ई-विकास पोर्टल से किसानों को पात्रता अनुसार मिलेगा उर्वरक
अधिक उर्वरक लेने के लिए देना होगा कारण और प्रमाण
08 मई 2026, भोपाल: ई-विकास पोर्टल से किसानों को पात्रता अनुसार मिलेगा उर्वरक – भोपाल के प्रगतिशील किसान श्री सेवाराम को अब उनकी जमीन के रकबे और फसल के आधार पर पात्रता अनुसार एक बार में ही खाद उपलब्ध हो जाएगी। यदि उन्हें निर्धारित मात्रा से अधिक खाद की आवश्यकता होगी, तो उन्हें यह प्रमाणित करना होगा कि अतिरिक्त खाद किस उद्देश्य से चाहिए। यदि उनका कारण संतोषजनक पाया जाता है, तो उन्हें अतिरिक्त खाद प्रदान कर दी जाएगी, अन्यथा टोकन जारी नहीं होगा।
मध्य प्रदेश कृषि विभाग ने ई-विकास पोर्टल के माध्यम से यह नई व्यवस्था लागू की है, जिसका उद्देश्य सभी किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना तथा कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक लगाना है।
प्रदेश में हर सीजन के दौरान खाद वितरण में होने वाली अफरा-तफरी और लंबी कतारों से किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने यह डिजिटल पहल पूरे प्रदेश में लागू कर दी है। अब किसान ई-विकास पोर्टल के जरिए घर बैठे टोकन बुक कर अपनी आवश्यकता के अनुसार खाद प्राप्त कर सकेंगे।
यह व्यवस्था पहले जबलपुर, शाजापुर और विदिशा जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई थी। सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद इसे 1 अप्रैल से पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया। नई प्रणाली के तहत किसानों को उनकी भूमि के क्षेत्रफल और बोई गई फसल के आधार पर ही उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा।
तीन दिन तक वैध रहेगा टोकन
खाद प्राप्त करने के लिए ई-विकास पोर्टल के माध्यम से टोकन जनरेट किया जाएगा, जो तीन दिन तक वैध रहेगा। यदि किसान सहकारी समिति का सदस्य है, तो उसे संबंधित दुकान का टोकन मिलेगा। सदस्य नहीं होने की स्थिति में उसे अन्य अधिकृत दुकानों की जानकारी दी जाएगी। किसानों को उनकी पात्रता के अनुसार ही खाद उपलब्ध कराई जाएगी।
खाद वितरण की सीमा
यदि किसी किसान की पात्रता 50 बोरी से अधिक भी बनती है, तब भी उसे एक माह में अधिकतम 50 बोरी खाद ही प्रदान की जाएगी। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी तरीके से लागू की गई है।
बुजुर्ग, दिव्यांग अथवा बटाईदार किसान किसी अधिकृत व्यक्ति को खाद प्राप्त करने के लिए नियुक्त कर सकते हैं।
ई-टोकन प्रणाली कैसे करेगी काम
किसान ई-विकास पोर्टल
पर सुबह 7 बजे से शाम 8 बजे के बीच एग्रीस्टेक आईडी (फार्मर आईडी) में दर्ज भूमि और फसल के आधार पर ऑनलाइन टोकन बुक कर खाद खरीद सकेंगे।
किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक का चयन स्वयं करेंगे। खाद वितरण होते ही संबंधित विक्रय केंद्र के स्टॉक से उतनी मात्रा ऑनलाइन कम हो जाएगी, जिससे मांग और आपूर्ति की स्थिति पर निरंतर निगरानी बनी रहेगी।
पंजीयन प्रक्रिया मोबाइल पर ओटीपी के माध्यम से पूरी होगी। यदि किसान 72 घंटे की निर्धारित समय-सीमा में खाद प्राप्त नहीं करता है, तो उसका टोकन स्वतः निरस्त हो जाएगा और उसे दोबारा प्रक्रिया करनी होगी।
यदि किसी किसान की भूमि पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं हो रही है, तो वह एसडीएम कार्यालय में आवेदन कर सकता है, जहां से टोकन जारी किया जाएगा।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि जिन किसानों के पास अभी तक फार्मर आईडी नहीं है, वे जल्द से जल्द संबंधित पटवारी या सीएससी सेवा केंद्र से संपर्क कर अपनी फार्मर आईडी बनवा लें।
सभी कृषक एग्री-स्टैक पोर्टल के माध्यम से अपनी फार्मर आईडी अवश्य बनवाएं।
ई-विकास प्रणाली में ऐसे मामलों के लिए विशेष सुविधा विकसित की गई है, जहां किसान की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन उसकी भूमि का नामांतरण उत्तराधिकारियों के नाम पर अभी लंबित है। ऐसी स्थिति में पात्र परिवारजन निर्धारित प्रक्रिया के तहत उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे। इसके अलावा शारीरिक रूप से अक्षम एवं वृद्ध किसानों के लिए भी उर्वरक प्राप्त करने की विशेष व्यवस्था की गई है।
सिकमी (ठेकेदार/बटाईदार) किसान, जो स्वयं भूमि-स्वामी नहीं हैं, वे भूमि-स्वामी की अनुमति प्राप्त कर एग्री-स्टैक पोर्टल पर अधिकृत प्रतिनिधि किसान के रूप में पंजीयन कर ई-विकास प्रणाली के माध्यम से उर्वरक बुक करा सकते हैं।
वन पट्टाधारी किसान अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) द्वारा सत्यापन के उपरांत ई-विकास पोर्टल के माध्यम से उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे।
संयुक्त खाताधारी कृषकों के मामलों में, जहां एक या अधिक सदस्य किसी अन्य शहर अथवा विदेश में निवास करते हैं और आधार सत्यापन हेतु ओटीपी प्राप्त करना संभव नहीं हो पाता, वहां ई-विकास पोर्टल पर संयुक्त खाताधारकों में से किसी एक किसान को नामांकित करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
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