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राज्य कृषि समाचार (State News)

निर्जलित प्याज में निर्यात की संभावनाएं

4 जनवरी 2021, इंदौर। निर्जलित प्याज में निर्यात की संभावनाएं – इन दिनों प्याज़ का उत्पादन कम होने और कीमत कम मिलने से प्रदेश के किसान आंसू बहा रहे हैं। यह स्थिति हर साल देखने को मिलती है द्य ऐसे में प्याज़ उत्पादक किसानों को निर्जलित प्याज़ (डिहाइड्रेटेड ओनियन ) की तकनीक को अपनाना चाहिए। इससे न केवल उन्हें प्याज़ के दाम अच्छे मिलेंगे , बल्कि निर्यात की संभावनाएं भी बनेंगी। हालाँकि अपने देश में अभी इसका प्रचलन गुजरात के भावनगर जिले तक ही सीमित है।

क्या है निर्जलित प्याज ? : जैसा कि सभी जानते हैं कि प्याज़ में 90 प्रतिशत पानी रहता है। एक आधुनिक मशीन के ज़रिए इस पानी को निकाल दिया जाता है, जिसे निर्जलन कहते हैं। यह मशीन प्याज़ से सिर्फ पानी ही निकालती है, प्याज़ के अंदर मौजूद प्राकृतिक तत्व यथावत बने रहते हैं। इस प्याज़ को दो साल तक अपने घर में बिना फ्रिज के रख सकते हैं। उपयोग करने से 10 मिनट पूर्व पानी में भिगो दीजिए। यह वापस ताज़े प्याज़ की तरह हो जाएगा। मिली जानकारी के अनुसार हमारे देश में सिर्फ गुजरात के भावनगर जिले में समुद्र तट पर स्थित गुजरात का गोवा कहे जाने वाले महुआ नामक शहर में निर्जलित प्याज़ के करीब डेढ़ सौ संयंत्र लगे हुए हैं। यहां भावनगर मंडी के अलावा नासिक से भी कई ट्रक प्याज़ रोज़ आते हैं, जिन्हें निर्जलित करने के बाद पैक करके अमेरिका , यूरोप और ब्रिटेन जैसे देशों को निर्यात किया जाता है। इसमें प्याज़ का दाम भी अच्छा मिल जाता है।

लेकिन अफ़सोस की बात यह है कि इस नई तकनीक को अपनाने में देश के प्याज़ उत्पादक किसानों ने अपेक्षित रूचि नहीं दिखाई है। यदि किसानों को अपनी आय दुगुनी करना है, तो इस प्रयोग को अपनाना पड़ेगा, क्योंकि यही समय की मांग है। निर्जलित प्याज़ की कीमत 200 रु. किलो है। दूसरी बात यह है कि 1 किलो निर्जलित प्याज 8 किलो ताज़े प्याज़ के बराबर होता है अर्थात दाल -सब्जी में इसकी मात्रा कम लगने से भी बचत होगी और स्वाद ताज़े प्याज़ जैसा ही मिलेगा। निर्जलित प्याज़ के प्रचार -प्रसार के लिए सरकार को भी प्रयास करने होंगे। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए उद्यानिकी विभाग द्वारा प्रशिक्षण , परिवहन सुविधा या अन्य आर्थिक सहायता देने जैसे प्रावधान करने होंगे। राज्य में निर्जलीकरण के संयंत्र लगाने वाले उद्योगपतियों को भी कम ब्याज पर ऋण एवं अन्य विशेष सुविधाएं देनी होंगी। जब यह योजना मूर्त रूप ले लेगी, तभी हमेशा आंसू बहाने वाले प्याज़ उत्पादक किसानों के चेहरे पर मुस्कान आ पाएगी।

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