बुवाई का सही समय क्षेत्र की वर्षा पर निर्भर करता है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में इसकी बुवाई जुलाई के प्रारंभ में, जबकि अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जुलाई के अंतिम सप्ताह में करना उपयुक्त माना जाता है।

बाजरा दुनिया के कई देशों में व्यापक रूप से उगाया जाता है और भारत इसके प्रमुख उत्पादक देशों में शामिल है। यह फसल मुख्य रूप से चारे के उद्देश्य से भी उपयोगी है। इसके तने और अन्य हरे भागों का उपयोग पशुओं के चारे के रूप में किया जाता है। पशुपालन करने वाले किसानों के लिए बाजरा पौष्टिक हरे चारे का महत्वपूर्ण स्रोत है।

भारत में बाजरे की खेती पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु सहित कई राज्यों में की जाती है। हालांकि बाजरे को अपेक्षाकृत कम वर्षा वाले क्षेत्रों की फसल माना जाता है, फिर भी इसकी अच्छी वृद्धि के लिए पर्याप्त नमी आवश्यक होती है। इसलिए बुवाई का समय स्थानीय वर्षा और मिट्टी की स्थिति को ध्यान में रखकर तय किया जाना चाहिए।

पंजाब में भी बाजरे की खेती कई जिलों में की जाती है। बठिंडा, फरीदकोट, फिरोजपुर, मानसा, मोगा और संगरूर इसके प्रमुख उत्पादन क्षेत्र रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2002-03 में पंजाब में लगभग 0.8 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बाजरे की खेती की गई थी। इसकी औसत उपज करीब 3.9 क्विंटल प्रति एकड़ रही तथा कुल उत्पादन लगभग 0.8 हजार टन दर्ज किया गया था।

बाजरा किसानों के लिए दोहरी उपयोगिता वाली फसल है। इसका उपयोग जहां खाद्यान्न के रूप में किया जाता है, वहीं इसके तने और हरे भाग पशुओं के लिए चारे के रूप में उपयोगी होते हैं। कम पानी वाले क्षेत्रों में पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए बाजरे की खेती महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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