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राज्य कृषि समाचार (State News)

खरपतवार नियंत्रण नहीं होने पर फसल उत्पादन में 60% तक गिरावट संभव: कृषि वैज्ञानिक

13 मई 2026, नई दिल्ली: खरपतवार नियंत्रण नहीं होने पर फसल उत्पादन में 60% तक गिरावट संभव: कृषि वैज्ञानिक – इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में मंगलवार से “अखिल भारतीय समन्वित खरपतवार प्रबंधन अनुसंधान परियोजना” की 33वीं वार्षिक समीक्षा बैठक शुरू हुई। तीन दिवसीय इस राष्ट्रीय बैठक का उद्घाटन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), नई दिल्ली के उप महानिदेशक (NRM) डॉ. ए. के. नायक ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने की। इस दौरान देशभर के कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर संस्थानों तथा हर्बीसाइड उद्योगों से जुड़े लगभग 100 वैज्ञानिक शामिल हुए।

बैठक में वैज्ञानिकों ने कहा कि खेतों में समय पर खरपतवार नियंत्रण नहीं होने से फसल उत्पादन में 40 से 60 प्रतिशत तक कमी आ सकती है, जबकि धान की सीधी बोनी में यह नुकसान कई बार 90 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। परियोजना के तहत देश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों में खरपतवार नियंत्रण संबंधी अनुसंधान, नई तकनीकों का विकास तथा किसानों तक उनके प्रसार का कार्य किया जा रहा है।

मुख्य अतिथि डॉ. ए. के. नायक ने वैज्ञानिकों से रासायनिक खरपतवारनाशकों पर निर्भरता कम कर समन्वित खरपतवार प्रबंधन अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि रासायनिक खरपतवारनाशकों के दुष्प्रभावों को देखते हुए प्राकृतिक एवं जैविक कृषि को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। साथ ही लाभकारी सूक्ष्मजीवों, केंचुओं और कीट-पतंगों पर खरपतवारनाशकों के प्रभावों के अध्ययन पर भी जोर दिया।

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रासायनिक खरपतवारनाशकों के नियंत्रित उपयोग पर जोर

कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कहा कि रासायनिक खरपतवारनाशी खेतों में खरपतवार नियंत्रण में प्रभावी जरूर हैं, लेकिन उनका अंधाधुंध उपयोग पर्यावरण, पारिस्थितिकी तंत्र तथा मानव स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। उन्होंने खरपतवार प्रबंधन में रसायनों के साथ-साथ यांत्रिक एवं जैविक नियंत्रण विधियों को प्राथमिकता देने की बात कही।

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17 केंद्रों की उपलब्धियों की हुई समीक्षा

खरपतवार अनुसंधान निदेशालय, जबलपुर के प्रभारी एवं प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. विजय कुमार चौधरी ने देशभर के 17 प्रमुख एवं 7 स्वयंसेवी केंद्रों में संचालित गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी दी। इस अवसर पर परियोजना के वार्षिक प्रतिवेदन 2025-26 सहित अन्य प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया।

कार्यक्रम में डॉ. एस.एस. कोल्हे को खरपतवार प्रबंधन अनुसंधान में उल्लेखनीय योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया, जबकि पंजाब कृषि विश्वविद्यालय को आईसीएआर बेस्ट सेंटर अवार्ड प्रदान किया गया।

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