राज्य कृषि समाचार (State News)

बीकानेर में सहजन की खेती को मिलेगा बढ़ावा, किसानों को मुफ्त पौधे और प्रशिक्षण

काजरी की पहल से कम लागत में अतिरिक्त आय का रास्ता, देश-विदेश में बढ़ रही सहजन की मांग

17 अगस्त 2026, बीकानेर: बीकानेर में सहजन की खेती को मिलेगा बढ़ावा, किसानों को मुफ्त पौधे और प्रशिक्षण – राजस्थान के बीकानेर स्थित केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) ने किसानों को सहजन यानी मोरिंगा की खेती के लिए प्रोत्साहित करने की पहल शुरू की है। इसके तहत किसानों को सहजन की वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही चयनित किसानों को अधिकतम 1,000 पौधे तक मुफ्त उपलब्ध कराने की योजना है। संस्थान की इस पहल का उद्देश्य किसानों को कम लागत में बेहतर आमदनी देने वाली फसल से जोड़ना है।
कम पानी में भी खेती की संभावना

सहजन को शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए उपयोगी फसल माना जाता है। इसकी खेती में अपेक्षाकृत कम पानी की जरूरत होती है और किसान इसे खेत की मेड़, बगीचे अथवा अन्य उपयुक्त स्थानों पर भी लगा सकते हैं। ऐसे क्षेत्रों में जहां पानी की उपलब्धता सीमित है, वहां सहजन किसानों के लिए अतिरिक्त आय का माध्यम बन सकता है।

काजरी की ओर से किसानों को पौध तैयार करने, रोपण, सिंचाई, पोषण प्रबंधन, कटाई और उत्पादन से जुड़े वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को केवल पौधे उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें व्यावसायिक स्तर पर सहजन की खेती के लिए सक्षम बनाना है।

पत्तियों से लेकर फल तक की मांग

सहजन की फलियों के साथ इसकी पत्तियों और बीजों का भी उपयोग होता है। पोषण संबंधी गुणों के कारण सहजन से जुड़े उत्पादों की मांग बढ़ रही है। खाद्य पदार्थों के अलावा इसके पत्तों का उपयोग पाउडर और विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पादों में भी किया जाता है।

देश के साथ-साथ विदेशी बाजार में भी मोरिंगा से बने उत्पादों की मांग बढ़ने से किसानों के लिए इसमें व्यावसायिक संभावनाएं बन रही हैं।

किसानों की आय बढ़ाने का विकल्प

विशेषज्ञों के अनुसार, किसानों को ऐसी फसलों से जोड़ना जरूरी है, जिनमें स्थानीय जलवायु के अनुरूप उत्पादन की क्षमता हो और बाजार में उनकी मांग भी बनी रहे। सहजन इस लिहाज से किसानों के लिए अतिरिक्त आय का विकल्प बन सकता है।

काजरी की पहल से किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधे, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और खेती की तकनीकी जानकारी एक साथ मिलने की उम्मीद है। इससे बीकानेर और आसपास के शुष्क क्षेत्रों में सहजन की व्यावसायिक खेती को विस्तार मिल सकता है।

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