राज्य कृषि समाचार (State News)

पांढुर्ना में किसानों के साथ फिर धोखाधड़ी

पुरानी दर के एसएसपी खाद को नई दर पर बेचा

पिछली घटना से नहीं सीखा सबक

(विशेष संवाददाता)

17 अगस्त 2026, भोपाल/पांढुर्ना (कृषक जगत)पांढुर्ना में किसानों के साथ फिर धोखाधड़ी – पांढुर्ना जिले की तासीर ही कुछ ऐसी है कि यहां एक मामले की आंच ठंडी भी नहीं पड़ती कि दूसरा मामला सामने आ जाता है। ताजा मामला पुरानी दर के एसएसपी खाद को नई दर पर बेचने का सामने आया है। गत दिनों वृहत्ताकार कृषि साख समिति, पांढुर्ना द्वारा किसानों को त्र्यम्बकेश्वर एग्रो इंडस्ट्रीज प्रा. लि., मेघनगर का सिंगल सुपर फास्फेट जिंक दानेदार खाद, जिसकी बोरी पर एमआरपी 530 रुपए अंकित थी, उसे समिति द्वारा 630 रुपए की दर से न केवल किसानों को बेचा गया, बल्कि बाकायदा रसीद भी दी गई।
जागरूक किसानों ने जब पुरानी दर के खाद को पुरानी दर पर ही बेचने के मार्कफेड के आदेश का हवाला देते हुए मामला उठाया, तब सहकारी समिति और कृषि विभाग के अधिकारी सक्रिय हुए। जानकारी जुटाने पर पता चला कि संबंधित कंपनी ने खाद पुरानी दर की भेजी, लेकिन आरओ नई दर से भेज दिया। अब मामले को सुलझाने और किसानों से अधिक ली गई राशि लौटाने की बात कही जा रही है।

उल्लेखनीय है कि यूरिया और डीएपी को छोड़कर अन्य प्रमुख उर्वरकों के भाव में 26 मई 2026 को वृद्धि हुई थी। विभिन्न उर्वरक ग्रेड में यह वृद्धि करीब 100 रुपए से लेकर 750-800 रुपए प्रति बोरी तक हुई। विशेष रूप से एनपीके 12:32:16 और एनपीके 20:20:0:13 जैसे ग्रेड में एमआरपी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। ऐसे में पुरानी एमआरपी अंकित बोरियों में उपलब्ध खाद को नई दर पर बेचने का मामला और भी गंभीर हो जाता है। यदि बोरी पर पुरानी एमआरपी स्पष्ट रूप से अंकित है, तो किसानों से नई दर पर राशि वसूलने से पहले संबंधित समिति, मार्कफेड और कृषि विभाग के अधिकारियों को स्टॉक तथा एमआरपी की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी। यही वजह है कि पांढुर्ना में सामने आए एसएसपी मामले में अब यह सवाल उठ रहा है कि 26 मई को दरें बढ़ने के बाद पुरानी एमआरपी वाली बोरियों का स्टॉक किस स्थिति में था, नई दर का आरओ किस आधार पर जारी हुआ और किसानों से अतिरिक्त राशि वसूलने की अनुमति किस स्तर पर मिली? हालांकि, इसी जिले में सभी प्रकार की खाद की खरीदी के दौरान किसानों से वसूली गई अतिरिक्त राशि अभी तक उन्हें वापस नहीं मिली है। पोटाश के अलावा अन्य खादों में भी किसानों से अतिरिक्त राशि वसूले जाने के मामले सामने आए हैं, लेकिन यह राशि भी अब तक किसानों को वापस नहीं की गई है।

26 मई को बढ़े थे अधिकांश खादों के दाम : उल्लेखनीय है कि यूरिया और डीएपी को छोड़कर अन्य प्रमुख उर्वरकों के भाव में 26 मई 2026 को वृद्धि हुई थी। विभिन्न उर्वरक ग्रेड में यह वृद्धि करीब 100 रुपए से लेकर 750-800 रुपए प्रति बोरी तक हुई। विशेष रूप से एनपीके 12:32:16 और एनपीके 20:20:0:13 जैसे ग्रेड में एमआरपी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।स्मरण रहे कि गत जून माह में पांढुर्ना में ई-टोकन की आड़ में डबल लॉक केंद्र से किसानों को पुरानी एमआरपी का पोटाश नई दर पर बेचा गया था। कृषक जगत की इस खबर के बाद तंत्र सक्रिय हुआ था और जांच के बाद गोदाम प्रभारी को न केवल निलंबित किया गया, बल्कि उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश भी हुए थे। इसके बावजूद एक माह बीत जाने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई। अब फिर पुरानी एमआरपी के खाद को नई दर पर बेचने का मामला सामने आना संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

