राजस्थान में कृषि विकास को नई रफ्तार, 30 से अधिक संस्थाओं के साथ MoU करेगा कृषि विभाग
10 जुलाई 2026, जयपुर: राजस्थान में कृषि विकास को नई रफ्तार, 30 से अधिक संस्थाओं के साथ MoU करेगा कृषि विभाग – राजस्थान सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। कृषि एवं उद्यानिकी विभाग कृषि क्षेत्र में कार्यरत 30 से अधिक गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), सिविल सोसायटी संगठनों, अनुसंधान एवं शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संस्थाओं और एग्रीटेक कंपनियों के साथ गैर-वित्तपोषित (Non-Financial) समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर करेगा। इन समझौतों का उद्देश्य विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में संस्थाओं की विशेषज्ञता का लाभ लेकर अधिक से अधिक किसानों तक योजनाओं का फायदा पहुंचाना है।
कृषि आयुक्त श्री नरेश कुमार गोयल ने बताया कि शुक्रवार को पंत कृषि भवन, जयपुर में एमओयू हस्ताक्षर कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे।
उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, भूजल स्तर में गिरावट, मृदा उर्वरता में कमी, उत्पादन लागत में वृद्धि और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में इन समस्याओं का समाधान केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। सरकार, अनुसंधान संस्थानों, कृषि विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और किसानों के बीच मजबूत साझेदारी समय की आवश्यकता है।
इसी सोच के तहत विभाग ने विभिन्न संस्थाओं के साथ सहयोग की पहल की है। इस दिशा में 12 जनवरी 2026 को आयोजित राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला में कृषि विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और कृषि क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की गई थी। प्राप्त सुझावों और अनुभवों के आधार पर सहयोग का यह मॉडल तैयार किया गया, जिसके तहत अब विभिन्न संस्थाओं के साथ गैर-वित्तपोषित समझौते किए जा रहे हैं।
सरकार पर नहीं आएगा अतिरिक्त वित्तीय भार
कृषि विभाग के अनुसार इन समझौतों की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि राज्य सरकार पर किसी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा। सहयोगी संस्थाएं अपनी तकनीकी विशेषज्ञता, अनुभव और संसाधनों के माध्यम से विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग करेंगी। इससे योजनाओं का लाभ अधिक व्यापक स्तर पर किसानों तक पहुंच सकेगा और कृषि विकास को नई गति मिलेगी।
प्राकृतिक खेती, डिजिटल कृषि और किसान प्रशिक्षण पर रहेगा फोकस
इन एमओयू का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक खेती, जैविक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि प्रणाली, मृदा एवं जल संरक्षण, कृषि विविधीकरण, आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रसार, डिजिटल कृषि, किसानों के प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास, महिला एवं युवा किसानों के सशक्तिकरण और कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही खेती की लागत कम करने, उत्पादकता बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
विशेषज्ञता के आधार पर करेंगी काम संस्थाएं
विभिन्न सहयोगी संस्थाएं अपनी-अपनी विशेषज्ञता के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य करेंगी। कुछ संस्थाएं प्राकृतिक और जैविक खेती के विस्तार में सहयोग देंगी, जबकि अन्य जल संरक्षण, सामुदायिक प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, कृषि नवाचार, एग्रीटेक समाधान, डिजिटल प्लेटफॉर्म, किसान प्रशिक्षण, बाजार संपर्क, मूल्य संवर्धन, जलवायु अनुकूल तकनीकों और अनुसंधान आधारित कृषि मॉडल विकसित करने में विभाग के साथ मिलकर काम करेंगी।
कृषि विभाग का मानना है कि यह साझेदारी राजस्थान में कृषि विकास का नया मॉडल स्थापित करेगी। इससे आधुनिक तकनीकों का तेजी से प्रसार होगा, विभागीय योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से किसानों तक पहुंचेगा और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि व्यवस्था को मजबूत आधार मिलेगा। विभाग के अनुसार यह पहल प्रदेश में कृषि नवाचार, प्राकृतिक खेती और जलवायु अनुकूल कृषि को जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।
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