राज्य कृषि समाचार (State News)

किसानों को अधिक उत्पादन देने वाली सोयाबीन किस्मों की दरकार

13 सितम्बर 2024, इंदौर: किसानों को अधिक उत्पादन देने वाली सोयाबीन किस्मों की दरकार – मध्यप्रदेश के किसानों द्वारा सोयाबीन के दाम 6 हज़ार रु /क्विंटल करने की मांग को लेकर किए जा रहे प्रदेशव्यापी आंदोलन के चलते हाल ही में केंद्र सरकार ने मप्र के किसानों से सोयाबीन की खरीदी समर्थन मूल्य पर करने को मंजूरी दे दी है। यह समस्या का एक तात्कालिक वैकल्पिक समाधान है, लेकिन जब तक किसानों को अधिक उत्पादन देने वाली सोयाबीन किस्में उपलब्ध नहीं कराई जाएंगी और अधिक उत्पादन नहीं होगा ,तब तक किसान लाभ की स्थिति में नहीं आएंगे।

उत्पादन घटा, लागत बढ़ी – उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में बड़े रकबे में सोयाबीन की खेती की जाती है, जिसके कारण मप्र को सोया उत्पादक राज्य माना जाता है , लेकिन बड़े अफसोस की बात है कि मध्य प्रदेश के किसान गत एक दशक से सोयाबीन का औसत उत्पादन 5 -6  क्विंटल /एकड़ से अधिक नहीं ले पा रहे हैं। एक ओर जहां उत्पादन नहीं बढ़ रहा है ,वहीं दूसरी ओर लागत लगातार बढ़ती जा रही है। एक दशक पहले प्रति एकड़ जो लागत 10 -12 हज़ार रु थी , वह अब बढ़कर 16 -20 हज़ार हो गई है। हालांकि इस एक दशक के दौरान समर्थन मूल्य में भी वृद्धि होती रही, लेकिन उस तत्कालीन निर्धारित कीमत पर किसानों से सोयाबीन नहीं खरीदने से उन्हें नुकसान होता रहा। धीरे -धीरे किसानों का यह आक्रोश अब जब एक व्यापक आंदोलन में तब्दील हो गया तो, सरकार ने आनन -फानन में सोयाबीन को समर्थन मूल्य 4892 रु /क्विंटल पर खरीदी को मंजूरी दे दी। 

अधिक उपज देने वाली सोयाबीन किस्में उपलब्ध कराएं – इसे मामले को ठंडा करने का एक प्रयास माना जा सकता है, लेकिन इससे  किसान संतुष्ट नहीं हैं। जब तक किसानों को अधिक उपज देने वाली सोयाबीन किस्में उपलब्ध नहीं कराई जाएंगी और अधिक उत्पादन नहीं होगा, तब तक लागत और लाभ के बीच की यह दूरी कम नहीं होगी। जब अधिक उत्पादन होगा तो किसान लागत खर्च को वहन करने में सक्षम होंगे। अभी तो किसानों की लागत ही नहीं निकल पा रही है और सोयाबीन की खेती घाटे का सौदा साबित होती जा रही है। ऐसे में उनकी आय दोगुनी होना  एक  दिवास्वप्न जैसा लगता है।

जून में घोषित सोयाबीन समर्थन मूल्य 4892 रु / क्विंटल – बता दें कि 2014 -15 में जहाँ सोयाबीन का समर्थन मूल्य 2560 रु /क्विंटल था, जो एक दशक में धीरे -धीरे बढ़ता गया, लेकिन उसी अनुपात में किसानों की लागत भी बढ़ती गई। वर्ष 2023 -24 में सोयाबीन का समर्थन मूल्य 4600 रु /क्विंटल था।  जिसे इस वर्ष 21  जून को  हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में 292 रु की वृद्धि करते हुए इसे 4892 रु / क्विंटल निर्धारित किया गया। लेकिन इस मूल्य पर प्रायः किसानों से सोयाबीन की खरीदी नहीं की गई, जो वर्तमान आंदोलन का कारण बना। हालांकि वैश्विक बाजार में फिलहाल सोयाबीन के दाम इससे नीचे हैं , ऐसे  में इससे अधिक दाम किसानों को देने पर सरकार को नुकसान होगा। ऐसी दशा में  सरकार और किसानों के लिए कोई मध्य मार्ग खोजना होगा ,जो दोनों पक्षों के लिए हितकारी हो।

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