एक ही खेत पर 4 फसल बीमा पॉलिसियां, 31 लाख से ज्यादा का क्लेम; बटाईदार को भी मिले 7.80 लाख, FIR के निर्देश
21 अगस्त 2026, जयपुर: एक ही खेत पर 4 फसल बीमा पॉलिसियां, 31 लाख से ज्यादा का क्लेम; बटाईदार को भी मिले 7.80 लाख, FIR के निर्देश – राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले की सूरतगढ़ तहसील के कालूसर गांव में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत फर्जी पॉलिसियां बनाकर बीमा क्लेम लेने का मामला विभागीय जांच में सही पाया गया है। जांच में सामने आया कि एक ही खसरा नंबर की जमीन पर कई पॉलिसियां जारी कर वास्तविक क्षेत्रफल से करीब 7 गुना अधिक क्षेत्र में फसल बीमा कराया गया। इस मामले में कुल 31,15,514 रुपये का बीमा क्लेम लिया गया।
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल ने मामले को संज्ञान में लेते हुए संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार), जिला परिषद श्रीगंगानगर को संबंधित CSC (ई-मित्र) संचालकों और दोषी व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की संबंधित धाराओं में FIR दर्ज करवाकर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। कृषि आयुक्त श्री नरेश कुमार गोयल के अनुसार किसान बनवारी लाल पुत्र सांवला, रिछपाल पुत्र गिरधारी, अन्य संबंधित किसान, CSC (ई-मित्र) संचालक विकास कुमार व बिजेश तथा बीमा कंपनी के विरुद्ध FIR दर्ज करवाने के निर्देश दिए गए हैं।
एक ही खसरे पर चार पॉलिसियां, 31.15 लाख का क्लेम
जांच में सामने आया कि बनवारी लाल ने अपने खसरा नंबर 281/91 पर ऋणी किसान के रूप में 10.37 हेक्टेयर में मूंगफली का फसल बीमा कराया। इसी खसरे की जमीन पर CSC (ई-मित्र) संचालक विकास कुमार से भी 10.37 हेक्टेयर और बिजेश से 10.3 हेक्टेयर में मूंगफली का फसल बीमा कराया गया। बनवारी लाल ने इन तीनों फसल बीमा पॉलिसियों पर कुल 23,35,319 रुपये का क्लेम प्राप्त किया।
इसी खसरे की जमीन बनवारी लाल ने रिछपाल पुत्र गिरधारी को बटाई/लीज पर दी थी। रिछपाल ने भी 10.37 हेक्टेयर में बटाईदार किसान के रूप में मूंगफली का फसल बीमा कराया और उसे 7,80,195 रुपये का क्लेम मिला। इस तरह इन चार पॉलिसियों से कुल 31,15,514 रुपये का क्लेम प्राप्त किया गया।
इसी खसरे के 10.37 हेक्टेयर क्षेत्र में इमीचंद पुत्र महावीर, प्रमिला पत्नी सुनील साहरण और ओमप्रकाश पुत्र राजाराम ने भी मूंगफली का फसल बीमा कराया था, लेकिन बीमा कंपनी ने इन पॉलिसियों को रिजेक्ट कर दिया था। विभागीय जांच में इस प्रकरण में बीमा कंपनी की संलिप्तता की पुष्टि हुई है।
वास्तविक क्षेत्रफल से 7 गुना अधिक में कराया बीमा
जांच में पाया गया कि एक ही खसरे पर अनेक पॉलिसियां जारी की गईं और खसरे के वास्तविक क्षेत्रफल से 7 गुना अधिक क्षेत्र में बीमा कराया गया। विभाग के अनुसार इस तरह का संगठित फर्जीवाड़ा CSC (ई-मित्र), बीमा कंपनी और संबंधित किसानों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है।
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ केवल वास्तविक किसानों तक पहुंचे, इसके लिए विभाग प्रतिबद्ध है। फर्जी पॉलिसी जारी करने में शामिल बीमा कंपनी, CSC (ई-मित्र), सहयोगी किसान, सक्रिय दलाल, बीमा कंपनी के कर्मचारियों और वित्तीय संस्थाओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत कठोर कार्रवाई के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
टोंक और जयपुर में भी दर्ज कराई गई FIR
कृषि विभाग ने मंगलवार को टोंक जिले की मालपुरा तहसील और जयपुर जिले की शाहपुरा तहसील में खरीफ 2026 के लिए फर्जी फसल बीमा कराने वाले ई-मित्र संचालक और दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई थी।
‘ऑपरेशन क्लीन फसल बीमा’ के तहत जांच
कृषि आयुक्त ने बताया कि इस बार कृषि बीमा पॉलिसी के साथ फार्मर आईडी अनिवार्य की गई है। इससे फर्जीवाड़ा करने वालों की पहचान करने में मदद मिलेगी। ऐसे सभी मामलों की गहन जांच की जाएगी, जिनमें किसानों ने कृषि लोन नहीं लिया है और फिर भी फसल बीमा कराया है। कृषि विभाग ने ऑपरेशन क्लीन फसल बीमा शुरू किया है और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई की जा रही है।
श्री गोयल ने CSC (ई-मित्र) संचालकों, किसानों, ब्रोकर, बीमा कर्मचारियों और वित्तीय संस्थाओं को चेतावनी दी है कि किसी भी तरह का फर्जीवाड़ा सामने आने पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फर्जी तरीके से बनाई गई फसल बीमा पॉलिसियों को तत्काल निरस्त कराने का अवसर दिया गया है। ऐसा नहीं करने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कृषि विभाग ने कहा है कि वह ईमानदार किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
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