अब खेती बनेगी ज्यादा मुनाफेदार: CM मोहन यादव ने ‘बलराम कृषि महोत्सव’ के जरिए शुरू किया प्रदेशव्यापी अभियान
16 जुलाई 2026, भोपाल: अब खेती बनेगी ज्यादा मुनाफेदार: CM मोहन यादव ने ‘बलराम कृषि महोत्सव’ के जरिए शुरू किया प्रदेशव्यापी अभियान – मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाने की शुरुआत करते हुए किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक तकनीक को खेतों तक पहुंचाने और कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में आयोजित राज्य स्तरीय बलराम कृषि महोत्सव का शुभारंभ करते हुए प्रदेशव्यापी अभियान की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि किसानों को आधुनिक खेती, कृषि प्रसंस्करण, विपणन, नई तकनीकों और रोजगार के अवसरों से जोड़ने का व्यापक अभियान है। इसके तहत प्रदेश के सभी 55 जिलों में 13 नवंबर तक कृषि आधारित विभिन्न गतिविधियों और कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों, महिलाओं, युवाओं और गरीबों के समग्र विकास के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इसी उद्देश्य से कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता, एमएसएमई, ऊर्जा, राजस्व सहित 16 विभागों को एक मंच पर लाकर किसानों की आय बढ़ाने का रोडमैप तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष प्रदेश में “उद्योग एवं रोजगार वर्ष” मनाया गया था और अब वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में समर्पित कर कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाने का लक्ष्य रखा गया है।
सिंचाई, बिजली और सड़क से मजबूत होगी खेती
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान की समृद्धि का आधार पानी, बिजली और सड़क है। उन्होंने बताया कि सरकार किसानों को रात के बजाय दिन में कृषि बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से काम कर रही है, जिससे खेती करना अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक होगा। उन्होंने कहा कि राज्य में वर्ष 2003 तक केवल 7.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा थी, जिसे बढ़ाकर अब 65 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाया जा चुका है और आने वाले वर्षों में इसे और बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष गेहूं की खरीदी 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की गई, जबकि सोयाबीन उत्पादकों को भावांतर योजना का लाभ दिया गया। इसके साथ ही शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण की व्यवस्था को और सरल बनाया गया है, जिससे किसानों को हर छह माह में ऋण नवीनीकरण कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
खेत से बाजार तक विकसित होगी कृषि अर्थव्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार खेती को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि “खेत से कारखाने और कारखाने से बाजार” तक संपूर्ण कृषि अर्थव्यवस्था विकसित करने पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में तेजी से फूड प्रोसेसिंग उद्योग स्थापित किए जा रहे हैं। हाल ही में उज्जैन में 1250 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित आलू प्रसंस्करण इकाई 32 जिलों से आलू खरीदेगी, जिससे किसानों को स्थायी बाजार मिलेगा। इसके अलावा इंदौर, आगर, उज्जैन सहित कई जिलों में कृषि आधारित उद्योगों का विस्तार किया जा रहा है।
नदी जोड़ो परियोजनाओं से मिलेगा किसानों को लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना प्रदेश के जल इतिहास को बदल देंगी। लगभग एक लाख करोड़ रुपये की लागत वाली इन परियोजनाओं से श्योपुर, मुरैना, भिंड, ग्वालियर, राजगढ़, शाजापुर, देवास, उज्जैन, नीमच और मंदसौर सहित 13 जिलों को सिंचाई और पेयजल का लाभ मिलेगा। इससे मालवा और पश्चिमी मध्यप्रदेश के किसानों को भी बड़ी राहत मिलेगी।
डेयरी, परिवहन और कपास किसानों के लिए बड़ी घोषणाएं
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर परिवहन सुविधा के लिए मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस योजना शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पशुपालन किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है, इसलिए 40 लाख रुपये तक की डेयरी इकाई स्थापित करने पर सरकार 10 लाख रुपये तक का अनुदान देगी। इसके साथ ही गौशाला संचालकों को प्रति गौवंश 40 रुपये प्रतिदिन की सहायता जारी रहेगी।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साथ समझौते के बाद किसानों को दूध के दाम में 8 से 10 रुपये प्रति लीटर तक अतिरिक्त आय मिल रही है। वहीं धार जिले में प्रधानमंत्री मित्र टेक्सटाइल पार्क की स्थापना से करीब 6 लाख कपास उत्पादक किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा और कपास से लेकर रेडीमेड गारमेंट तक का औद्योगिक नेटवर्क विकसित होगा।
किसानों के लिए कई बड़े ऐलान
बलराम कृषि महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। उन्होंने इंदौर में आधुनिक कृषि उपज मंडी विकसित करने, प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, किसानों को दिन में कृषि बिजली उपलब्ध कराने, डेयरी इकाइयों पर 10 लाख रुपये तक का अनुदान देने, फूड प्रोसेसिंग और कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार तथा फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले नीलगाय एवं अन्य वन्य पशुओं के प्रबंधन के लिए विशेष योजना लागू करने की घोषणा की।
किसानों को मिली आधुनिक तकनीकों की जानकारी
महोत्सव में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता, ऊर्जा, एमएसएमई और अन्य विभागों की प्रदर्शनी लगाई गई। किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती, ड्रोन तकनीक, कृषि यंत्रीकरण, फूड प्रोसेसिंग, कृषि ऋण, बीमा, विपणन, मूल्य संवर्धन और विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। किसानों को विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर नई तकनीकों को समझने और योजनाओं का लाभ लेने का अवसर भी मिला। कार्यक्रम में उत्कृष्ट किसानों, किसानों के परिवारों के विद्यार्थियों तथा खेती-किसानी को बढ़ावा देने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को सम्मानित भी किया गया।
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