मध्यप्रदेश का ‘बंगला पान’ बना विदेशी बाजारों की पसंद, पाकिस्तान-बांग्लादेश तक बढ़ी मांग
03 जून 2026, भोपाल: मध्यप्रदेश का ‘बंगला पान’ बना विदेशी बाजारों की पसंद, पाकिस्तान-बांग्लादेश तक बढ़ी मांग – मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में किसान कल्याण और कृषि विकास के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब कृषि क्षेत्र में दिखाई देने लगे हैं। मध्यप्रदेश का पान अपनी विशिष्ट सुगंध, कोमलता और स्वाद के कारण देश के साथ-साथ विदेशी बाजारों में भी पहचान बना रहा है। विशेष रूप से छतरपुर का ‘बंगला पान’ पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
प्रदेश के छतरपुर, रीवा, मंदसौर, नरसिंहपुर और टीकमगढ़ जिलों में वर्षों से पान की खेती की जा रही है। यह खेती अब किसानों की आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बनती जा रही है। छतरपुर में उगाया जाने वाला बंगला पान अपनी पतली बनावट, हल्की मिठास और लंबे समय तक ताजगी बनाए रखने की क्षमता के कारण निर्यात के लिए उपयुक्त माना जाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
पान उत्पादकों को मिलेगा सरकारी प्रोत्साहन
पान की खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने विशेष कार्य योजना लागू की है। इसके तहत 10 जिलों को शामिल करते हुए 1 करोड़ 3 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। योजना के अंतर्गत किसानों को प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक, उन्नत किस्मों की रोपाई सामग्री तथा बरोज निर्माण के लिए सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
रीवा का पान भी बना पहचान
रीवा जिले के महसांव क्षेत्र के दो गांवों में उत्पादित पान की भी अलग पहचान है। यहां का पान उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों वाराणसी, प्रयागराज और लखनऊ तक बड़े पैमाने पर भेजा जाता है, जहां इसकी काफी मांग रहती है।
परंपरागत खेती से जुड़ा है चौरसिया समाज
मध्यप्रदेश में पान की खेती मुख्य रूप से चौरसिया समाज द्वारा परंपरागत रूप से की जाती रही है। पीढ़ियों से इस व्यवसाय से जुड़े किसान अपने अनुभव और पारंपरिक ज्ञान के आधार पर उच्च गुणवत्ता का पान तैयार करते हैं। पान की खेती में ‘बरोज’ नामक संरक्षित ढांचे का उपयोग किया जाता है, जहां तापमान और नमी को नियंत्रित कर पौधों की विशेष देखभाल की जाती है। यह प्रक्रिया श्रमसाध्य होती है, लेकिन इससे उत्कृष्ट गुणवत्ता का पान प्राप्त होता है।
चुनौतियों का भी करना पड़ रहा सामना
पान उत्पादकों को वर्तमान में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पान मसाला और गुटखा जैसे उत्पादों के बढ़ते प्रचलन ने पारंपरिक पान की मांग को प्रभावित किया है। युवाओं में इन उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता के कारण पान की खपत में कुछ कमी आई है, जिससे किसानों की आय पर असर पड़ा है। हालांकि, धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजनों में पान का महत्व आज भी बना हुआ है, जिससे इसकी स्थिर मांग बनी हुई है।
संस्कृति और परंपरा से जुड़ा है पान
भारतीय संस्कृति में पान का विशेष स्थान है। पूजा-पाठ, विवाह समारोह, धार्मिक अनुष्ठानों और अतिथि सत्कार में इसका व्यापक उपयोग किया जाता है। यही कारण है कि आधुनिक समय में भी पान की प्रासंगिकता बनी हुई है।
निर्यात से खुल रहे नए अवसर
मध्यप्रदेश का पान अब केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशी बाजारों में भी अपनी पहचान बना रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पान उत्पादकों को बेहतर विपणन सुविधाएं, निर्यात सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन मिलता रहा, तो यह क्षेत्र किसानों की आय बढ़ाने और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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