राज्य कृषि समाचार (State News)

मानसून में भोजन की स्वच्छता एवं सुरक्षा: बीमारी से बचाव के 10 आसान उपाय

लेखक: निधि जोशी, विषय वस्तु विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केन्द्र, भा.कृ.अनु.प.- केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल

12 अगस्त 2026, भोपाल: मानसून में भोजन की स्वच्छता एवं सुरक्षा: बीमारी से बचाव के 10 आसान उपाय – मानसून का मौसम गर्मी से राहत और हरियाली लेकर आता है, लेकिन इसके साथ खाद्य एवं जल जनित रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है। बारिश के दौरान वातावरण में नमी अधिक होने के कारण बैक्टीरिया, वायरस एवं फफूंद की वृद्धि तेजी से हो सकती है। जल स्रोतों के दूषित होने, भोजन को खुले में रखने, अस्वच्छ हाथों से भोजन तैयार करने तथा खाद्य पदार्थों के अनुचित भंडारण से दस्त, उल्टी, फूड पॉइजनिंग, टाइफाइड और अन्य संक्रमणों का खतरा बढ़ सकता है।

विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरक्षा वाले व्यक्तियों के लिए भोजन की स्वच्छता और सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। अच्छी खाद्य स्वच्छता न केवल संक्रमण से बचाती है, बल्कि शरीर को पर्याप्त पोषण प्राप्त करने में भी सहायता करती है।

मानसून में खाद्य सुरक्षा क्यों महत्वपूर्ण है?

बारिश के दौरान नमी और तापमान की अनुकूल परिस्थितियां कई सूक्ष्मजीवों की वृद्धि के लिए उपयुक्त वातावरण बनाती हैं। दूषित पानी से धोए गए फल एवं सब्जियां, अधपका भोजन, खुले में रखा भोजन और लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखा पका हुआ भोजन स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। इसलिए भोजन की सुरक्षा के लिए “स्वच्छता, सुरक्षित पानी, सही तापमान और उचित भंडारण” के सिद्धांतों को अपनाना जरूरी है।

बीमारी से बचाव के 10 आसान उपाय

1. सुरक्षित पानी का ही करें उपयोग

पीने और खाना बनाने के लिए हमेशा सुरक्षित एवं स्वच्छ पानी का उपयोग करें। यदि पानी की गुणवत्ता संदिग्ध हो तो उसे अच्छी तरह उबालकर ठंडा करने के बाद उपयोग किया जा सकता है। पानी को हमेशा साफ और ढके हुए बर्तन में रखें।

ध्यान रखें: पानी निकालते समय गिलास या हाथ को सीधे पानी के अंदर न डालें।

2. हाथों की स्वच्छता को बनाएं आदत

खाना बनाने और खाने से पहले हाथों को साबुन एवं स्वच्छ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। शौचालय का उपयोग करने, कूड़ा उठाने, पशुओं को छूने तथा कच्चे खाद्य पदार्थों को संभालने के बाद हाथ धोना विशेष रूप से आवश्यक है। हाथ धोने की आदत बच्चों में भी विकसित करें, क्योंकि बच्चे अक्सर हाथों के माध्यम से कीटाणुओं के संपर्क में आते हैं।

3. फल एवं सब्जियों को अच्छी तरह धोएं

मानसून में फल और सब्जियों पर मिट्टी, गंदगी तथा सूक्ष्मजीवों का जमाव हो सकता है। इसलिए उन्हें उपयोग से पहले स्वच्छ बहते पानी में अच्छी तरह धोएं। पत्तेदार सब्जियों को अलग-अलग पत्तों में खोलकर धोना अधिक प्रभावी होता है। कटे हुए फल या लंबे समय से खुले में रखी सलाद का सेवन करने से बचें।

4. भोजन को हमेशा ढककर रखें

खुले भोजन पर मक्खियां, धूल और अन्य दूषित कण आसानी से पहुंच सकते हैं। मक्खियां रोगाणुओं को गंदगी से भोजन तक पहुंचा सकती हैं। इसलिए भोजन को साफ एवं ढके हुए बर्तनों में रखें। रसोई में खाद्य पदार्थों को खुला छोड़ने से बचें और भोजन तैयार करने वाले स्थान को नियमित रूप से साफ करें।

5. ताजा भोजन को दें प्राथमिकता

मानसून में पका हुआ भोजन लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखने से उसमें सूक्ष्मजीवों की वृद्धि हो सकती है। इसलिए जितना संभव हो ताजा और गर्म भोजन का सेवन करें। बचे हुए भोजन को सुरक्षित तरीके से ठंडा करके रेफ्रिजरेटर में रखें और सेवन से पहले अच्छी तरह गर्म करें। भोजन को बार-बार गर्म और ठंडा करने से भी बचना चाहिए।

6. दूध एवं जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों में सावधानी

दूध और दूध से बने खाद्य पदार्थों में सूक्ष्मजीवों की वृद्धि तेजी से हो सकती है। दूध को उचित रूप से उबालकर उपयोग करें तथा दूध, दही, पनीर आदि को लंबे समय तक कमरे के तापमान पर न रखें। ऐसे खाद्य पदार्थों को आवश्यकता अनुसार रेफ्रिजरेटर में सुरक्षित रखें और उनकी ताजगी एवं गुणवत्ता की जांच करते रहें।

