मध्यप्रदेश: मिर्च की उन्नत खेती पर कार्यशाला, एक्सपर्ट्स ने बताए कीट-रोग नियंत्रण और उत्पादन तकनीक के टिप्स
29 अप्रैल 2026, भोपाल: मध्यप्रदेश: मिर्च की उन्नत खेती पर कार्यशाला, एक्सपर्ट्स ने बताए कीट-रोग नियंत्रण और उत्पादन तकनीक के टिप्स – मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में किसानों की आय बढ़ाने और मिर्च की फसल को कीट-रोगों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से कृषि एवं उद्यानिकी विभाग द्वारा मंगलवार को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने मिर्च की खेती से जुड़ी वैज्ञानिक तकनीकों, उन्नत उत्पादन पद्धतियों और समेकित फसल प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी।
कार्यशाला में कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि मिर्च एक उपोष्णकटिबंधीय फसल है, जिसके लिए गर्म और आर्द्र जलवायु सबसे उपयुक्त होती है। इसके लिए काली मिट्टी को सर्वाधिक उपयुक्त माना गया है, जबकि जलभराव वाली भूमि में खेती से बचने की सलाह दी गई। विशेषज्ञों ने कहा कि सही स्थान चयन, मिट्टी की गुणवत्ता और उचित जल निकासी व्यवस्था उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
बीज उपचार और नर्सरी प्रबंधन पर जोर
वैज्ञानिकों ने किसानों को बेहतर अंकुरण के लिए बीज उपचार अनिवार्य रूप से अपनाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि ट्राइकोडर्मा (4 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज) या स्यूडोमोनास (10 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज) से उपचार करने पर रोगों का खतरा कम होता है। नर्सरी के लिए ऊंची क्यारियां और हाइब्रिड पौधों के लिए कोकोपीट ट्रे का उपयोग अधिक लाभकारी बताया गया।
बुवाई, पोषण और कीट नियंत्रण की जानकारी
कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि मिर्च की बुवाई जुलाई-अगस्त में और रोपाई अगस्त-सितंबर में करना उचित रहता है। पौधों के बीच सही दूरी और मृदा परीक्षण के आधार पर पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग करने की सलाह दी गई। नीम की खली 250 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर डालने से फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है।
कीट प्रबंधन के लिए थ्रिप्स, माइट्स और फल छेदक से बचाव हेतु खेत के चारों ओर मक्का या ज्वार की 3-4 कतारें लगाने की सलाह दी गई। साथ ही फेरोमोन ट्रैप और पक्षी बैठने के लिए खूटियां लगाने को भी उपयोगी बताया गया। आवश्यकतानुसार जैविक और अनुशंसित कीटनाशकों के सीमित उपयोग की सलाह दी गई।
कटाई और भंडारण पर जानकारी
विशेषज्ञों ने बताया कि मिर्च की कटाई साफ उपकरणों से समय पर करनी चाहिए। सुखाने के दौरान नमी को 60-85 प्रतिशत से घटाकर 8-12 प्रतिशत तक लाना आवश्यक है। भंडारण के लिए साफ, सूखी जगह और 4-7 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त रहता है।
कार्यशाला में किसानों को समेकित कीट प्रबंधन और समेकित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने की सलाह दी गई, जिससे उत्पादन लागत घटेगी और लाभ में वृद्धि होगी। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की कि वे आधुनिक तकनीकों को अपनाकर मिर्च की खेती को अधिक लाभकारी बनाएं।
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