सोयाबीन और मक्का की फसल में खरपतवार नियंत्रण कैसे करें? कृषि वैज्ञानिकों ने बताए प्रभावी उपाय
24 जुलाई 2026, भोपाल: सोयाबीन और मक्का की फसल में खरपतवार नियंत्रण कैसे करें? कृषि वैज्ञानिकों ने बताए प्रभावी उपाय – खरीफ सीजन में सोयाबीन और मक्का की फसल में खरपतवार तेजी से बढ़ने लगते हैं, जिससे फसल की बढ़वार और उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इसे देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), हरदा ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए समय पर खरपतवार नियंत्रण करने की सलाह दी है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि शुरुआती अवस्था में खरपतवारों पर नियंत्रण कर किसान फसल की बेहतर वृद्धि और अधिक उत्पादन सुनिश्चित कर सकते हैं।
कृषि वैज्ञानिकों ने सोयाबीन किसानों को सलाह दी है कि खरपतवार नियंत्रण के लिए हाथ से निंदाई, डोरा या कुल्पा का उपयोग करने के साथ-साथ अनुशंसित खरपतवारनाशकों का प्रयोग करें। बुवाई के 15 से 20 दिन बाद आवश्यकता अनुसार क्लेथोडिम 13 प्रतिशत ईसी (1000 मिली.), इमेझेथापायर 10 एसएल (1 लीटर), इमेझेथापायर 70 प्रतिशत डब्ल्यूजी (100 ग्राम), किजालोफाप इथाइल 5 ईसी (0.75 से 1 लीटर), फेनाक्सीफाप-पी-इथाइल 9.3 ईसी (1.11 लीटर), हेलाक्सिफॉप आर मिथाइल 10.5 ईसी (1 से 1.25 लीटर) अथवा इमेझेथापायर + इमेजामॉक्स (100 ग्राम प्रति हेक्टेयर) में से किसी एक अनुशंसित खरपतवारनाशी का छिड़काव किया जा सकता है।
छिड़काव के समय रखें इन बातों का ध्यान
कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि खरपतवारनाशी का छिड़काव करते समय पर्याप्त मात्रा में पानी का उपयोग करें। साथ ही खड़ी फसल में बेहतर परिणाम के लिए फ्लड जेट या फ्लैट फैन नोजल का ही प्रयोग करें, ताकि दवा का समान रूप से छिड़काव हो सके और खरपतवारों पर प्रभावी नियंत्रण मिल सके।
मक्का की फसल के लिए भी जारी हुई सलाह
मक्का की फसल में सकरी और चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के नियंत्रण के लिए अट्राजिन + टोप्रामेजोन का 775 ग्राम सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेयर की अनुशंसित मात्रा में उपयोग करने की सलाह दी गई है। इससे खरपतवारों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है और फसल की बढ़वार प्रभावित नहीं होती।
25 दिन से अधिक पुरानी फसल में न करें उपयोग
कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को आगाह किया है कि 25 दिन से अधिक आयु वाली फसल में खरपतवारनाशकों का उपयोग अनुशंसित नहीं है। इसलिए समय रहते खरपतवार नियंत्रण के उपाय अपनाना जरूरी है, ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके और उत्पादन में कमी न आए। अधिक जानकारी या तकनीकी मार्गदर्शन के लिए किसान कृषि विज्ञान केंद्र, हरदा से संपर्क कर सकते हैं।
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