राज्य कृषि समाचार (State News)

भावांतर से लेकर यंत्रीकरण तक किसानों की आय बढ़ाना और लागत घटाना हमारा संकल्प: सीएम मोहन यादव  

08 मई 2026, भोपाल: भावांतर से लेकर यंत्रीकरण तक किसानों की आय बढ़ाना और लागत घटाना हमारा संकल्प: सीएम मोहन यादव – मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ में कृषि विभाग ने अन्नदाता को अन्न से लेकर आय तक, परंपरा से लेकर तकनीक तक हर मोर्चे पर सशक्त किया है। उन्होंने कहा कि समर्थन मूल्य, भावांतर भुगतान योजना, श्रीअन्न प्रोत्साहन, भंडारण व्यवस्था, डिजिटल सिस्टम और कृषि यंत्रीकरण के माध्यम से प्रदेश का किसान अब लागत घटाकर और आय बढ़ाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि किसानों की आय बढ़े और खेती की लागत कम हो। इसी दिशा में कृषि क्षेत्र में लगातार नीतिगत सुधार किए जा रहे हैं और योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है।

समर्थन मूल्य और उपार्जन व्यवस्था में विस्तार

प्रदेश में रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं खरीदी में स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 कर दी गई है। वहीं चना और मसूर का उपार्जन 30 मार्च से 28 मई 2026 तक जारी है। उड़द प्रोत्साहन योजना 2026 के तहत समर्थन मूल्य के अतिरिक्त 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का निर्णय लिया गया है, जिससे ग्रीष्मकालीन उड़द का रकबा बढ़ने की संभावना है।

भावांतर योजना से किसानों को बड़ा लाभ

भावांतर भुगतान योजना के अंतर्गत 7.10 लाख पंजीकृत किसानों ने 16.95 लाख मीट्रिक टन सोयाबीन का विक्रय किया है। समर्थन मूल्य और बाजार मूल्य के अंतर की 1476 करोड़ रुपये की राशि किसानों के खातों में सीधे डीबीटी के माध्यम से अंतरित की गई है। वहीं सरसों के लिए 1.5 लाख किसान पंजीकृत हैं और योजना का संचालन जारी है।

श्रीअन्न और जैविक खेती को बढ़ावा

रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना के तहत 3,894 किसानों से 2,829.92 मीट्रिक टन कोदो-कुटकी का उपार्जन किया गया है। राज्य सरकार द्वारा 1000 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि किसानों को दी जाएगी। इसके साथ ही प्रदेश में 53 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

भंडारण, मंडी और मूल्य संवर्धन पर फोकस

किसानों की उपज सुरक्षित रखने के लिए 3.55 लाख मीट्रिक टन नई भंडारण क्षमता तैयार की गई है। वहीं 50 कृषि उपज मंडियों में ग्रेडिंग, सॉर्टिंग और पैकेजिंग संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।

डिजिटल कृषि व्यवस्था और यंत्रीकरण

ई-विकास प्रणाली और ई-किसान प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों को पारदर्शी तरीके से उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है। किसान रजिस्ट्री और खेतों की जियो-टैगिंग से योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंच रहा है। साथ ही कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए 2868 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है और 5629 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं।

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