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राज्य कृषि समाचार (State News)

कृषक कल्याण वर्ष 2026: ग्रीष्मकालीन फसलों में मूंग के स्थान पर उड़द को प्राथमिकता

24 फरवरी 2026, भोपाल: कृषक कल्याण वर्ष 2026: ग्रीष्मकालीन फसलों में मूंग के स्थान पर उड़द को प्राथमिकता – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिमंडल बैठक में राज्य सरकार ने ग्रीष्मकालीन दलहनी फसलों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए उड़द को प्राथमिकता देने की घोषणा की है। उड़द उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के अतिरिक्त ₹600 प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। केंद्र सरकार ने विपणन सीजन 2025-26 के लिए उड़द का MSP ₹7,800 प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। राज्य प्रोत्साहन जोड़ने पर किसानों को कुल ₹8,400 प्रति क्विंटल तक प्राप्त होने की संभावना है।

रकबे का बड़ा अंतर–  प्रदेश में वर्तमान में मूंग का रकबा लगभग 12 लाख हेक्टेयर है, जबकि उड़द का रकबा मात्र करीब 90 हजार हेक्टेयर के आसपास है। पिछले 8–10 वर्षों में मूंग का रकबा तेजी से बढ़ा है। उन्नत बीजों की उपलब्धता, सिंचाई साधनों का विस्तार और सुनिश्चित उत्पादन ने मूंग को किसानों के बीच भरोसेमंद फसल बनाया है।

अब उठने लगा बड़ा सवाल – ऐसे में प्रश्न उठ रहा है कि क्या सरकार का रुझान मूंग की सरकारी खरीदी से हटकर उड़द की ओर अधिक झुक रहा है? वर्तमान में मूंग खरीदी को लेकर स्पष्ट घोषणा नहीं होने से किसानों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पिछले वर्ष भी मूंग खरीदी का निर्णय विलंब से हुआ था, जिससे विपणन और मूल्य को लेकर भ्रम की स्थिति बनी थी। इस बार उड़द पर स्पष्ट प्रोत्साहन घोषित होने के बाद किसान यह सोचने को मजबूर हैं कि ग्रीष्मकालीन सीजन में किस फसल का चयन करें।

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व्यावहारिक चुनौती–  रकबे के भारी अंतर और स्थापित बीज-सिंचाई तंत्र को देखते हुए अल्पकाल में बड़े पैमाने पर मूंग से उड़द की ओर शिफ्ट संभव नहीं दिखता। यदि सरकार मूंग खरीदी पर शीघ्र स्पष्ट नीति नहीं देती है, तो खेत स्तर पर निर्णय लेना किसानों के लिए कठिन हो सकता है।विशेषज्ञों का मत है कि फसल विविधीकरण की नीति तभी सफल होगी, जब बीज उपलब्धता, तकनीकी मार्गदर्शन, खरीदी व्यवस्था और बाजार भरोसे चारों पहलुओं पर समान रूप से काम किया जाए। फिलहाल ग्रीष्मकालीन बोवनी से पहले किसानों की निगाह सरकार की अगली घोषणा पर टिकी हुई है।

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