पारंपरिक फसलें छोड़ी, ड्रैगन फ्रूट और एकीकृत खेती से जौनपुर के किसान की सालाना 5 लाख की कमाई
10 सितंबर 2026, जौनपुर: पारंपरिक फसलें छोड़ी, ड्रैगन फ्रूट और एकीकृत खेती से जौनपुर के किसान की सालाना 5 लाख की कमाई – मुफ्तीगंज ब्लॉक के पसेरा गांव के किसान अर्पित मेस्सी ने परंपरागत फसलों की बढ़ती लागत और घटते मुनाफे से तंग आकर करीब तीन हजार ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाए और अब हर साल लगभग 5 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं। उन्होंने अपने खेत में पौधों को सहारा देने के लिए 750 सीमेंट के खंभे लगवाए हैं और सालाना करीब 50 क्विंटल फल का उत्पादन ले रहे हैं।
स्थानीय थोक बाजार में ड्रैगन फ्रूट की कीमत 160 रुपये प्रति किलो तक मिल रही है, जिससे अर्पित की सालाना आय में बड़ा इजाफा हुआ है। जिला उद्यान विभाग की ओर से उन्हें “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” योजना के तहत ड्रिप सिंचाई पर 90 प्रतिशत तक का अनुदान भी मिला, जिससे शुरुआती लागत काफी कम हो गई।
परंपरागत खेती से एकीकृत मॉडल तक का सफर
अर्पित बताते हैं कि परंपरागत फसलों में लागत ज्यादा और मुनाफा कम होने के चलते उन्होंने बाजार में मांग को देखते हुए व्यावसायिक बागवानी की ओर रुख किया। उनका मानना है कि सरकारी योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठाकर और नई तकनीक अपनाकर खेती को घाटे का सौदा नहीं बनने दिया जा सकता। उन्होंने सिर्फ ड्रैगन फ्रूट तक सीमित न रहकर अपने खेत को एक एकीकृत कृषि मॉडल में बदल दिया है।
खेत परिसर में वे मुर्गीपालन भी कर रहे हैं और सौर ऊर्जा का उपयोग सिंचाई व अन्य कार्यों में कर रहे हैं। इसके अलावा वे ड्रैगन फ्रूट के बीच खाली जगह में सब्जियों की अंतर-फसली खेती करते हैं, जिसमें ग्राफ्टेड बैंगन, भिंडी और पपीता शामिल हैं। ड्रैगन फ्रूट की नर्सरी तैयार कर पौधे बेचना भी उनकी आय का एक अतिरिक्त जरिया बन गया है।
इस तरह अर्पित की आय सिर्फ एक फसल पर निर्भर नहीं है, बल्कि फल, सब्जी, पौध बिक्री और मुर्गीपालन से साल भर अलग-अलग समय पर पैसा आता रहता है। इससे किसी एक फसल में कीमत गिरने या नुकसान होने पर भी पूरी आय पर असर नहीं पड़ता, जो छोटे किसानों के लिए जोखिम प्रबंधन का एक कारगर तरीका माना जाता है।
सौर ऊर्जा का उपयोग करने से खेत में सिंचाई और अन्य कामों पर बिजली या डीजल का खर्च भी काफी हद तक घट गया है, जिससे उनकी कुल लागत नियंत्रण में रहती है।
दूसरे किसानों के लिए सीख
जिला उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार अर्पित का मॉडल इलाके के अन्य किसानों को भी बागवानी और एकीकृत खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। खासकर वे किसान जिनके पास सीमित जमीन है, उनके लिए मुर्गीपालन, सब्जी और फलों की मिली-जुली खेती एक साथ अपनाना आय का जोखिम बांटने में मददगार साबित हो सकता है।
उनकी नर्सरी से आसपास के इलाकों के किसान भी ड्रैगन फ्रूट के पौधे खरीदकर अपने खेतों में लगा रहे हैं, जिससे जिले में इस फल की खेती का दायरा धीरे-धीरे बढ़ रहा है। पौधे, फल और सब्जियों की बिक्री से अलग-अलग महीनों में नकदी आने से अर्पित को खेती से जुड़े नियमित खर्चों के लिए बार-बार कर्ज लेने की जरूरत भी नहीं पड़ती।
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