मध्यप्रदेश: हर गांव में बनेगी ‘लखपति गोपालक दीदी’, उन्नत पशुपालन और डेयरी से महिलाओं की आय बढ़ाने पर जोर
09 जून 2026, भोपाल: मध्यप्रदेश: हर गांव में बनेगी ‘लखपति गोपालक दीदी’, उन्नत पशुपालन और डेयरी से महिलाओं की आय बढ़ाने पर जोर – ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और पशुपालन को आय का मजबूत माध्यम बनाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश सरकार ने हर गांव में कम से कम एक ‘लखपति गोपालक दीदी’ तैयार करने का लक्ष्य तय किया है। कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पशुपालन को केवल सहायक व्यवसाय न मानकर ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने का प्रभावी साधन बनाया जाए।
यह निर्देश सोमवार को इंदौर में आयोजित पशुपालन, डेयरी एवं मछुआ कल्याण विभाग की संयुक्त संभागीय समीक्षा बैठक में दिए गए। बैठक में प्रमुख सचिव पशुपालन उमाकांत उमराव, सचिव मत्स्य पालन स्वतंत्र कुमार सिंह, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, कलेक्टर शिवम वर्मा सहित विभिन्न जिलों के अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि महिला स्व-सहायता समूहों को पशुपालन गतिविधियों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जाए। इससे ग्रामीण महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगी।
दुग्ध व्यवसाय को मिलेगा संगठित स्वरूप
अधिकारियों को क्षीरधारा ग्राम योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश देते हुए बर्णवाल ने कहा कि गांवों में दुग्ध उत्पादन और दुग्ध व्यवसाय को संगठित रूप दिया जाए। दुग्ध उत्पादकों को आधुनिक तकनीकों, वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों और बेहतर विपणन सुविधाओं से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के प्रयास किए जाएं।
नस्ल सुधार और आधुनिक तकनीक पर फोकस
बैठक में हिरण्यगर्भ नस्ल सुधार अभियान को परिणाममूलक तरीके से संचालित करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों को उन्नत नस्ल के पशुओं की उपलब्धता बढ़ाने, कृत्रिम गर्भाधान जैसी आधुनिक तकनीकों का अधिक उपयोग करने तथा पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
साथ ही पशुपालकों को संतुलित और पौष्टिक पशु आहार की जानकारी एवं उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया। इसके लिए पशु पोषण संबंधी जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए।
प्रदेश को उन्नत नस्ल के पशुओं में आत्मनिर्भर बनाने की पहल
प्रमुख सचिव पशुपालन उमाकांत उमराव ने कहा कि प्रदेश को उन्नत नस्ल के पशुओं के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जाएं। इससे पशुपालकों को कम लागत पर स्थानीय स्तर पर बेहतर नस्ल के पशु उपलब्ध हो सकेंगे और उनकी आय में वृद्धि होगी। बैठक में पशु प्रजनन से जुड़े किसानों और उद्यमियों को संगठित कर ब्रीडर संघों के गठन पर भी चर्चा हुई।
गोशालाओं को बनाया जाएगा आत्मनिर्भर
कृषि उत्पादन आयुक्त ने गोशालाओं को आधुनिक, उन्नत और आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गोशालाओं को केवल पशु संरक्षण तक सीमित न रखकर जैविक खेती, गोबर गैस, वर्मी कम्पोस्ट और अन्य आयवर्धक गतिविधियों का केंद्र बनाया जाए।
मत्स्य पालन से भी बढ़ेगी ग्रामीण आय
बैठक में मत्स्य पालन विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को जलाशयों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों का अधिकतम उपयोग कर मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए। साथ ही केज कल्चर (केज पद्धति) को बढ़ावा देकर कम क्षेत्र में अधिक मत्स्य उत्पादन प्राप्त करने और मछुआरों की आय बढ़ाने पर जोर दिया गया।
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