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राज्य कृषि समाचार (State News)

कोलारस सहकारी बैंक में 80.56 करोड़ का गबन

आरोपियों पर हो सख्त कार्रवाई – कलेक्टर शिवपुरी

29 अक्टूबर 2026, शिवपुरी: कोलारस सहकारी बैंक में 80.56 करोड़ का गबन – जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित शिवपुरी की कोलारस शाखा में हुए 80.56 करोड़ रुपए के बहुचर्चित गबन प्रकरण को लेकर प्रशासन पूरी तरह सख्त हो गया है। इस मामले में अब तक की गई कार्रवाई और आगे की रणनीति पर चर्चा के लिए कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री अर्पित वर्मा की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।इस मामले में मुख्य आरोपी चपरासी राकेश पाराशर को सर्वोच्च न्यायालय से जमानत मिल चुकी है।

 कलेक्टर श्री अर्पित वर्मा ने लोक अभियोजन अधिकारी से इस संबंध में विशेष चर्चा की। उन्होंने निर्देश दिए कि लोक अभियोजन अधिकारी पूरे प्रकरण का गहन अध्ययन करें तथा आरोपी की जमानत रद्द करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए न्यायालय में मजबूत पक्ष एवं जवाब प्रस्तुत करने के लिए उचित मार्गदर्शन दें। इसमें पुलिस द्वारा की गई विवेचना और अभी तक की कार्यवाही की जानकारी लोक अभियोजन अधिकारी को दी जाए। यह प्रकरण लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू को भी भेजे जाएंगे। इस संबंध में भी बैठक में चर्चा की गई ।कलेक्टर श्री अर्पित वर्मा ने सहकारी बैंक और कोलारस पुलिस के अधिकारियों से पूरे प्रकरण की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बेहद गंभीर मामला है। सहकारी बैंक में हुए गबन के कारण बैंक को भारी वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते आम नागरिकों और खाताधारकों को उनकी जमा पूंजी समय पर नहीं मिल पा रही है।प्रति सप्ताह मंगलवार को आयोजित होने वाली जनसुनवाई सहित अन्य सामान्य दिवसों में भी बड़ी संख्या में नागरिक अपनी जमा राशि की मांग को लेकर पहुंच रहे हैं। आम जनता की इन समस्याओं को देखते हुए कलेक्टर श्री अर्पित वर्मा ने आरोपियों के विरुद्ध हरसंभव कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

क्या है पूरा मामला? – उल्लेखनीय है कि जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की कोलारस शाखा में 80.56 करोड़ रुपए का भारी गबन सामने आया था। मामले की जांच के लिए एक विशेष दल का गठन किया गया था। जांच प्रतिवेदन के आधार पर, इसमें लिप्त पाए गए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कोलारस थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी, जिसका प्रकरण वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। प्रशासन अब इस मामले में कानूनी शिकंजा कसने और खाताधारकों को राहत दिलाने के लिए हर संभव सख्त कदम उठा रहा है।

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