बिहार में 1 नवंबर से शुरू होगी धान की खरीद, जानें MSP और पंजीयन की पूरी प्रक्रिया
27 अक्टूबर 2026, पटना: बिहार में 1 नवंबर से शुरू होगी धान की खरीद, जानें MSP और पंजीयन की पूरी प्रक्रिया – बिहार में धान किसानों के लिए खरीद का इंतजार अब खत्म होने वाला है। राज्य सरकार ने 2026-27 सीजन के लिए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP तय कर दिया है और खरीद की तारीख भी घोषित कर दी गई है।
सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने हाल ही में तैयारियों की समीक्षा बैठक की, जिसमें उन्होंने अधिकारियों को खरीद प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए। बैठक में उत्तर और दक्षिण बिहार के लिए अलग-अलग खरीद तारीखें तय की गई हैं।
कितना मिलेगा दाम, कब से शुरू होगी खरीद
सामान्य श्रेणी के धान का MSP 2,441 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है, जबकि ग्रेड-A धान के लिए यह 2,461 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। उत्तर बिहार के जिलों में खरीद 1 नवंबर से शुरू होगी, जबकि दक्षिण बिहार में किसानों को 15 नवंबर तक इंतजार करना होगा।
इस अंतर की वजह फसल पकने का समय है। उत्तर बिहार में धान आम तौर पर पहले पक जाता है, इसलिए वहां खरीद भी पहले शुरू होती है।
पंजीयन के लिए क्या करना होगा
धान बेचने के लिए किसानों को अपना आवेदन राज्य सरकार के आधिकारिक पोर्टल esahkari.bihar.gov.in पर दर्ज करना होगा। इस बार खरीद प्रक्रिया में एग्रीस्टैक डेटा का भी इस्तेमाल किया जाएगा, इसलिए जिन किसानों के पास अभी एग्रीस्टैक आईडी नहीं है, उन्हें पहले यह आईडी बनवाने की सलाह दी गई है।
जिन किसानों को पोर्टल पर आवेदन करने में परेशानी हो रही है, वे प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) के अध्यक्ष या प्रबंधक से मदद ले सकते हैं। इसके अलावा व्यापार मंडल भी किसानों की सहायता के लिए अधिकृत किए गए हैं।
सरकार ने भुगतान को लेकर भी स्पष्ट समयसीमा तय की है। नियम के मुताबिक पात्र किसानों के बैंक खातों में भुगतान आवेदन स्वीकृत होने के 48 घंटे के भीतर पूरा किया जाना है, ताकि किसानों को अपनी फसल का पैसा पाने में देरी न हो।
पिछले सीजन में कई किसानों ने भुगतान में देरी की शिकायत की थी, इसलिए इस बार विभाग ने समय-सीमा का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की बात कही है। जिला स्तर पर सहकारिता विभाग के अधिकारियों को खरीद केंद्रों की निगरानी का जिम्मा दिया गया है।
धान बिहार के ज्यादातर जिलों की मुख्य खरीफ फसल है, और हर साल कटाई के बाद किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि उनकी फसल सही दाम पर समय से बिक पाएगी या नहीं। खुले बाजार में अक्सर किसानों को MSP से कम दाम मिलता है, खासकर तब जब सरकारी खरीद केंद्र देर से शुरू होते हैं या पंजीयन प्रक्रिया जटिल रहती है।
इस बार एग्रीस्टैक डेटा के इस्तेमाल से सरकार का मकसद यह है कि किसान की पहचान और जमीन का रिकॉर्ड डिजिटल तरीके से पहले से जुड़ा रहे, ताकि फर्जी पंजीयन या बिचौलियों के जरिए खरीद केंद्रों तक पहुंचने की गुंजाइश कम हो सके। इससे असली किसान तक ही MSP का फायदा पहुंचने की उम्मीद है।
किसानों को सलाह दी गई है कि वे खरीद शुरू होने से पहले ही अपना पंजीयन पूरा कर लें, ताकि फसल तैयार होने पर उन्हें बेचने में देरी न हो। एग्रीस्टैक आईडी और जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखने से प्रक्रिया आसान हो जाएगी। जिन किसानों के पास अब तक आईडी नहीं बनी है, उन्हें नजदीकी PACS या प्रखंड कृषि कार्यालय से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
किसानों की यह आम शिकायत रहती है कि खरीद केंद्र पर बोरों की कमी या कांटे की खराबी की वजह से उपज बेचने में देरी होती है। इस बार प्रशासन से उम्मीद है कि इन व्यावहारिक अड़चनों पर भी ध्यान दिया जाएगा, ताकि किसानों को बार-बार केंद्र के चक्कर न काटने पड़ें। अगर भुगतान वाकई तय 48 घंटे की सीमा के भीतर होता है, तो इससे किसानों को अगली फसल की बुवाई के लिए समय पर पैसा मिल सकेगा।
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