सोयाबीन व मक्का में कीट और रोगों का बढ़ा प्रकोप, समय पर नियंत्रण की कृषि विभाग ने दी सलाह
30 अगस्त 2026, भोपाल: सोयाबीन व मक्का में कीट और रोगों का बढ़ा प्रकोप, समय पर नियंत्रण की कृषि विभाग ने दी सलाह – वर्तमान में सोयाबीन की फसल लगभग दो माह की हो गई है। सोयाबीन उत्पादक क्षेत्रों में फफूंदजनित रोग रायजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट एवं एन्थ्राक्नोज, चक्र भृंग, पत्ती खाने वाली इल्लियों और यलो मोजेक रोग का प्रकोप देखा जा रहा है। खंडवा जिले के उप संचालक कृषि नितेश यादव ने सोयाबीन उत्पादक किसानों को रोगों के लक्षण और कीटों की पहचान के आधार पर समय पर जरूरी उपाय अपनाने की सलाह दी है।
उन्होंने बताया कि पत्ती खाने वाली तंबाकू की इल्ली के नियंत्रण के लिए केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड द्वारा अनुशंसित कीटनाशकों में से किसी एक का छिड़काव किया जा सकता है। इनमें क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 18.5 एस.सी. 150 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, स्पायनेटोरम 11.7 एस.सी. 450 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, इमामेक्टिन बेंजोएट 1.90 प्रतिशत 425 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, फ्लूवेंडियामाइड 20 डब्ल्यू.जी. 250-300 ग्राम प्रति हेक्टेयर, फ्लूवेंडियामाइड 39.35 एस.सी. 150 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, इंडोक्साकार्ब 15.8 एस.सी. 333 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, क्लोरफ्लूआजुरोन 5.40 ई.सी. 500 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, नोवाल्युरोन + इन्डोक्साकार्ब 4.50 प्रतिशत एस.सी. 825-875 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर या ब्रोफ्लानिलाइड 300 ग्राम प्रति लीटर एस.सी. 42-62 ग्राम प्रति हेक्टेयर शामिल हैं।
पीला मोजेक और सोयाबीन मोजेक रोग के लक्षण दिखाई देने पर प्रारंभिक अवस्था में ही रोगग्रस्त पौधों को खेत से उखाड़कर बाहर करने की सलाह दी गई है। इन रोगों को फैलाने वाले सफेद मक्खी और एफिड की रोकथाम के लिए थायोमिथोक्सम + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 125 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, बीटासायफ्लुथ्रिन + इमिडाक्लोप्रिड 350 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर या एसिटेमीप्रीड 25 प्रतिशत + बायफेंथ्रिन 25 प्रतिशत डब्ल्यू.जी. 250 ग्राम प्रति हेक्टेयर का छिड़काव किया जा सकता है। इनके छिड़काव से तना मक्खी का भी नियंत्रण किया जा सकता है। सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए खेत में अलग-अलग स्थानों पर पीला स्टिकी ट्रैप लगाने की सलाह भी दी गई है।
एन्थ्राक्नोज और रायजोक्टोनिया से बचाव
उप संचालक कृषि श्री यादव ने बताया कि एन्थ्राक्नोज फफूंदजनित रोग है। इसकी शुरुआत सोयाबीन की पत्तियों की निचली सतह पर शिराओं के काले पड़ने से होती है। समय पर नियंत्रण नहीं होने पर धीरे-धीरे फलियों सहित पूरा पौधा काला होकर सूख सकता है। इसके प्रारंभिक लक्षण दिखाई देने पर कार्बेन्डाजिम 12 प्रतिशत + मेन्कोजेब 63 प्रतिशत डब्ल्यू.पी. 1.25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर, टेवूकोनाजोल 25.9 ई.सी. 625 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, टेवूकोनाजोल 38.39 एस.सी. 625 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर या टेवूकोनाजोल 10 प्रतिशत + सल्फर 65 प्रतिशत डब्ल्यू.जी. 1.25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।रायजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट रोग की शुरुआत पत्तियों पर पानी जैसे दाग के रूप में दिखाई देती है। नियंत्रण नहीं होने पर पौधे पूरी तरह सूख सकते हैं। इसके लक्षण दिखाई देने पर स्लुक्साप्रोक्साड + पायरोक्लोस्ट्रोबीन 300 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर या पायरोक्लोस्ट्रोबीन + इपोक्सीकोनाजोल 750 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
