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राज्य कृषि समाचार (State News)

गिन्नी घास: पशुओं के लिए पौष्टिक चारा और किसानों के लिए उपयोगी फसल

24 जुलाई 2026, भोपाल: गिन्नी घास: पशुओं के लिए पौष्टिक चारा और किसानों के लिए उपयोगी फसल – गिन्नी घास पशुपालन करने वाले किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण चारा फसल है। इसका वानस्पतिक नाम मेगार्थिसस मैक्सिमस (Megathyrsus maximus) है। इसे मुख्य रूप से पशुओं के चारे और साइलेज (आचार) बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। इसकी विशेषता यह है कि यह तेजी से बढ़ने वाली और लंबे समय तक हरी रहने वाली घास है।

गिन्नी घास सामान्यतः 3 से 4 मीटर तक लंबी होती है और इसे सदाबहार घास के रूप में जाना जाता है। इसके पत्ते लंबे होते हैं और उनके सिरे तीखे दिखाई देते हैं। पत्ते के मध्य स्थित मुख्य नाड़ी लगभग 1 सेंटीमीटर चौड़ी होती है। इसके बीज का सिरा लगभग 40 सेंटीमीटर लंबा, आयताकार तथा हरे-जामुनी रंग का होता है।

यह घास मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय अफ्रीका, यमन, फिलिस्तीन और भारत में पाई जाती है। भारत में पंजाब गिन्नी घास का प्रमुख उत्पादक राज्य माना जाता है।

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पशुपालकों के लिए गिन्नी घास इसलिए उपयोगी है क्योंकि इसे हरे चारे के रूप में पशुओं को खिलाया जा सकता है। इसके अलावा इसे संरक्षित कर साइलेज के रूप में भी उपयोग किया जाता है, जिससे चारे की उपलब्धता कम होने वाले मौसम में पशुओं के लिए भोजन की व्यवस्था बनी रहती है। गिन्नी घास का उत्पादन पशुपालन आधारित किसानों के लिए आय का अतिरिक्त साधन भी बन सकता है। बढ़ती डेयरी गतिविधियों और गुणवत्तापूर्ण हरे चारे की मांग के बीच ऐसी चारा फसलों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। किसानों को स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेकर इसकी उपयुक्त किस्म, सिंचाई और कटाई प्रबंधन अपनाना चाहिए, ताकि पशुओं को वर्षभर पौष्टिक चारा उपलब्ध कराया जा सके।

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