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राज्य कृषि समाचार (State News)

मटर की खेती में किसान ने अपनाई स्टेकिंग तकनीक, उत्पादन 40 से बढ़कर 55 क्विंटल/एकड़ पहुंचा; मंडी में भी मिले 20% ज्यादा दाम

21 जुलाई 2026, भोपाल: मटर की खेती में किसान ने अपनाई स्टेकिंग तकनीक, उत्पादन 40 से बढ़कर 55 क्विंटल/एकड़ पहुंचा; मंडी में भी मिले 20% ज्यादा दाम – खेती में नई तकनीक अपनाकर किसान न केवल उत्पादन बढ़ा सकते हैं, बल्कि अपनी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। इसका उदाहरण ग्वालियर जिले के घाटीगांव विकासखंड के ग्राम पचपन का पुरा (बरई) के किसान धर्म सिंह कुशवाह ने पेश किया है। उन्होंने मटर की खेती में स्टेकिंग तकनीक अपनाई, जिससे उत्पादन 40 क्विंटल प्रति एकड़ से बढ़कर 55 क्विंटल प्रति एकड़ पहुंच गया। इतना ही नहीं, बेहतर गुणवत्ता की फलियां मिलने से उन्हें मंडी में करीब 20 प्रतिशत अधिक कीमत भी मिली।

धर्म सिंह कुशवाह के पास करीब 2.863 हेक्टेयर कृषि भूमि है। वे वर्षों से पारंपरिक तरीके से मटर की खेती कर रहे थे, जिसमें बेलें जमीन पर फैल जाती थीं। इससे फसल में कीट और फफूंद का प्रकोप बढ़ जाता था। फलियां छोटी और दागदार होने के कारण मंडी में अच्छे दाम नहीं मिलते थे। मेहनत के बावजूद अपेक्षित लाभ नहीं मिलने से वे निराश रहते थे।

उद्यानिकी विभाग की सलाह से बदली खेती की तस्वीर

धर्म सिंह बताते हैं कि बदलाव की शुरुआत तब हुई, जब गांव पहुंचे उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने उन्हें स्टेकिंग तकनीक अपनाने की सलाह दी। उन्होंने पहले एक एकड़ खेत में इसका प्रयोग किया। इसके तहत खेत में बांस और तार लगाकर मटर की बेलों को सहारा दिया गया। साथ ही ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग का उपयोग किया गया, जिससे बेलें जमीन पर फैलने के बजाय ऊपर की ओर बढ़ीं और उन्हें भरपूर धूप व हवा मिली।

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15 क्विंटल बढ़ा उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता की मिली फलियां

नई तकनीक का असर जल्द ही दिखाई देने लगा। पहले जहां प्रति एकड़ लगभग 40 क्विंटल उत्पादन होता था, वहीं स्टेकिंग तकनीक अपनाने के बाद यह बढ़कर 55 क्विंटल प्रति एकड़ हो गया। जमीन के संपर्क में न आने से फलियां दागरहित, लंबी और बेहतर गुणवत्ता की रहीं। इसका सीधा फायदा बाजार में मिला और किसानों को करीब 20 प्रतिशत अधिक भाव प्राप्त हुआ।

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ड्रिप और मल्चिंग से घटी लागत

धर्म सिंह के अनुसार, ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग के इस्तेमाल से पानी की बचत हुई और खरपतवार की समस्या भी काफी कम हो गई। पौधे स्वस्थ रहने से कीटनाशकों और फफूंदनाशकों का छिड़काव भी पहले की तुलना में लगभग आधा रह गया। इससे खेती की लागत कम हुई और मुनाफा बढ़ा।

अब पूरी खेती में अपनाएंगे यही तकनीक

धर्म सिंह का कहना है कि जब एक एकड़ में इतना अच्छा परिणाम मिला है तो अब वे अपनी पूरी मटर की खेती स्टेकिंग तकनीक से ही करेंगे। साथ ही वे गांव के अन्य किसानों को भी इस तकनीक को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, ताकि वे भी कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर आय प्राप्त कर सकें।

धर्म सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश में ‘किसान कल्याण वर्ष’ के तहत किसानों को आधुनिक और उन्नत खेती के लिए लगातार मार्गदर्शन दिया जा रहा है। उनका मानना है कि यदि किसान नई तकनीकों को अपनाएं तो खेती अधिक लाभकारी और टिकाऊ बन सकती है।

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