बाजरा: आने वाले कल का अनाज

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02 सितम्बर 2022, भोपाल (शशिकांत त्रिवेदी): बाजरा: आने वाले कल का अनाज – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में राष्ट्र के नाम अपने “मन की बात” संबोधन में कहा कि आने वाला वर्ष 2023 अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया में इन मोटे अनाज, खासकर बाजरा के लिए लोगों की रूचि बढ़ रही है. भारत आने वाले विदेशी मेहमानों को भारतीय लोग बाजरा से बने व्यंजन परोसते रहे हैं और उन्होंने बाजरे के व्यंजन बहुत पसंद किए जाते रहे हैं।

प्रधानमंत्री की यह घोषणा भारत के कृषि क्षेत्र में एक नया मोड़ लाने वाली है. आंकड़ों से पता चलता है कि मोटे अनाज का उत्पादन 2016-17 में 276.5 लाख टन से बढ़कर 2021-22 में 347.7 लाख टन (तीसरा अग्रिम अनुमान) हो गया है। सरकार बाजरा, मक्का और जौ जैसे मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन – मोटे अनाज के तहत मोटे अनाज विकास कार्यक्रम लागू कर रही है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अप्रैल 2021 को एक प्रस्ताव अपनाया जिसे भारत ने प्रायोजित किया था और तभी 2023 को अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष के रूप में घोषित किया गया था। इसका उद्देश्य बाजरा के स्वास्थ्य लाभों के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना है।

बाजरा या मोटा अनाज प्राचीन काल से ही भारत की कृषि, संस्कृति और सभ्यता का हिस्सा रहा है। बाजरा का उल्लेख वेदों में मिलता है और इसी प्रकार पुराणनुरु और तोलकाप्पियम में भी इनका उल्लेख मिलता है। भारत में विभिन्न प्रकार के मोटे अनाज पाए जाते हैं जैसे, ज्वार, बाजरा, रागी, सावन, कंगनी, चीना, कोडो, कुटकी, कुट्टू, आदि लेकिन भारत दुनिया में बाजरा का सबसे बड़ा उत्पादक है और इसे बनाने की पहल कर रहा है।

बाजरा दुनिया में सबसे पुराने खेती वाले अनाजों में से एक, कुछ वर्षो पहले तक यह अनाज देश के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में पारंपरिक उपभोक्ताओं तक ही सीमित था लेकिन अब एक ‘सुपरफूड’ के रूप में दुनिया भर में स्थापित हो चुका है. केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के अनुसार बाजरा का उत्पादन भी 80 लाख टन से बढ़कर 100.86 लाख टन हो गया है।

स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होने के बावजूद भारत के पोषण परिणामों में सुधार के लिए बाजरा को मुख्यधारा में लाने के प्रयास अब तक खाद्य और कृषिमें बहुत आशाजनक नहीं थे। अन्य ‘सुपरफूड्स’ जैसे ऐमारैंथ या क्विनोआ की तुलना में बाजरा को शहरी उपभोक्ताओं के बीच ‘मान्यता’ नहीं मिली है।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इसीलिए कहा कि बाजरा किसानों और विशेष रूप से छोटे किसानों के लिए भी फायदेमंद है क्योंकि ये फसलें बहुत कम समय में तैयार हो जाती हैं और इसके लिए ज्यादा पानी की भी आवश्यकता नहीं होती है। बाजरा घास भी सबसे अच्छा चारा माना जाता है।

“यह देखकर अच्छा लगता है कि आज कई ऐसे स्टार्ट-अप उभर रहे हैं, जो बाजरा पर काम कर रहे हैं। इनमें से कुछ बाजरे की कुकीज बना रहे हैं तो कुछ मिलेट पैनकेक और डोसा भी बना रहे हैं. कुछ ऐसे हैं जो बाजरा एनर्जी बार और बाजरा नाश्ता बना रहे हैं, ”पीएम मोदी ने कहा। “मैं इस क्षेत्र में काम करने वाले सभी लोगों को शुभकामनाएं देता हूं। इस फेस्टिव सीजन में हम ज्यादातर व्यंजनों में बाजरा का भी इस्तेमाल करते हैं। पीएम मोदी ने आम जनता से घरों में बने ऐसे व्यंजनों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करने और बाजरा के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने में मदद करने को भी कहा।

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बाजार में अब बाजरा – सुपरफूड के रूप में स्थापित होने लगा है क्योंकि नए शोध की जानकारियां अब आम लोगों तक पहुंचने लगी हैं। इन जानकारियों के मुताबिक बाजरा में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, फाइबर और मिनरल्स होते हैं। यह मोटापा कम करने के साथ-साथ ये मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी बीमारियों के खतरे को भी कम करता है. इसके साथ ही ये पेट और लीवर की बीमारियों को रोकने में भी मददगार हैं: बाजरा कुपोषण से लड़ने में भी बहुत फायदेमंद होता है, क्योंकि ये ऊर्जा के साथ-साथ प्रोटीन से भी भरपूर होते हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने किसानों से अनुरोध किया कि वे बाजरा यानी मोटे अनाज को ज्यादा से ज्यादा अपनाएं और इसका लाभ उठाएं।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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