मध्य प्रदेश खरीफ बुवाई 2026: सोयाबीन का दबदबा कायम, मक्का बनी किसानों की नई पसंद
24 जुलाई 2026, भोपाल: मध्य प्रदेश खरीफ बुवाई 2026: सोयाबीन का दबदबा कायम, मक्का बनी किसानों की नई पसंद – मध्य प्रदेश में खरीफ 2026 की बुवाई अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। 22 जुलाई 2026 तक राज्य में प्रमुख खरीफ फसलों की 122.49 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी है, जो निर्धारित लक्ष्य का 81.4 प्रतिशत है। पिछले वर्ष इसी अवधि की तुलना में भी बुवाई की गति लगभग समान बनी हुई है।
सोयाबीन : किसानों की पहली पसंद, लेकिन रकबा स्थिर
सोयाबीन अब भी मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी खरीफ फसल बनी हुई है। 54.09 लाख हेक्टेयर लक्ष्य के विरुद्ध 51.40 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी है, अर्थात लक्ष्य का 95 प्रतिशत पूरा हो गया है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि (51.01 लाख हेक्टेयर) के लगभग बराबर है, जिससे स्पष्ट है कि किसानों ने इस वर्ष भी सोयाबीन पर भरोसा कायम रखा है।
मुख्य क्षेत्र: इंदौर, उज्जैन, देवास, सीहोर, राजगढ़, शाजापुर, धार, हरदा, होशंगाबाद (नर्मदापुरम), विदिशा, रायसेन, मंदसौर एवं आगर-मालवा।
मक्का : सर्वाधिक तेजी से बढ़ती फसल
इस वर्ष खरीफ में यदि किसी फसल ने सबसे तेज रफ्तार दिखाई है तो वह मक्का है। 27.53 लाख हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 25.61 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी है, यानी 93 प्रतिशत लक्ष्य पूरा हो गया है। पिछले वर्ष इसी अवधि में 24.61 लाख हेक्टेयर बुवाई हुई थी। यह वृद्धि बताती है कि पशु आहार, स्टार्च उद्योग, एथेनॉल तथा निर्यात की बढ़ती मांग किसानों को आकर्षित कर रही है।
मुख्य क्षेत्र: छिंदवाड़ा, बैतूल, सिवनी, झाबुआ, अलीराजपुर, खरगोन, बड़वानी, धार, मंडला तथा डिंडोरी।
धान : अच्छी वर्षा से मिला सहारा
धान की बुवाई 39.63 लाख हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 19.54 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो लक्ष्य का लगभग 49 प्रतिशत है। हालांकि धान की बुवाई अभी जारी है और पूर्वी तथा दक्षिण-पूर्वी जिलों में वर्षा के साथ इसमें तेजी आने की संभावना है।
मुख्य क्षेत्र: बालाघाट, मंडला, डिंडोरी, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सिंगरौली, सिवनी, कटनी तथा नरसिंहपुर।
दालें : अरहर में उत्साह, उड़द-मूंग पीछे
दलहनों का कुल रकबा अभी लक्ष्य से पीछे है।
- अरहर में 2.17 लाख हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 2.11 लाख हेक्टेयर बुवाई होकर 97 प्रतिशत लक्ष्य पूरा हो चुका है।
- उड़द का प्रदर्शन कमजोर रहा है। 5.31 लाख हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले केवल 6.17 लाख हेक्टेयर? (आंकड़ों में लक्ष्य की तुलना में प्रगति प्रतिशत 116.3 दर्शाया गया है, जिससे संकेत मिलता है कि कुछ क्षेत्रों में लक्ष्य से अधिक बुवाई हुई है।)
- मूंग में भी अपेक्षाकृत कम प्रगति दर्ज की गई है।
मुख्य क्षेत्र
- अरहर: छतरपुर, टीकमगढ़, दमोह, सागर, रीवा, सतना।
- उड़द: विदिशा, सागर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, राजगढ़।
- मूंग: निमाड़ एवं मालवा क्षेत्र, विशेषकर खरगोन, खंडवा, बड़वानी।
तिलहन : सोयाबीन के साथ मूंगफली ने भी दिखाई मजबूती
मूंगफली में 6.17 लाख हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 5.34 लाख हेक्टेयर बुवाई हो चुकी है, जो लगभग 86 प्रतिशत है। तिल और अन्य लघु तिलहनों का रकबा अपेक्षाकृत कम है। कुल तिलहन क्षेत्र लक्ष्य का 93 प्रतिशत छू चुका है।
मुख्य क्षेत्र
- मूंगफली: छतरपुर, टीकमगढ़, दतिया, भिंड, मुरैना।
- तिल: मंडला, डिंडोरी, बालाघाट, शहडोल।
कपास : लक्ष्य के करीब
कपास की बुवाई 5.72 लाख हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 5.79 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है, अर्थात लक्ष्य से भी अधिक क्षेत्र में बुवाई हो चुकी है।
मुख्य क्षेत्र: खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, बड़वानी तथा धार।
क्षेत्रवार कृषि परिदृश्य
- मालवा: सोयाबीन का सबसे बड़ा उत्पादन क्षेत्र।
- निमाड़: कपास, मक्का और मूंग का प्रमुख क्षेत्र।
- महाकौशल: धान और मक्का का मजबूत क्षेत्र।
- बुंदेलखंड: अरहर, उड़द और मूंगफली की प्रमुख खेती।
- विंध्य: धान, अरहर और तिलहन का मिश्रित क्षेत्र।
- सतपुड़ा एवं आदिवासी क्षेत्र: मक्का, कोदो-कुटकी और धान का वर्चस्व।
कृषक जगत विश्लेषण
इस वर्ष की बुवाई से तीन स्पष्ट संकेत उभरकर सामने आए हैं—
- सोयाबीन का वर्चस्व बरकरार है, लेकिन रकबे में उल्लेखनीय विस्तार नहीं हुआ।
- मक्का किसानों की नई पसंद बनकर उभर रही है, जिसका कारण बेहतर बाजार, उद्योगों की मांग और अपेक्षाकृत स्थिर कीमतें हैं।
- फसल विविधीकरण धीरे-धीरे बढ़ रहा है, विशेषकर मक्का, अरहर और कपास की ओर किसानों का रुझान दिखाई दे रहा है।
यदि आगामी दिनों में वर्षा सामान्य बनी रहती है और उर्वरक एवं कीटनाशकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होती है, तो मध्य प्रदेश एक बार फिर देश के प्रमुख खरीफ उत्पादक राज्यों में अग्रणी स्थान बनाए रख सकता है। हालांकि अगस्त के मौसम और वर्षा का वितरण ही इस खरीफ सीजन की अंतिम तस्वीर तय करेगा।

