ग्वालियर: जैविक-प्राकृतिक खेती से लिखी समृद्धि की नई इबारत
20 जुलाई 2026, ग्वालियर: ग्वालियर: जैविक-प्राकृतिक खेती से लिखी समृद्धि की नई इबारत – वर्तमान दौर में जब कृषि में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग से मिट्टी की उर्वरता, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहा प्रतिकूल प्रभाव बड़ी समस्या बन गया है। ऐसे समय में ग्वालियर जिले के ग्राम देवरा के प्रगतिशील किसान श्री बृजेन्द्र रावत जैविक एवं प्राकृतिक खेती की मिसाल बनकर उभरे हैं। उन्होंने अपनी खेती को पूरी तरह रसायन मुक्त बना दिया है। जैविक प्रमाणन, मूल्य संवर्धन और बेहतर विपणन को अपनाकर बृजेन्द्र रावत ने यह साबित कर दिया कि जैविक एवं प्राकृतिक खेती पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने का भी प्रभावी माध्यम है। आज वे अनेक किसानों को टिकाऊ, लाभकारी और स्वस्थ कृषि प्रणाली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
दिल की बीमारी से निकला जैविक खेती का रास्ता- वर्ष 2002 से खेती कर रहे श्री बृजेन्द्र रावत प्रारंभिक वर्षों में पारंपरिक रासायनिक खेती करते थे। वर्ष 2016 में हृदय संबंधी गंभीर बीमारी के उपचार के दौरान चिकित्सकों ने उन्हें रासायनिक कृषि में प्रयुक्त हानिकारक रसायनों से दूर रहने की सलाह दी। इस सलाह ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी। उन्होंने अपनी लगभग 20 बीघा कृषि भूमि पर रासायनिक खेती त्याग कर पूरी तरह जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाने का निर्णय लिया और पीछे मुड़कर नहीं देखा।
वैल्यू एडीशन से बढ़ गई आमदनी – कृषक श्री बृजेन्द्र रावत की सफलता केवल जैविक उत्पादन तक सीमित नहीं है। उन्होंने खेती में मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) को भी अपनाया। वे गेहूं को सीधे बेचने के बजाय उसका आटा और दलिया तैयार कर उपभोक्ताओं तक पहुंचाते हैं। इससे उनके उत्पादों का मूल्य बढ़ा और उन्हें सामान्य बाजार की तुलना में अधिक लाभ मिलने लगा। कृषि विभाग ने विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया। साथ ही प्रदेश में मनाए जा रहे किसान कल्याण वर्ष के उपलक्ष्य में जिला प्रशासन की पहल पर हर हफ्ते आयोजित हो रहे ‘जैविक सेतु’ (जैविक खाद) के जरिए उनके जैविक उत्पादों के विपणन की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की। वर्तमान में इस विक्रय केंद्र के माध्यम से उनके जैविक उत्पादों की लगभग 3.50 लाख रुपये की बिक्री हो चुकी है। इसके अतिरिक्त अन्य माध्यमों से भी उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।
उत्पादों को मिली प्रमाणिक पहचान – जैविक खेती को वैज्ञानिक आधार देने के लिए उन्होंने वर्ष 2016 में Green Cert के माध्यम से APEDA का जैविक प्रमाणन प्राप्त किया। इससे उनके उत्पादों को प्रमाणित पहचान मिली और उपभोक्ताओं का विश्वास भी बढ़ा। वर्तमान में उनके खेतों में धान की देशी एवं उन्नत किस्में, गेहूं, विभिन्न प्रकार की सब्जियां तथा अन्य फसलें पूर्णतः जैविक पद्धति से उत्पादित की जाती हैं। उनके खेत आज रसायन मुक्त, स्वस्थ और टिकाऊ कृषि प्रणाली का सफल उदाहरण बन चुके हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सराहना भी मिली- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का प्रोत्साहन भी बृजेन्द्र रावत को मिला है। बीते दिनों ग्वालियर में उन्नत कृषि पर आयोजित संभागीय कार्यशाला में बृजेन्द्र रावत ने प्राकृतिक खेती पर अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जैविक खेती के क्षेत्र में बृजेन्द्र रावत के प्रयासों की सराहना की और उनका उत्साहवर्धन किया। विजेंद्र रावत का मानना है कि जैविक एवं प्राकृतिक खेती केवल खेती की एक पद्धति नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ जीवन, सुरक्षित पर्यावरण और उपजाऊ मिट्टी का संकल्प है। उनका कहना है कि वैज्ञानिक तकनीकों, जैविक प्रमाणन, मूल्य संवर्धन और प्रत्यक्ष विपणन को अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न भी उपलब्ध करा सकते हैं।
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