धान छोड़ सब्जी की खेती से बढ़ी कमाई, किसान ने एक एकड़ में 12 टन करेला उगाकर कमाए ₹1.07 लाख
03 सितंबर 2026, भोपाल: धान छोड़ सब्जी की खेती से बढ़ी कमाई, किसान ने एक एकड़ में 12 टन करेला उगाकर कमाए ₹1.07 लाख – छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड के ग्राम टेंगराही के किसान नारायण प्रसाद वर्मा ने पारंपरिक धान की खेती के साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाई है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के सहयोग और आधुनिक कृषि तकनीकों के इस्तेमाल से उन्होंने करेला की खेती को लाभकारी बनाया। उनकी यह पहल क्षेत्र के दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
1.06 हेक्टेयर जमीन पर शुरू की उद्यानिकी खेती
श्री नारायण प्रसाद वर्मा के पास कुल 1.06 हेक्टेयर कृषि भूमि है। पहले वे मुख्य रूप से धान की खेती करते थे, जिससे उन्हें सीमित आय होती थी। खेती को अधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य से उन्होंने फसल विविधीकरण अपनाया और धान के साथ करेला सहित अन्य सब्जियों की खेती शुरू की।
सरकारी अनुदान से बढ़ाया खेती का दायरा
राष्ट्रीय बागवानी मिशन वर्ष 2025-26 के तहत सब्जी क्षेत्र विस्तार योजना में किसान को एक हेक्टेयर क्षेत्र में करेला की खेती के लिए 24 हजार रुपये का अनुदान मिला। इसके अलावा सब्जी फसलों के लिए 0.50 हेक्टेयर क्षेत्र में सपोर्ट सिस्टम स्थापित करने के लिए 5 हजार रुपये का अनुदान भी डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक खाते में प्राप्त हुआ। सरकारी सहयोग मिलने के बाद किसान ने खेती में ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और आधुनिक कृषि यंत्रों का इस्तेमाल किया। इन तकनीकों से पानी की बचत के साथ फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में भी सुधार हुआ।
एक एकड़ में 12 टन करेला उत्पादन
आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल का असर करेला उत्पादन में देखने को मिला। श्री वर्मा ने एक एकड़ में करीब 12 टन करेला का उत्पादन हासिल किया। बाजार में उचित मूल्य मिलने के बाद सभी खर्च निकालने पर उन्हें करीब 1 लाख 7 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। किसान श्री नारायण प्रसाद वर्मा के अनुसार, उद्यानिकी फसलों और आधुनिक तकनीकों को अपनाने से खेती से होने वाली आय में बढ़ोतरी हुई है। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और खेती के प्रति उनका भरोसा भी बढ़ा है।
दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा
श्री नारायण प्रसाद वर्मा की सफलता बताती है कि पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। आधुनिक सिंचाई तकनीकों और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। उनकी यह पहल क्षेत्र के अन्य किसानों को भी फसल विविधीकरण और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।
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