मध्यप्रदेश: मृदा परीक्षण और एकीकृत खेती ने बदली किसान की तकदीर, 25 लाख पहुंची आय
07 जून 2026, भोपाल: मध्यप्रदेश: मृदा परीक्षण और एकीकृत खेती ने बदली किसान की तकदीर, 25 लाख पहुंची आय – मध्यप्रदेश विदिशा जिले के कुरवाई विकासखंड अंतर्गत ग्राम दांगी कुम्हारिया के प्रगतिशील किसान मदन ठाकुर ने आधुनिक कृषि तकनीकों, मृदा परीक्षण एवं एकीकृत खेती को अपनाकर खेती को लाभकारी व्यवसाय में परिवर्तित कर दिया है। उनकी सफलता आज क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
मदन ठाकुर, पिता कुंवर सिंह दांगी, बी.कॉम स्नातक हैं तथा लगभग 10 हेक्टेयर सिंचित भूमि पर खेती करते हैं। शिक्षा और जागरूकता के बल पर उन्होंने कृषि क्षेत्र में नवाचार अपनाते हुए अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है। उनका मानना है कि खेती में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तकनीकी जानकारी सफलता की कुंजी है।
मृदा परीक्षण से बढ़ा उत्पादन, घटी लागत
मदन ठाकुर बताते हैं कि पहले वे अपनी समझ के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करते थे, जिससे लागत अधिक आती थी और अपेक्षित उत्पादन नहीं मिल पाता था। कृषि विभाग के मार्गदर्शन में मृदा परीक्षण कराने के बाद उन्हें अपनी भूमि की पोषक तत्व आवश्यकताओं की सही जानकारी मिली। इसके आधार पर उन्होंने अनुशंसित मात्रा में ही उर्वरकों का उपयोग शुरू किया।
इस बदलाव का सकारात्मक परिणाम सामने आया। खेती की लागत में कमी आई और उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत तक वृद्धि हुई। जहां पहले गेहूं की फसल से अधिकतम 8 क्विंटल प्रति बीघा उत्पादन प्राप्त होता था, वहीं मृदा परीक्षण आधारित पोषण प्रबंधन अपनाने के बाद उन्होंने 15 क्विंटल प्रति बीघा तक उत्पादन प्राप्त किया।
एकीकृत खेती से बढ़े आय के स्रोत
किसान ने केवल पारंपरिक खेती तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि एकीकृत खेती मॉडल को अपनाकर आय के विभिन्न स्रोत विकसित किए। वे फसल उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन, उद्यानिकी तथा प्राकृतिक खेती भी कर रहे हैं।
प्राकृतिक खेती के लिए वे जीवामृत, घनजीवामृत और विभिन्न जैविक कीटनाशकों एवं पोषक तत्वों का निर्माण स्वयं करते हैं। इससे खेती की लागत कम होने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ रही है। एकीकृत खेती के माध्यम से उन्हें पूरे वर्ष आय प्राप्त होती है और खेती का जोखिम भी कम हुआ है।
तीन गुना तक बढ़ी वार्षिक आय
वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, मृदा परीक्षण तथा एकीकृत खेती के सकारात्मक परिणाम उनकी आय में स्पष्ट दिखाई देते हैं। श्री ठाकुर बताते हैं कि पहले रबी एवं खरीफ सीजन की फसलों से उन्हें वर्षभर में लगभग 8 लाख रुपये तक का लाभ प्राप्त होता था। वर्तमान में यही लाभ बढ़कर लगभग 25 लाख रुपये वार्षिक तक पहुंच गया है।
उनकी इस उपलब्धि ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाएं और विभागीय योजनाओं का लाभ लें तो खेती को अत्यधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
विभागीय योजनाओं से मिला संबल
श्री मदन ठाकुर नियमित रूप से कृषि विभाग, कुरवाई के संपर्क में रहते हैं तथा समय-समय पर संचालित योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर उनका लाभ उठाते हैं। कृषि विभाग के अलावा वे उद्यानिकी एवं कृषि अभियांत्रिकी विभाग की विभिन्न योजनाओं का भी लाभ ले रहे हैं।
वे बताते हैं कि भविष्य में अपनी आधी भूमि पर प्राकृतिक खेती को विस्तार देने की योजना है। साथ ही वे ऐसी फसलों का चयन करना चाहते हैं जो क्षेत्र की जलवायु के अनुकूल हों, कम लागत में अधिक उत्पादन दें तथा किसानों को बेहतर लाभ प्रदान करें।
प्रेरणादायक संदेश
श्री मदन ठाकुर की सफलता इस बात का उदाहरण है कि वैज्ञानिक कृषि तकनीकों, मृदा परीक्षण, प्राकृतिक खेती और विभागीय योजनाओं के समुचित उपयोग से किसान अपनी आय में कई गुना वृद्धि कर सकते हैं। उनकी उपलब्धियां क्षेत्र के अन्य किसानों को भी आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
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