किसानों से प्रति बोरी 100 रुपए अधिक वसूले : कृषक जगत को अपनी परेशानी बताते हुए किसान वनमाला मंसाराम खोड़े, राजेश लक्ष्मण ढोबारे, लीलाधर श्रवण क्षीरसागर, परसराम दयाराम बालपांडे, उकड़या मानिकराव पाठे, हीरालाल बलिराम कोल्हे, योगेंद्र रत्नाकर वघाले, संजय गुलाबराव आखरे और रामेश्वर मिरग्याजी बेलखड़े ने बताया कि उन्होंने अपनी जरूरत के मुताबिक सिंगल सुपर फास्फेट जिंक दानेदार खाद वृहत्ताकार कृषि साख समिति, पांढुर्ना से खरीदा था। किसानों के अनुसार उन्हें त्र्यम्बकेश्वर एग्रो इंडस्ट्रीज प्रा. लि., मेघनगर का एसएसपी 630 रुपए प्रति बोरी की दर से दिया गया और इसकी रसीद भी दी गई। लेकिन जब उन्होंने बोरी पर एमआरपी देखी तो उस पर कीमत 530 रुपए अंकित थी। बैच नंबर ZG 02 की इन बोरियों पर निर्माण तिथि मार्च 2026 अंकित है। जब किसानों ने समिति को मार्कफेड के 26 मई 2026 के उस आदेश की जानकारी दी, जिसमें पुरानी दर के खाद को पुरानी दर पर ही बेचने के निर्देश हैं, तो समिति की ओर से कहा गया कि कंपनी से 630 रुपए की दर से ही आरओ आया है। उसी के अनुसार राशि ली गई है। इस तरह प्रत्येक किसान से प्रति बोरी 100 रुपए अधिक वसूले गए।
नियमानुसार पुरानी एमआरपी की खाद पुरानी दर पर ही बिके, यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सहकारी समिति और कृषि विभाग दोनों की थी। ऐसे में दोनों स्तरों पर निगरानी में हुई चूक गंभीर सवाल खड़े करती है।

पिछली घटना के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था – उल्लेखनीय है कि गत 22 जून के कृषक जगत में ‘क्या ई-टोकन की आड़ में किसानों से अधिक वसूली हुई?’ शीर्षक से पांढुर्ना के डबल लॉक केंद्र से किसानों को पोटाश पुरानी दर 1800 रुपए के बजाय नई दर 1975 रुपए में बेचने के मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया। कलेक्टर की जांच में किसानों की शिकायत प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर विस्तृत प्रतिवेदन मार्कफेड मुख्यालय भेजा गया था। मार्कफेड के प्रबंध संचालक ने तत्काल जांच और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके चलते पांढुर्ना के गोदाम प्रभारी को निलंबित कर उनके खिलाफ संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी किए गए थे।ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पांढुर्ना की सहकारी समिति और कृषि विभाग ने पिछली घटना से सबक क्यों नहीं लिया? फिर से पुरानी एमआरपी के खाद को किसानों को नई दर पर कैसे बेच दिया गया ?

किसान कल्याण वर्ष में लापरवाही पर सवाल–  प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसमें किसानों के लिए कृषि आदानों की उचित व्यवस्था करने, उनकी समस्याओं का समाधान करने तथा कृषि लागत कम कर उनकी आय बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में उसी वर्ष में किसानों को कृषि आदान की खरीद में अधिक राशि चुकानी पड़े और जिम्मेदार विभागों को इसकी जानकारी किसानों द्वारा दिलाई जाए, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल है। विभागीय उदासीनता की स्थिति यह संकेत दे रही है कि पिछली घटना से जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई सबक नहीं लिया। किसान हित की योजनाओं और किसान कल्याण वर्ष के आयोजनों के बीच यदि कृषि आदान की बिक्री में ही किसानों से अधिक राशि वसूली जाती है, तो इन व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। क्या इस अव्यवस्था में सुधार होगा या किसान हमेशा की तरह ऐसी धोखाधड़ी का शिकार होते रहेंगे?

