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राज्य कृषि समाचार (State News)

असम कैबिनेट का बड़ा फैसला, किसानों और FPO के कृषि ढांचा ऋण में सरकार देगी हिस्सा

01 अक्टूबर2026, गुवाहाटी: असम कैबिनेट का बड़ा फैसला, किसानों और FPO के कृषि ढांचा ऋण में सरकार देगी हिस्सा – असम सरकार ने किसानों और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के लिए कृषि अवसंरचना निधि (AIF) योजना के तहत बैंक कर्ज लेना आसान बनाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में इसके दिशा-निर्देशों को मंजूरी दी गई।

केंद्र की AIF योजना के तहत बैंक किसी भी पात्र परियोजना की कुल लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा कर्ज के रूप में देते हैं, जबकि बाकी 10 प्रतिशत लाभार्थी को खुद जुटाना होता है। असम सरकार अब इसी 10 प्रतिशत हिस्से में मदद देगी।

यह योजना पूरे देश में खेत स्तर और उसके आसपास फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने शुरू की थी, ताकि किसान अपनी उपज को तुरंत औने-पौने दाम पर बेचने की बजाय उचित भंडारण के बाद बेहतर कीमत पर बेच सकें। अब तक ऊंचे अंशदान की वजह से असम में कई छोटे किसान इस योजना से दूर रहते थे।

संगठनों और व्यक्तिगत किसानों के लिए अलग-अलग राहत

कैबिनेट के फैसले के मुताबिक किसान उत्पादक संगठन (FPO), किसान उत्पादक समिति (FPC), प्राथमिक कृषि सहकारी समिति (PACS) और अन्य सहकारी समितियों को यह पूरा 10 प्रतिशत अंशदान राज्य सरकार की तरफ से मिलेगा। यानी इन संगठनों को अपनी जेब से कोई अंशदान नहीं देना होगा।

वहीं व्यक्तिगत किसान लाभार्थियों के लिए यह राहत आधी रखी गई है। इस श्रेणी में 10 प्रतिशत में से 5 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी, जबकि बाकी 5 प्रतिशत किसान को खुद देना होगा। यह फैसला 24 सितंबर 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया, जिसमें कृषि के अलावा महिला स्वयं सहायता समूहों और औद्योगिक निवेश से जुड़े कई अन्य फैसले भी हुए।

गोदाम और कोल्ड स्टोरेज बनाना होगा सस्ता

AIF योजना का मकसद खेत स्तर पर भंडारण, गोदाम, कोल्ड स्टोरेज और खाद्य प्रसंस्करण जैसी सुविधाएं खड़ी करना है, ताकि किसानों को उपज बेचने में जल्दबाजी न करनी पड़े और फसल कटाई के बाद होने वाला नुकसान कम हो। अभी तक ऊंचे अंशदान के चलते कई छोटे और सीमांत किसान इस योजना का फायदा नहीं उठा पाते थे।

राज्य सरकार के इस फैसले से खासकर छोटे किसान समूहों और सहकारी समितियों को बैंक से कर्ज मंजूर कराना आसान होगा, क्योंकि अब उन्हें अपने हिस्से का अंशदान अलग से जुटाने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। असम में चाय के अलावा धान, सब्जी और बागवानी उत्पादों के लिए भंडारण सुविधाओं की लंबे समय से मांग रही है।

अभी तक कई किसान और छोटी सहकारी समितियां सिर्फ इसलिए AIF योजना का फायदा नहीं उठा पाती थीं क्योंकि उन्हें 10 प्रतिशत अंशदान की व्यवस्था करना मुश्किल लगता था, खासकर तब जब परियोजना की लागत कई लाख या करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है। राज्य सरकार के अंशदान से यह बाधा काफी हद तक कम हो जाएगी।

24 सितंबर की इसी कैबिनेट बैठक में राज्य सरकार ने महिला स्वयं सहायता समूहों, कृषि शिक्षा और औद्योगिक निवेश से जुड़े कई अन्य फैसले भी लिए, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समग्र रूप से मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। कैबिनेट के इस फैसले का लाभ लेने के लिए किसानों और FPO को संबंधित बैंक शाखा या जिला कृषि कार्यालय के जरिए ही AIF योजना के तहत आवेदन करना होगा, जहां से उन्हें राज्य सरकार के अंशदान की प्रक्रिया के बारे में जानकारी मिल सकेगी।

यह कदम असम में कृषि अवसंरचना में निवेश बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। जैसे-जैसे राज्य में कोल्ड स्टोरेज और गोदाम बनेंगे, वैसे-वैसे बीज, खाद और पैकेजिंग सामग्री बनाने वाली कंपनियों के लिए भी स्थानीय स्तर पर कारोबार के नए मौके बनेंगे, और किसानों को उपज खराब होने का डर कम होगा।

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