वाइड रो स्पेसिंग तकनीक से करें गन्ने की खेती तो होगी अच्छी कमाई
16 अप्रैल 2026, भोपाल: वाइड रो स्पेसिंग तकनीक से करें गन्ने की खेती तो होगी अच्छी कमाई – अगर किसान वाइड रो स्पेसिंग तकनीक से गन्ने की खेती करते हैं, तो वह अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं और साथ ही प्रति एकड़ में लाखों रुपये तक की कमाई कर सकते हैं.
वाइड रो स्पेसिंग तकनीक में गन्ने की बुवाई पारंपरिक तरीके से अलग होती है. सामान्य तौर पर जहां गन्ने की कतारों के बीच दूरी 2 से 2.5 फीट रखी जाती है, वहीं इस नई विधि में यह दूरी बढ़ाकर करीब 4 फीट कर दी जाती है. इस बदलाव से पौधों को पर्याप्त धूप, हवा और पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे उनकी वृद्धि बेहतर होती है. पौधे मजबूत और स्वस्थ बनते हैं, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता भी बढ़ती है. गन्ना एक पानी प्रधान फसल में आती है. ऐसे में किसान अगर वाइड रो स्पेसिंग (Wide Row Spacing) तकनीक को अपनाकर खेती करते हैं, तो वह फसल की पानी की खपत को आधा कर सकते हैं. जहां पारंपरिक खेती में एक एकड़ गन्ने के लिए 18 से 20 लाख लीटर पानी की जरूरत होती है, वहीं वाइड रो स्पेसिंग में यह काम सिर्फ 9 से 10 लाख लीटर पानी में पूरा हो जाता है. इस तकनीक का किसानों को बड़ा फायदा है बीज की कम आवश्यकता. पारंपरिक खेती में जहां एक एकड़ में करीब 35 क्विंटल गन्ने का बीज लगता है, वहीं इस विधि में केवल 18 से 20 क्विंटल बीज से ही गन्ने की बुवाई हो जाती है, जिससे किसानों की शुरुआती लागत में कमी आती है और साथ ही गुड़ाई, निराई और सिंचाई मशीनों की मदद से आसानी से किए जा सकते हैं. इससे मजदूरी का खर्च कम हो जाता है.
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