राज्य कृषि समाचार (State News)

लागी छूटे ना…! पांढुर्ना में पुरानी दर की खाद को नए भाव में बेचने की हैट्रिक

मुख्यमंत्री और PMO तक पहुंची ऑनलाइन शिकायत; अब सवाल-अधिक वसूली की राशि कब लौटेगी ?

(विशेष संवाददाता)

04 सितंबर 2026, भोपाललागी छूटे ना…! पांढुर्ना में पुरानी दर की खाद को नए भाव में बेचने की हैट्रिक – कहा जाता है कि जब किसी चीज की लत लग जाती है तो वह आसानी से नहीं छूटती। ‘लागी छूटे ना की यह कहावत पांढुर्ना में खाद बिक्री के मामले में पूरी तरह मुफीद बैठती दिखाई दे रही है। यहां पुरानी दर पर अंकित खाद को नए भाव में किसानों को बेचने का तीसरा मामला सामने आ गया है। यानी पुरानी दर, नए भाव की बिक्री की हैट्रिक! लगातार सामने आ रहे इन मामलों से सहकारी व्यवस्था को लेकर किसानों का भरोसा डगमगाने लगा है। स्थिति यह है कि किसानों की शिकायत मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय PMO तक ऑनलाइन पहुंच चुकी है। अब बड़ा सवाल यह है कि किसानों से वसूली गई अतिरिक्त राशि वापस कब होगी? किसान कल्याण वर्ष में किसानों को न्याय मिलेगा? दोषियों पर कार्रवाई होगी? और क्या खाद कंपनियों तथा संबंधित सिस्टम के बीच कथित गठजोड़ टूटेगा? इन सवालों के जवाब अब प्रशासन की कार्रवाई से ही मिलेंगे।

प्राय: किसी गलती के सामने आने के बाद संबंधित तंत्र उससे सबक लेकर दोबारा ऐसी स्थिति न बनने देने की कोशिश करता है, लेकिन पांढुर्ना में एक के बाद एक सामने आए तीन मामलों ने इस सामान्य प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। इसे संबंधित विभागों की सामूहिक लापरवाही माना जाए या फिर पुरानी दर की खाद को नई दर पर बेचने की सुनियोजित प्रवृत्ति-यह जांच का विषय है। एक ही जिले में तीन बार पुरानी एमआरपी वाली खाद को नए भाव पर बेचा जाना महज संयोग नहीं माना जा सकता।

मार्कफेड द्वारा 26 मई 2026 को जारी मूल्य संशोधन आदेश में स्पष्ट किया गया था कि मूल्य वृद्धि लागू होने से पहले उपलब्ध पुराना खाद स्टॉक पूर्व निर्धारित दर अथवा बोरी पर अंकित एमआरपी पर ही बेचा जाएगा। इसके बावजूद यदि पुरानी एमआरपी वाली बोरियां किसानों को नई दर पर बेची गईं, तो यह सीधे तौर पर किसानों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डालने का मामला है।

पुरानी दर, नए भाव की हैट्रिक

पहला मामला—डबल लॉक केंद्र: पांढुर्ना के डबल लॉक केंद्र में ई-टोकन की आड़ में पुरानी दर के खाद को नई दर पर बेचने का मामला सामने आया था। इसमें 118 किसानों से कुल 38,850 रुपये की अधिक वसूली की गई। कृषक जगत ने 22 जून 2026 के अंक में ‘क्या ई-टोकन की आड़ में किसानों से अधिक वसूली हुई?Ó शीर्षक से इसे मुखपृष्ठ पर प्रकाशित किया। इसके बाद तंत्र सक्रिय हुआ और मार्कफेड ने डबल लॉक केंद्र के गोदाम प्रभारी को निलंबित करने तथा एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी किए। यह कार्रवाई कृषक जगत के 27 जुलाई 2026 के अंक में प्रकाशित हुई थी।

