खाद के साथ दूसरे कृषि उत्पाद खरीदने की बाध्यता खत्म, जबरन टैगिंग करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
29 अक्टूबर 2026, जयपुर: खाद के साथ दूसरे कृषि उत्पाद खरीदने की बाध्यता खत्म, जबरन टैगिंग करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई – राजस्थान में किसानों को अब यूरिया, डीएपी या अन्य अनुदानित उर्वरक खरीदने के लिए जिंक, सल्फर, कीटनाशक अथवा दूसरे कृषि उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा। कृषि विभाग ने उर्वरकों के साथ अन्य उत्पादों की जबरन बिक्री यानी टैगिंग पर रोक लगाते हुए संबंधित विक्रेताओं और कंपनियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अनियमितता की पुष्टि होने पर विक्रय प्राधिकार-पत्र निलंबित या निरस्त करने के साथ आवश्यकतानुसार एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकेगी।
कृषि आयुक्तालय की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, किसानों को अनुदानित उर्वरक उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनुचित शर्त स्वीकार नहीं की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि उर्वरक खरीदने के लिए किसानों पर अतिरिक्त कृषि उत्पाद लेने का दबाव बनाना नियमों के विपरीत है। ऐसे मामलों में केवल खुदरा विक्रेता ही नहीं, बल्कि संबंधित थोक विक्रेता और उर्वरक निर्माता या आपूर्तिकर्ता कंपनी की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
9 हजार से अधिक विक्रेताओं का निरीक्षण
कृषि विभाग के अनुसार, निरीक्षण के लिए विकसित मोबाइल ऐप के माध्यम से प्रदेश में 9,000 से अधिक कृषि आदान विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों की जांच की जा चुकी है। विभिन्न प्रकार की अनियमितताओं के मामलों में 250 से अधिक विक्रेताओं के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। हालांकि, विभाग ने स्पष्ट किया है कि ये आंकड़े अलग-अलग अनियमितताओं से संबंधित हैं और सभी मामले जबरन टैगिंग के नहीं हैं।
विभाग ने जिलों में विशेष निरीक्षण दल गठित कर उर्वरक कंपनियों, गोदामों तथा थोक एवं खुदरा विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों का नियमित और औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। निरीक्षण के दौरान उर्वरकों की उपलब्धता, स्टॉक, बिक्री अभिलेख, बिल और अन्य कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाएगी।
नियम तोड़ने पर लाइसेंस निरस्त करने तक की कार्रवाई
कृषि विभाग ने निर्देश दिए हैं कि जबरन टैगिंग सहित अन्य अनियमितताओं की पुष्टि होने पर उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के लागू प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाए। मामले की गंभीरता और कानूनी प्रावधानों के अनुसार संबंधित विक्रेता का विक्रय प्राधिकार-पत्र निलंबित या निरस्त किया जा सकता है। आवश्यक परिस्थितियों में एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई भी की जाएगी। विभाग ने निरीक्षण और शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की भी बात कही है। निर्देशों के पालन में शिथिलता मिलने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
शिकायत मिलने पर 24 घंटे में शुरू होगी कार्रवाई
किसान खाद की कालाबाजारी, निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूलने, जबरन टैगिंग या अन्य अनियमितताओं की शिकायत संबंधित जिला कृषि कार्यालय में कर सकेंगे। इसके लिए प्रत्येक जिले में उर्वरक शिकायत प्रकोष्ठ अथवा हेल्पलाइन स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।
विभाग के अनुसार, शिकायत प्राप्त होने के 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक कार्रवाई शुरू करनी होगी। साथ ही, शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को अनुदानित उर्वरक बिना किसी अतिरिक्त खरीद की बाध्यता के उपलब्ध कराना, कृषि आदान बाजार में पारदर्शिता बढ़ाना और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।
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