राज्य कृषि समाचार (State News)

मोरडोंगरी खरीदी केंद्र पर अव्यवस्थाओं से अन्नदाता परेशान

कृषक जगत की पहल रंग लाई, चने की खरीदी शुरुआत के साथ  हुआ चने का भुगतान

16 मई 2026, (उमेश खोड़े, कृषक जगत , पांढुर्ना)मोरडोंगरी खरीदी केंद्र पर अव्यवस्थाओं से अन्नदाता परेशान – किसानों से समर्थन मूल्य पर उपार्जन केंद्रों पर गेहूं / चना खरीदी की व्यवस्थाओं का सरकार भले ही कितना भी दावा करे , लेकिन हकीक़त में यह सही नहीं पाई जाती है।  ऐसा ही एक मामला पांढुर्ना जिले के मोरडोंगरी खरीदी केंद्र का सामने आया है , जहां  तौल  कांटों एवं श्रमिकों की कमी के कारण छोटे किसानों की उपज  की तुलाई नहीं हो पा रही है। किसानों की समस्या की जानकारी लगते ही  कृषक जगत  ने पहल की और प्रशासन के सहयोग से  मोरडोंगरी खरीदी केंद्र पर न केवल चने की तुलाई शुरू हुई , बल्कि पहले बेचे गए  चने का भुगतान भी हो गया।

इस संबंध में  ग्राम गोतिया के श्री अतुल  कैलाश पराडकर ने कहा कि  मेरा गेहूं अभी तक नहीं तुला है।  यहाँ  श्रमिक और  तौल कांटों की कमी है। एक ही सरकारी तौल कांटा चल रहा है। दूसरे तौल कांटे के लिए बड़े किसान स्वयं श्रमिक लेकर आए हैं ।  मरकवाड़ा के श्री वासुदेव देशमुख ने कहा कि खरीदी केंद्र पर छोटे किसान परेशान हो रहे हैं। मैं  6 मई को 20  क्विंटल गेहूं यहां बेचने के लिए लाया था , जो आज 15 तारीख को तौला गया।  मेरे जैसे  कई और छोटे किसान हैं ,जो  लगभग  एक सप्ताह से परेशान हो रहे हैं। 300 – 400  क्विंटल वाले बड़े किसान अपने हम्माल लाकर  गेहूं की तुलाई कर रहे हैं। । तुलाई में बहुत धांधली चल रही है। धावड़ीखापा के श्री विनय डिगरसे ने बताया कि गेहूं तुलाई के लिए अपने गांव से श्रमिक लाए  हैं।  उनके आने -जाने के भाड़े के अलावा तुलाई और डंप  करने के 10  रु प्रति बोरी  दे रहे हैं। किसानों का कहना है कि गेहूं की तुलाई नहीं होने से  किसान हज़ार -बारह सौ  रु रोज़ का  ट्रैक्टर का  भाड़ा बेवजह दे रहे हैं , जिससे उनका बहुत घाटा हो रहा है।  बता दें कि  मुख्यमंत्री के निर्देश हैं कि हर उपार्जन केंद्र पर  6 तौल कांटे होना चाहिए।

ग्राम नरसला तहसील नांदनवाड़ी  के श्री शेषराव गोहिते ने कृषक जगत को बताया कि 12 मई तक की स्लॉट बुकिंग  होने से  इस  केंद्र पर चना बेचने आया था , लेकिन तीन दिन  तक चना नहीं खरीदा गया । चना खरीदी नहीं होने के  बारे में पूछने पर  खरीदी केंद्र का रवैया टालमटोल वाला रहा। श्री गोहिते ने कहा कि जिला आपूर्ति अधिकारी  श्रीमती रीता  मर्स्कोले से बात की तो उन्होंने पल्ला  झाड़ते हुए कहा कि मेरे पास गेहूं की जिम्मेदारी है, आप किसी और से बात करो। जिला आपूर्ति अधिकारी को लेकर अन्य  किसानों की नाराजगी भी  साफ दिखी।

किसानों के हित में यहां इस बात का उल्लेख प्रासंगिक है कि गत अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह में जबलपुर से अपर कलेक्टर साधना परतेती  इसी मोरडोंगरी केंद्र पर निरीक्षण के लिए आई  थीं  , तब कृषक जगत ने सर्वे में सेटेलाइट की परेशानी एवं खाली बारदाने के विषय में सवाल किया था , जिस पर उन्होंने स्पष्ट कहा था कि यदि बारदाने का वजन 600 ग्राम है तो  एक बोरे में अधिकतम 50 किलो 700 ग्राम गेहूं ही भरना है। जबकि वस्तुस्थिति  यह है कि तुलाई के दौरान एक किलो गेहूं  तौला जाता है। इस तरह  प्रति बोरी 300 – 400  ग्राम गेहूं अधिक तौल कर किसानों का शोषण किया जाता है।

प्रशासनिक सहयोग –  चना खरीदी शुरू नहीं होने  पर कृषक जगत द्वारा इस मामले से अपर कलेक्टर श्री नीलमणि अग्निहोत्री को अवगत कराया गया । श्री अग्निहोत्री के अलावा  नोडल अधिकारी मेघा शर्मा  एवं उप संचालक कृषि श्री जितेंद्र सिंह के प्रशासनिक सहयोग से अंततः  किसानों के चना  उपज की खरीदी शुरू हो सकी ,साथ ही पूर्व में चना बेचने वाले किसानों को चने का भुगतान भी प्राप्त हो गया। इसके लिए किसानों ने कृषक जगत का आभार व्यक्त किया।

जिला नागरिक आपूर्ति अधिकारी  श्रीमती रीता  मर्स्कोले ने कृषक जगत को बताया कि सिर्फ एक ही बड़ा किसान गेहूं तुलाई के लिए स्वयं अपने श्रमिक  लेकर  आया था। सिर्फ इस केंद्र पर ही हम्माल की समस्या आ रही है। छोटे किसानों के गेहूं भी तौले जा रहे हैं।लेकिन इसमें थोड़ा समय लग रहा है।  मैं स्वयं इसकी निगरानी कर रही हूं। किसानों की गेहूं तौल पर्ची में आगे की तारीख बढ़ाई जा रही है। हर एक किसान का  गेहूं खरीदा जाएगा।मोरडोंगरी उपार्जन केंद्र के प्रबंधक श्री विजय धोटे ने जहां तौल  कांटों   एवं श्रमिकों की कमी की बात स्वीकारी , वहीं ग्रेडर श्री सूरज ठाकरे ने कहा कि सर्वर डाउन होने की समस्या के कारण  किसानों को चने का भुगतान नहीं हो पा रहा था ।

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