दूसरा मामला—त्र्यंबकेश्वर एग्रो का एसएसपी:
पहले मामले की कार्रवाई की स्याही सूखी भी नहीं थी कि वृहत्ताकार कृषि साख समिति, पांढुर्ना में त्र्यंबकेश्वर एग्रो इंडस्ट्रीज, मेघनगर का सिंगल सुपर फास्फेट जिंक दानेदार खाद सामने आया। बोरी पर एमआरपी 530 रुपये अंकित थी, जबकि किसानों से इसे 630 रुपये प्रति बोरी की दर से बेचे जाने की बात सामने आई। यानी प्रत्येक बोरी पर 100 रुपये अधिक। कृषक जगत ने इस मामले को 17 अगस्त 2026 के अंक में प्रकाशित किया। उस समय अधिकारियों ने संबंधित खाद की बिक्री रुकवाने की बात कही थी, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होने के बाद अब तीसरा मामला सामने आ गया।

तीसरा मामला—अरिहंत फर्टिलाइजर की पुरानी एमआरपी:
बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मर्यादित, पांढुर्ना द्वारा अरिहंत फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स इंडिया लि., (नीमच) का ‘विक्रम सुपर स्टार सिंगल सुपर फास्फेट दानेदार खाद किसानों को 605 रुपये प्रति बोरी में बेचा गया। संबंधित बोरी पर एमआरपी 505 रुपये अंकित थी। खाद का बैच नंबर AG001 तथा निर्माण माह अप्रैल 2026 अंकित है। किसानों को इसकी रसीद भी दी गई।

किसान श्री रामेश्वर मिरग्याजी बेलखड़े ने कृषक जगत को  बताया कि उन्होंने उक्त समिति से एसएसपी की बोरी खरीदने पर उन्हें पता चला कि चार बोरियों पर उनसे कुल 400 रुपये अधिक लिए गए हैं।

IFMS पर एमआरपी दर्ज होती तो कैसे होती मनमानी? – खाद व्यवसाय से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सभी उर्वरकों की एमआरपी को Integrated Fertilizer Management System (IFMS) पर स्पष्ट रूप से दर्ज और अपडेट किया गया होता तथा बिक्री के समय उसका अनिवार्य मिलान कराया जाता, तो इस तरह की मनमानी करना मुश्किल होता।

अधिकारियों के कथन- श्री मोरिस नाथ, उप संचालक, कृषि, पांढुर्ना ने कृषक जगत को बताया कि त्रंबकेश्वर एग्रो इंडस्ट्रीज़, मेघनगर वाले मामले में वरिष्ठ कार्यालय को प्रतिवेदन भेज दिया है। अरिहंत फर्टिलाइजऱ एंड केमिकल्स का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। निलंबित गोदाम प्रभारी मनोज कुमार टेपे के खिलाफ एफआईआर के निर्देश हुए थे। इस संबंध में  क्या कार्रवाई हुई इसकी जानकारी जिला विपणन अधिकारी से  लेकर बताऊंगा।  वहीं नए मामले पर मार्कफेड की डीएमओ सुश्री अंकिता गुरनानी ने भोलेपन से कहा कि संबंधित एसएसपी खाद की आपूर्ति से मार्कफेड का कोई लेना-देना नहीं है। उनके अनुसार यह खाद संभवत: डिप्टी रजिस्ट्रार सहकारिता और बैंक प्रबंधक के माध्यम से सप्लाई हुई होगी। अरिहंत फर्टिलाइजऱ एन्ड केमिकल्स इंडिया लि के मार्केटिंग ऑफिसर श्री राधेश्याम शर्मा ने कृषक जगत से कहा कि  गलती से पुरानी दर का माल लोड हो गया था। समिति को भी खाद पहुंचने पर देखना था।
किसान  संगठनों का यह कहना है – भारतीय किसान संघ, पांढुर्ना के जिला अध्यक्ष श्री राजकुमार जायसवाल ने किसानों को एमआरपी से अधिक दर पर खाद बेचने को गलत बताते हुए कहा कि अभी तक तो व्यापारियों द्वारा खाद की कालाबाज़ारी करने की बात सुनी थी, लेकिन अब सहकारी समितियां भी कालाबाज़ारी करने लगी है। यह जिला प्रशासन की नाकामी है, कि बार -बार यह गलती दोहराई जा रही है। इस पर रोक नहीं लगी तो किसान हित में चक्काजाम/धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अलावा  भाजपा किसान मोर्चा, जिला पांढुर्ना के अध्यक्ष श्री विकास खिरड़कर, भारतीय किसान मजदूर संघ छिंदवाड़ा / पांढुर्ना के जिला अध्यक्ष श्री सुदामा मानमोड़े, किसान कांग्रेस,पांढुर्ना के अध्यक्ष श्री हरनाम सिंह ने भी इस घटना  पर  रोष प्रकट करते हुए इसे किसानों के साथ अन्याय बताया और कहा कि यदि प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से नहीं  लिया तो किसानों के हित में आंदोलन किया जाएगा।

