राज्य कृषि समाचार (State News)

ड्रिप सिंचाई और तीन फसलों की खेती से किसान ने कमाए साढ़े तेरह लाख रुपये

08 सितंबर 2026, छिंदवाड़ा: ड्रिप सिंचाई और तीन फसलों की खेती से किसान ने कमाए साढ़े तेरह लाख रुपये – परासिया विकासखंड के गांव उमरेठ के किसान संदीप पवार ने ड्रिप सिंचाई और वैज्ञानिक तरीके से खेती कर एक ही सीजन में साढ़े तेरह लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया है। यह मुनाफा उन्होंने हरी मिर्च, करेला और शिमला मिर्च की खेती से हासिल किया।

संदीप पवार ने 2011-12 में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 70 प्रतिशत अनुदान पर अपने खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली लगवाई थी। इसके बाद से वे लगातार आधुनिक उद्यानिकी तकनीक और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन अपनाते आ रहे हैं।

साढ़े छह हेक्टेयर में तीन फसलों की खेती

संदीप पवार के पास कुल 6.504 हेक्टेयर जमीन है, जिस पर उन्होंने तीन अलग-अलग सब्जियां उगाई हैं। चार एकड़ में हरी मिर्च से 20 टन उत्पादन मिला, ढाई एकड़ में करेले से 25 टन उत्पादन हुआ, जबकि पांच एकड़ में शिमला मिर्च से सबसे ज्यादा 100 टन उत्पादन हासिल हुआ।

इस पूरी खेती पर उनकी कुल लागत करीब साढ़े ग्यारह लाख रुपये आई, जबकि तीनों फसलों को बेचकर उन्हें कुल पौने पच्चीस लाख रुपये की आमदनी हुई। इस तरह उन्हें साढ़े तेरह लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ, जो लागत का करीब सवा गुना है।

संदीप पवार कहते हैं, “मैं सभी किसानों से आग्रह करता हूं कि वे शासन की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लें और आधुनिक सिंचाई तकनीक अपनाएं।” उनका मानना है कि ड्रिप सिंचाई से पानी की बचत तो होती ही है, साथ ही खाद और दवा का इस्तेमाल भी कम मात्रा में करना पड़ता है, जिससे लागत में भी कमी आती है।

उन्होंने बताया कि ड्रिप सिंचाई अपनाने के बाद से पानी की खपत में करीब आधी कमी आई है, जबकि उत्पादन पहले से बेहतर हुआ है। इसी वजह से वे बीते डेढ़ दशक से लगातार इसी तकनीक पर भरोसा करते आ रहे हैं।

दूसरी फसलों के साथ मिलाकर खेती का फायदा

छिंदवाड़ा जिले के कृषि अधिकारियों के अनुसार एक ही खेत में अलग-अलग समय पर तैयार होने वाली सब्जियां लगाने से किसान को साल भर आमदनी मिलती रहती है। इससे किसी एक फसल का भाव गिरने पर भी पूरा नुकसान नहीं होता।

जिले के अन्य किसान भी अब संदीप पवार के खेत को देखने आ रहे हैं और ड्रिप सिंचाई पर मिलने वाले अनुदान की जानकारी ले रहे हैं। कृषि विभाग का कहना है कि इच्छुक किसान अपने ब्लॉक कार्यालय से योजना की पूरी जानकारी ले सकते हैं।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का नारा ही “पर ड्रॉप, मोर क्रॉप” यानी हर बूंद से ज्यादा फसल है। इसके तहत लघु और सीमांत किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई पर सामान्य किसानों की तुलना में अधिक अनुदान दिया जाता है, ताकि पानी की कमी वाले इलाकों में भी बागवानी फसलें उगाई जा सकें।

छिंदवाड़ा जिला मिर्च, शिमला मिर्च और करेले जैसी सब्जियों की खेती के लिए मध्य प्रदेश के प्रमुख इलाकों में गिना जाता है। कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जिले में हर साल सैकड़ों किसान ड्रिप सिंचाई योजना का लाभ लेकर सब्जी की खेती की तरफ रुख कर रहे हैं, जिससे इलाके में सब्जी उत्पादन लगातार बढ़ रहा है।

यह खबर किसानों और कृषि-इनपुट कारोबार के लिए क्यों मायने रखती है: यह उदाहरण बताता है कि एक बार सिंचाई ढांचा तैयार हो जाने के बाद किसान लंबे समय तक उसका फायदा उठा सकते हैं और अलग-अलग सब्जियां उगाकर जोखिम भी कम कर सकते हैं। ड्रिप सिंचाई उपकरण, मल्चिंग सामग्री और गुणवत्तापूर्ण सब्जी बीज बेचने वाले कारोबारियों के लिए मध्य प्रदेश के सब्जी बेल्ट में मांग लगातार बनी रहने की उम्मीद है।

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