अधिकारियों के कथन :  इस मामले की जानकारी जब किसान पुत्र एवं कृषक जगत संवाददाता श्री उमेश खोड़े ने उप संचालक कृषि श्री मोरिस नाथ को दी तो उन्होंने मामले को दिखवाने की बात कही। वहीं, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, पांढुर्ना के ब्रांच मैनेजर श्री नीलेश भांगे ब्रांच मैनेजर/ प्रशासक ने बताया कि वे अभी जनकल्याण शिविर में हैं। उनके अधीन आठ सहकारी समितियां हैं। सभी समितियों से जानकारी लेकर वास्तविक स्थिति बताई जाएगी। अनुविभागीय कृषि अधिकारी, पांढुर्ना श्रीमती अर्चना डोंगरे ने बताया कि शिकायत आने के बाद फिलहाल उक्त खाद की बिक्री बंद करा दी गई है। इस मामले में जिला विपणन अधिकारी (डीएमओ) से पूरी जानकारी ली जा रही है। वहीं, कंपनी के एजेंट दिलीप घुरसिया ने बताया कि पांढुर्ना में 400 बोरी तथा सौंसर सहकारी समिति में 800 बोरी माल दिया गया है।कंपनी एजेंट ने स्वीकार किया कि जिले में लगभग 200 टन एसएसपी खाद की DI हुई है। माल किस एमआरपी का गया है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।

बोरी पर पुरानी एमआरपी, फिर भी मार्कफेड के डीएमओ बेखबर  :  हैरानी की बात यह है कि किसानों को बेची गई एसएसपी खाद की बोरियों पर 530 रुपए की पुरानी एमआरपी स्पष्ट रूप से अंकित थी, इसके बावजूद किसानों से 630 रुपए प्रति बोरी वसूले जाते रहे और जिले में खाद की आपूर्ति एवं विपणन व्यवस्था से जुड़े मार्कफेड के जिला विपणन अधिकारी (डीएमओ) को इसकी भनक तक नहीं लगी। सवाल यह है कि जब खाद सहकारी समिति के माध्यम से किसानों तक पहुंच रही थी और बोरी पर कीमत स्पष्ट रूप से छपी हुई थी, तो नई दर से आरओ जारी होने और पुरानी एमआरपी वाले माल की बिक्री के बीच का यह अंतर जिम्मेदार अधिकारियों की नजर से कैसे बच गया? और गंभीर बात यह है कि मामला सामने आने पर शुरुआत में समिति प्रबंधक एवं कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा यह कहकर बिक्री को सही बताया जा रहा था कि बोरियां पहले प्रिंट हो गई थीं और बाद में मार्कफेड की दरों में वृद्धि हुई है। लेकिन किसानों ने जब मार्कफेड के 26 मई 2026 के आदेश का हवाला दिया, तब मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं।

अब सवाल यह है कि पुरानी एमआरपी वाली खाद के लिए नई दर का आरओ आखिर किस आधार पर जारी हुआ? आरओ जारी करते समय माल की एमआरपी की जांच किसकी जिम्मेदारी थी? और यदि पुरानी एमआरपी वाले स्टॉक को पुरानी दर पर ही बेचा जाना था, तो किसानों से प्रति बोरी 100 रुपए अधिक वसूली होने से पहले मार्कफेड, सहकारी समिति के बैंक प्रबंधक और कृषि विभाग में से किसी ने इसे क्यों नहीं रोका? कहावत है कि “पूरे कुएं में ही भांग घुली हो तो पानी साफ कैसे मिलेगा।” पांढुर्ना के इस मामले में कंपनी स्तर से लेकर सहकारी समिति, मार्कफेड और कृषि विभाग की निगरानी व्यवस्था तक जिस तरह की चूक या कहीं मिलीभगत हुई, इसका खुलासा उच्च स्तर पर निष्पक्ष जांच से ही हो सकेगा। ऐसे में मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तर पर निष्पक्ष जांच कराई जाना जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पुरानी एमआरपी वाली खाद के लिए नई दर का आरओ किस स्तर पर जारी हुआ, किसानों से अतिरिक्त राशि किसके निर्देश पर वसूली गई और निरीक्षण के दौरान यह गड़बड़ी क्यों नहीं पकड़ी गई। साथ ही, किसानों से वसूली गई पूरी अतिरिक्त राशि तत्काल वापस कर दोषी अधिकारियों एवं संबंधित जिम्मेदारों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए।

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