अन्य कीटों से बचाव के उपाय
पत्ती खाने वाली सेमीलूपर इल्ली के नियंत्रण के लिए भी केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड द्वारा अनुशंसित कीटनाशकों में से किसी एक के उपयोग की सलाह दी गई है। इनमें इमामेक्टिन बेंजोएट 425 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, फ्लूवेंडियामाइड 20 डब्ल्यू.जी. 250-300 ग्राम प्रति हेक्टेयर, फ्लूवेंडियामाइड 39.35 एस.सी. 150 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, इंडोक्साकार्ब 15.8 एस.सी. 333 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 4.90 सी.एस. 300 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, प्रोफेनोफॉस 50 ई.सी. 1 लीटर प्रति हेक्टेयर, नोवाल्युरोन + इन्डोक्साकार्ब 4.50 प्रतिशत एस.सी. 825-875 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 9.30 प्रतिशत + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 4.60 प्रतिशत जेड.सी. 200 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर या ब्रोफ्लानिलाइड 300 ग्राम प्रति लीटर एस.सी. 42-62 ग्राम प्रति हेक्टेयर शामिल हैं।
चक्र भृंग के लक्षण दिखाई देने पर प्रारंभिक अवस्था में ही नियंत्रण करने की सलाह दी गई है। इसके लिए थायक्लोप्रिड 21.7 एस.सी. 750 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, टेट्रानिलिप्रोल 18.18 एस.सी. 250-300 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 18.5 एस.सी. 150 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, इमामेक्टिन बेंजोएट 425 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर या प्रोफेनोफॉस 50 ई.सी. 1 लीटर प्रति हेक्टेयर का छिड़काव किया जा सकता है। इसके फैलाव को रोकने के लिए प्रारंभिक अवस्था में ही पौधे के ग्रसित हिस्से को तोड़कर नष्ट करने की सलाह दी गई है।
पत्ती खाने वाली इल्लियों, सफेद मक्खी, जैसिड और तना मक्खी सहित अन्य कीटों के एक साथ नियंत्रण के लिए थायोमिथोक्सम 12.60 प्रतिशत + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 9.50 प्रतिशत जेड.सी. 125 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, बीटासायफ्लुथ्रिन + इमिडाक्लोप्रिड 350 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 9.30 प्रतिशत + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 4.60 प्रतिशत जेड.सी. 200 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर या इंडोक्साकार्ब 15.8 एस.सी. 333 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर के छिड़काव की सलाह दी गई है। सोयाबीन में तना मक्खी और सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए लक्षण दिखाई देने पर थायोमिथोक्सम 12.60 प्रतिशत + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 9.50 प्रतिशत जेड.सी. 125 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, बीटासायफ्लुथ्रिन + इमिडाक्लोप्रिड 350 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर या आइसोसायक्लोसेरम 9.2 प्रतिशत डब्ल्यू.डब्ल्यू.डी.सी. 600 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
मक्का में फॉल आर्मी वर्म की रोकथाम
मक्का फसल में फॉल आर्मी वर्म का प्रकोप होने पर नोवाल्युरोन 5.25 प्रतिशत + इंडोक्साकार्ब 4.5 प्रतिशत एस.सी. अथवा नोवाल्युरोन 5.25 प्रतिशत + इमामेक्टिन बेंजोएट 0.9 प्रतिशत एस.सी. का 35 मिलीलीटर प्रति पंप की दर से छिड़काव करने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही खेत में ‘T’ आकार की 20 खूंटियां प्रति एकड़ लगाने से भी कीट का नियंत्रण किया जा सकता है। उप संचालक कृषि श्री यादव ने बताया कि समय पर रोगों की पहचान और उनका नियंत्रण करने से कीट एवं रोगों के प्रसार को काफी हद तक रोका जा सकता है।
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