खरीफ की प्याज फसल में किसानों की रुचि नहीं

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  • (विशेष प्रतिनिधि)

7 जुलाई 2022, इंदौर । खरीफ की प्याज फसल में किसानों की रुचि नहीं – इस साल खरीफ की प्याज फसल में किसानों की रूचि कम दिखाई दे रही है। किसानों का कहना है कि बारिश के प्याज में रोगों की आशंका, उत्पादन और भाव कम मिलने से नुकसान अधिक होता है, इसलिए रबी में प्याज ज़्यादा लगाते हैं। दूसरी तरफ प्याज के प्रमुख उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में भी खरीफ प्याज का भविष्य बारिश पर निर्भर बताया जा रहा है। प्याज का स्टॉक भी बहुत है। यदि बारिश अधिक हुई तो फसल बिगडऩे के अंदेशे से प्याज के दाम बढऩे की संभावना है। यह बात कृषक जगत द्वारा प्याज उत्पादक किसानों और अन्य हितधारकों से की गई चर्चा में सामने आई।
Shekhar-Patidarरेगवां (कसरावद) के प्याज उत्पादक किसान श्री दिलीप पटेल का कहना था कि खरीफ के प्याज में उत्पादन कम और लागत खर्च ज़्यादा आता है,भाव ठीक नहीं मिलने पर नुकसान होता है। अभी सोयाबीन लगाएंगे। अक्टूबर-नवंबर में सोयाबीन काटने के बाद प्याज लगाएंगे। गत वर्ष 4 बीघे में प्याज लगाया था। 30 क्विंटल/बीघा का उत्पादन मिला था। वहीं पथोरा के श्री सुनील कल्याण पटेल ने कहा कि खरीफ में प्याज लगाने का विचार है। नर्सरी तैयार करेंगे। अभी 20 एकड़ में मक्का,8 एकड़ में कपास और 7 एकड़ में गन्ना लगाया है। गत वर्ष रबी का प्याज 4 बीघे में लगाया था। भाव नहीं मिलने से एक हजार कट्टा प्याज घर पर स्वनिर्मित कोल्ड स्टोरेज में रखा है। दूसरी ओर पटलावद (धरमपुरी) के श्री दीपक वर्मा भी सोयाबीन काटने के बाद प्याज लगाएंगे। सस्ता होने से 15 किलो प्याज बीज अभी से खरीद लिया है। पिछले साल इन्हें रबी प्याज का उत्पादन 50 क्विंटल/बीघा से अधिक मिला। दुर्गापुर (कसरावद) के श्री शेखर पाटीदार ने कहा कि खरीफ के प्याज में किसान रूचि नहीं ले रहे हैं। दो-तीन साल से नुकसान हो रहा है। सरकार भी आयात-निर्यात में उलझा देती है। गत वर्ष रबी में 8 एकड़ में 9 टन/एकड़ का उत्पादन मिला था। 6-7 रुपए किलो का भाव मिल रहा है, इसलिए स्टॉक कर लिया है। बिठेर (कसरावद) के शुभम पाटीदार ने कहा कि रबी में प्याज लगाएंगे। खरीफ के प्याज में जलेबी रोग लगने से बहुत नुकसान होता है। थ्रिप्स का हमला पौधे में नीचे से होता है, फसल खराब होने लगती है। इसलिए अधिकांश किसान खरीफ में प्याज नहीं लगाते। गत वर्ष 4 एकड़ में अच्छा उत्पादन भी हुआ और भाव भी अच्छा मिला था। चोली (मंडलेश्वर) के श्री प्रवीण ठाकुर ने इस वर्ष प्याज लगाया है। पिछले दो साल से प्याज नहीं लगाया। 2020 में 4 एकड़ में 150 क्विंटल उत्पादन हुआ था।

Bharat--Dighole

श्री भारत दिघोले, संस्थापक अध्यक्ष, महाराष्ट्र, राज्य प्याज उत्पादक किसान संगठन,नासिक ने कृषक जगत को बताया कि गत वर्ष रबी में महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक किसानों को दिसंबर और फिर मार्च की बारिश से प्याज फसल प्रभावित हुई। उत्पादन के अनुमान ध्वस्त हो गए। भारी नुकसान हुआ। जहां पहले 15-16 टन/एकड़ का उत्पादन होता था वह 8-10 टन/एकड़ पर आ गया। सही दाम नहीं मिलने से किसानों को दोहरा नुकसान हुआ। 12-13 रु किलो के औसत दाम गिरकर 8-9 रु पर आ गए। न्यूनतम भाव 5-7 तक पहुँच गए। उत्पादन घटने से लागत मूल्य 20-22 रु/किलो बैठा। स्टोरेज में बहुत प्याज है, लेकिन हर किसान संग्रह नहीं कर सकता। किसानों को लाभ हो, इसलिए हमारा संगठन किसानों से हमेशा आह्वान करता है कि प्याज को बेचने का तरीका बदलो और थोड़ा-थोड़ा बेचो। महाराष्ट्र में इस साल अभी तक बारिश की स्थिति अच्छी नहीं है, इसलिए किसान प्याज की नर्सरी भी नहीं लगा रहे हैं। यदि 15 जुलाई तक अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ के प्याज का रकबा घटेगा।

श्री अजीत शाह, अध्यक्ष बागवानी उत्पाद निर्यात संघ, मुंबई ने कृषक जगत को बताया कि प्याज निर्यात पर कोई प्रतिबंध नहीं है। भारत से मुख्यत: बांग्लादेश,श्रीलंका और खाड़ी देशों को प्याज का निर्यात किया जाता है। लेकिन श्रीलंका में मुद्रा संकट और खाड़ी देशों से मांग कम होने से निर्यात कम हो रहा है। बांग्लादेश अब टर्की और इजिप्ट से प्याज मंगाने के अलावा खुद भी प्याज उत्पादित कर रहा है। प्याज के दाम मौसम पर निर्भर है, यदि ज़्यादा बारिश हुई तो फसल प्रभावित होने से दाम बढ़ेंगे। यदि दक्षिण के प्याज को ज़्यादा नुकसान नहीं हुआ तो प्याज के दाम नहीं बढ़ेंगे। वैसे भी प्याज का स्टॉक बहुत ज़्यादा है। सब कुछ तत्कालीन परिस्थितियों पर निर्भर रहेगा।

Mahesh-Patwari

बीज व्यवसायी श्री महेश पटवारी, इंदौर ने कहा कि किसानों को प्याज का दाम नहीं मिलने से लागत नहीं निकल रही है। इसलिए इस वर्ष खरीफ में प्याज का रकबा गत वर्ष से 15 से 20 प्रतिशत रह गया है। जबकि पिछले साल खरीफ में ज़्यादा प्याज लगा था। खरीफ में बीज किस्म एन-53 और रबी में फरसुंगी किस्म लगाई जाती है। एक एकड़ में औसत 4-5 टन प्याज उत्पादित होता है।

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