राज्य कृषि समाचार (State News)

नवाचार, डेटा सुरक्षा और नई तकनीकें भारतीय कृषि का भविष्य : श्री हेगड़े

(एफएमसी इंडिया के प्रबंध निदेशक श्री प्रशांत हेगड़े से कृषक जगत के सचिन बोंद्रिया की विशेष चर्चा)

13 जून 2026, इंदौर: नवाचार, डेटा सुरक्षा और नई तकनीकें भारतीय कृषि का भविष्य : श्री हेगड़े – भारतीय कृषि को अधिक उत्पादक, टिकाऊ और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए नवाचार, अनुसंधान, डेटा सुरक्षा तथा आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देना आवश्यक है। यह बात श्री प्रशांत हेगड़े ने भोपाल में आयोजित उत्पाद लॉन्च कार्यक्रम के दौरान कृषक जगत से विशेष चर्चा में कही। उन्होंने कहा कि विज्ञान आधारित नवाचार ही किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। एफएमसी का उद्देश्य नई पीढ़ी के किसानों के लिए आधुनिक एवं उपयोगी समाधान उपलब्ध कराना है।

श्री हेगड़े ने नए कीटनाशक प्रबंधन कानून और कृषि अनुसंधान के संदर्भ में कहा कि देश में अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित करने के लिए डेटा सुरक्षा के मजबूत प्रावधान आवश्यक हैं। उनके अनुसार नई तकनीकों और मॉलिक्यूल के विकास में वर्षों का समय और भारी निवेश लगता है, इसलिए नवाचार को पर्याप्त संरक्षण मिलना चाहिए। इससे भारत में निवेश और नई कृषि तकनीकों के विकास को गति मिलेगी।

नकली कीटनाशकों की बढ़ती समस्या पर उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा निगरानी और नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए गए हैं, लेकिन प्रभावी क्रियान्वयन सबसे महत्वपूर्ण है। नकली और अवैध कृषि आदानों से किसानों को आर्थिक नुकसान होता है तथा कृषि उत्पादों की गुणवत्ता और निर्यात भी प्रभावित होता है।

श्री हेगड़े ने बताया कि एफएमसी इंडिया ने हाल ही में किसानों के लिए रेज़ोनेक्स कीटनाशक, वायोबेल खरपतवारनाशी, ज़ेडेलिस कीटनाशक, वायटेग्रिस बो-ला पौध पोषण उत्पाद तथा राइम फफूंदीनाशक प्रस्तुत किए हैं। इनमें रेज़ोनेक्स विशेष रूप से उल्लेखनीय है, क्योंकि यह भारत की पहली डिस्पर्सिबल टैबलेट तकनीक पर आधारित कीटनाशक है, जिसे धान में तना छेदक के नियंत्रण के लिए विकसित किया गया है।

संतुलित पोषण और मृदा स्वास्थ्य पर ज़ोर – श्री हेगड़े ने कहा कि देश के कई क्षेत्रों में उर्वरकों के असंतुलित उपयोग से मिट्टी की सेहत प्रभावित हो रही है। किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर पोषक तत्वों का उपयोग करना चाहिए तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करने पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि संतुलित पोषण से उत्पादकता और गुणवत्ता दोनों में सुधार संभव है।

मौसमीय चुनौतियों के लिए तैयारी ज़रूरी – एल-नीनो जैसी संभावित मौसमीय परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने किसानों को समय पर बुवाई, जल संरक्षण और मौसम आधारित फसल प्रबंधन अपनाने की सलाह दी। उनका कहना था कि वैज्ञानिक सलाह और आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर किसान जोखिम को कम कर सकते हैं।

अंत में श्री हेगड़े ने कहा कि एफएमसी इंडिया का लक्ष्य विज्ञान आधारित नवाचारों के माध्यम से किसानों को ऐसे समाधान उपलब्ध कराना है, जो उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ टिकाऊ कृषि को भी बढ़ावा दें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और किसान-केंद्रित नवाचार भारतीय कृषि को नई दिशा देंगे तथा कृषि क्षेत्र की दीर्घकालिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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