किसानों में जागरूकता का अभाव बना बड़ी वजह

इन मामलों से एक बात और स्पष्ट होती है कि किसानों में एमआरपी, बैच नंबर, निर्माण तिथि और बिक्री रसीद की जांच को लेकर अभी पर्याप्त जागरूकता नहीं है। यदि किसान खाद खरीदते समय बोरी पर अंकित एमआरपी और रसीद में दर्ज कीमत का मिलान करें तथा रसीद सुरक्षित रखें तो ऐसी अतिरिक्त वसूली के मामलों को सामने लाना आसान हो सकता है।

अब किसानों की निगाह प्रशासन पर है। किसान कल्याण वर्ष में क्या पांढुर्ना के इन तीन मामलों की गहन जांच होगी? किसानों से वसूली गई अतिरिक्त राशि कब वापस होगी? जिम्मेदार अधिकारियों, समिति पदाधिकारियों और संबंधित कंपनी की जवाबदेही तय होगी या मामला आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहेगा?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि पुरानी दर की खाद को नए भाव में बेचने की यह ‘हैट्रिकÓ यहीं रुकेगी या चौथा मामला सामने आने का इंतजार किया जाएगा?

अधिक कीमत के साथ गुणवत्ता पर भी सवाल
मामले में अब एसएसपी खाद की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब संबंधित खाद की कीमत और आपूर्ति को लेकर ही मामला गड़बड़ है, तो उसकी गुणवत्ता की भी स्वतंत्र जांच  जरूरी है। किसान श्री मंसाराम खोड़े ने मांग की है कि संबंधित एसएसपी खाद के नमूने लेकर उनकी जांच National Fertilizers Testing Laboratory, Faridabad में कराई जाए, ताकि खाद में निर्धारित गुणवत्ता मानकों की पुष्टि हो सके। किसानों का कहना है कि जब बोरी को खोला तो खाद कम मिट्टी ज्यादा प्रतीत हो रही थी। संबंधित के कानों पर जूं भी नहीं रेंगी है।

कलेक्टर कार्यालय से चंद कदमों की दूरी पर यह हाल तो दूरस्थ समितियों का क्या?
पांढुर्ना का यह मामला अब केवल एक समिति में अधिक वसूली का मामला नहीं रह गया है। यह जिले में खाद वितरण व्यवस्था, निगरानी तंत्र और किसानों के संरक्षण पर बड़ा सवाल बन गया है। जब कलेक्टर कार्यालय से चंद कदमों की दूरी पर ही किसानों से अधिक कीमत वसूली जा रही है, तो दूरस्थ अंचलों की समितियों में खाद की बिक्री और कीमतों की निगरानी कितनी प्रभावी है?  

सीबीआई जांच की मांग, पीएमओ में ऑनलाइन शिकायत  
मामले की गंभीरता को देखते हुए किसान श्री रामेश्वर बेलखड़े ने अब इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि यह मामला केवल अतिरिक्त वसूली तक सीमित नहीं है। इसमें खाद की आपूर्ति, कीमत, पुरानी एमआरपी वाले स्टॉक की बिक्री, गुणवत्ता और संबंधित संस्थाओं की भूमिका जैसे कई सवाल जुड़े हुए हैं। किसानों ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में ऑनलाइन  शिकायत भी की  है। किसानों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा एसएसपी खाद की गुणवत्ता की राष्ट्रीय स्तर की प्रयोगशाला में जांच कराने के साथ-साथ अतिरिक्त वसूली के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी तय की जाए।

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