7. कच्चे और पके भोजन को अलग रखें

कच्चे खाद्य पदार्थों से सूक्ष्मजीव पके भोजन तक पहुंच सकते हैं। इसे क्रॉस-कंटैमिनेशन (परस्पर संदूषण) कहा जाता है। कच्ची सब्जियों, मांस, मछली या अंडे के लिए उपयोग किए गए चाकू, कटिंग बोर्ड और बर्तनों को पके भोजन के लिए इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह धोएं। कच्चे और पके खाद्य पदार्थों को अलग-अलग रखें।

8. खुले और अस्वच्छ स्ट्रीट फूड से बचें

मानसून में खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों में दूषित पानी, धूल और मक्खियों के संपर्क का खतरा बढ़ जाता है। विशेष रूप से खुले में रखी चटनी, सलाद, कटे फल और लंबे समय से रखे खाद्य पदार्थों से सावधान रहें। यदि बाहर भोजन करना हो तो ऐसे स्थान का चयन करें जहां स्वच्छ पानी, साफ बर्तन और अच्छी खाद्य स्वच्छता का ध्यान रखा जाता हो। ताजा एवं अच्छी तरह पका हुआ भोजन प्राथमिकता से लें।

9. अनाज और सूखे खाद्य पदार्थों का सही भंडारण करें

मानसून में वातावरण में नमी बढ़ने से अनाज, दाल, आटा, मसाले और अन्य सूखे खाद्य पदार्थों में नमी प्रवेश कर सकती है, जिससे फफूंद विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है। इन खाद्य पदार्थों को सूखे, साफ, हवादार और नमी रहित स्थान पर एयरटाइट या अच्छी तरह बंद डिब्बों में रखें। भंडारित अनाज को समय-समय पर जांचें। फफूंद लगे या संदिग्ध खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।

10. भोजन की गुणवत्ता में बदलाव को पहचानें

भोजन में असामान्य गंध, रंग, स्वाद, बनावट या फफूंद दिखाई देने पर उसे खाने से बचें। केवल खराब हिस्से को हटाकर बाकी भोजन का उपयोग करना हमेशा सुरक्षित नहीं होता, क्योंकि कुछ सूक्ष्मजीवों या उनके विषैले पदार्थों का फैलाव दिखाई देने वाले हिस्से से आगे भी हो सकता है। संदिग्ध भोजन को फेंक देना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।

ग्रामीण परिवारों के लिए विशेष सावधानियां

ग्रामीण क्षेत्रों में मानसून के दौरान खाद्य सुरक्षा के लिए कुछ अतिरिक्त सावधानियां उपयोगी हैं। पीने के पानी के स्रोत को पशुओं के आवागमन और गंदे पानी से सुरक्षित रखें। कुएं, टंकी या अन्य जल स्रोतों को ढककर रखें और उनकी नियमित सफाई एवं उचित रखरखाव करें।

घर में तैयार अचार, पापड़, बड़ी, मसाले, अनाज और अन्य खाद्य पदार्थों को अच्छी तरह सुखाकर एवं नमी रहित स्थान पर भंडारित करें। स्वयं सहायता समूहों या ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार किए जाने वाले मूल्य-वर्धित खाद्य उत्पादों में भी स्वच्छ कच्चे माल, साफ उपकरण, सुरक्षित पानी, उचित पैकेजिंग और स्वच्छ भंडारण का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

बच्चों और परिवार के लिए पोषण भी जरूरी

  • मानसून में संक्रमण से बचाव के साथ-साथ संतुलित आहार लेना भी महत्वपूर्ण है। भोजन में दालें, अनाज, दूध एवं दुग्ध उत्पाद, अंडा/अन्य प्रोटीन स्रोत, मौसमी फल एवं सब्जियां, मेवे और बीज शामिल किए जा सकते हैं।
  • बच्चों को ताजा एवं घर पर तैयार पौष्टिक भोजन दें। अत्यधिक तले हुए, खुले में रखे और पोषण की दृष्टि से कम उपयोगी खाद्य पदार्थों के स्थान पर घर के बने पौष्टिक नाश्ते को प्राथमिकता दें।

यह ध्यान रखना चाहिए कि कोई एक खाद्य पदार्थ संक्रमण से पूरी तरह सुरक्षा नहीं देता। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, स्वच्छता और सुरक्षित भोजन की आदतें मिलकर अच्छे स्वास्थ्य में योगदान करती हैं।

“5 स्वर्णिम नियम” रखें याद

मानसून में भोजन की सुरक्षा को आसान बनाने के लिए इन पांच बातों को हमेशा याद रखें—

  1. साफ रखें हाथ, बर्तन और रसोई साफ रखें।
  2. सुरक्षित पानी का उपयोग करें पीने और खाना बनाने के लिए स्वच्छ पानी लें।
  3. कच्चे और पके भोजन को अलग रखें।
  4. भोजन को अच्छी तरह पकाएं और उचित तापमान पर रखें।
  5. संदिग्ध या खराब भोजन का सेवन न करें।

निष्कर्ष

मानसून में स्वस्थ रहना केवल दवाओं पर निर्भर नहीं करता, बल्कि हमारी दैनिक आदतों पर भी निर्भर करता है। भोजन तैयार करने से लेकर उसके भंडारण और सेवन तक प्रत्येक चरण में स्वच्छता और सुरक्षा का ध्यान रखना आवश्यक है।

स्वच्छ हाथ, सुरक्षित पानी, ताजा भोजन, साफ रसोई और उचित भंडारण—ये पांच आदतें मानसून में खाद्य एवं जल जनित बीमारियों के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

इस मानसून संकल्प लें—

“सुरक्षित भोजन अपनाएं, स्वच्छता बढ़ाएं और स्वस्थ परिवार बनाएं।”

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