राज्य कृषि समाचार (State News)

जे.एस. 20-116: राजस्थान के किसानों के लिए सोयाबीन की सुनहरी किस्म

27 जून 2025, जयपुर: जे.एस. 20-116: राजस्थान के किसानों के लिए सोयाबीन की सुनहरी किस्म – राजस्थान के बूंदी जिले में मंगलवार, 24 जून 2025 को कृषि विज्ञान केंद्र, केशवरायपाटन में एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में मॉडल ऑइलसीड विलेज योजना के तहत चयनित गाँव भीया के किसानों को सोयाबीन उत्पादन की आधुनिक तकनीकों और पौध संरक्षण के उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई। यह प्रशिक्षण अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन का हिस्सा था, जिसका मकसद किसानों की आय बढ़ाना और सोयाबीन की पैदावार को नई ऊंचाइयों तक ले जाना है।

सोयाबीन की पैदावार बढ़ाने की पहल

कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष प्रो. हरीश वर्मा ने बताया कि मॉडल ऑइलसीड विलेज कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल सोयाबीन की पैदावार बढ़ाना है, बल्कि स्थानीय स्तर पर उन्नत किस्मों के बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने कहा, “एकीकृत फसल प्रबंधन और समन्वित कीट-रोग नियंत्रण तकनीकों को अपनाकर किसान न सिर्फ अधिक पैदावार हासिल कर सकते हैं, बल्कि उत्पादित बीज को अगली बुवाई के लिए उपयोग या अन्य किसानों को बेचकर अतिरिक्त आय भी कमा सकते हैं।”

प्रो. वर्मा ने सोयाबीन की फसल को कीटों और रोगों से बचाने के लिए बीजोपचार की सलाह दी। उन्होंने बताया कि बुवाई से पहले बीज को कार्बेन्डाजिम फफूंदनाशक (2 ग्राम/किलो बीज)थायोमिथाक्सम 30 एफ.एस. कीटनाशक (10 मिली/किलो बीज) और राइजोबियम व फास्फोबैक्टीरिया जीवाणु कल्चर (5 मिली/किलो बीज) से उपचारित करना चाहिए। इससे फसल को कीटों और रोगों से सुरक्षा मिलती है, जिससे पैदावार में इजाफा होता है।

जे.एस. 20-116: बंपर पैदावार की उन्नत किस्म

तिलहन तकनीकी सहायक विजेंद्र कुमार वर्मा ने सोयाबीन की उन्नत किस्म जे.एस. 20-116 की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। यह किस्म मध्यम अवधि (95-100 दिन) में पककर तैयार होती है और अनुकूल परिस्थितियों में 20-25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की पैदावार दे सकती है। इसकी खासियतें इस प्रकार हैं:

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  • विशेषताएं: सफेद फूल, चिकने तने और फलियां, मध्यम ऊंचाई, पीले दाने, उच्च अंकुरण क्षमता।
  • बीज: मध्यम आकार, काले रंग की नाभिका।
  • तेल की मात्रा: 19-20%।
  • प्रतिरोधक क्षमता: यह किस्म पीला मोजेक, चारकोल सड़न, राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट, पत्ती धब्बा, तना मक्खी, तना छेदक और पत्ती भक्षक इल्लियों जैसे रोगों और कीटों के प्रति सहनशील है।

इस अवसर पर किसानों को जे.एस. 20-116 किस्म के प्रदर्शन के लिए आवश्यक सामग्री (आदान) भी वितरित की गई।

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