राज्य कृषि समाचार (State News)

गोबर बना कमाई का जरिया, किसान ने वर्मी कंपोस्ट से बढ़ाई आमदनी और घटाई खेती की लागत

27 अगस्त 2026, भोपालगोबर बना कमाई का जरिया, किसान ने वर्मी कंपोस्ट से बढ़ाई आमदनी और घटाई खेती की लागत – मध्यप्रदेश के ग्राम ढाकनी, विकासखंड मनासा के प्रगतिशील किसान चेनराम पाटीदार ने खेती के साथ पशुपालन और जैविक खाद निर्माण को जोड़कर आय बढ़ाने का मॉडल तैयार किया है। करीब 2 हेक्टेयर भूमि पर खेती करने वाले चेनराम उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर खेती की लागत कम करने के साथ अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं।

पशुपालन से करीब 3 लाख रुपये की अतिरिक्त आय

चेनराम पाटीदार के पास 1 गाय और 4 भैंसें हैं। इनसे उन्हें प्रतिदिन करीब 20 से 25 लीटर दूध मिलता है। पशुपालन से उन्हें हर साल लगभग 3 लाख रुपये की अतिरिक्त आय हो रही है। पशुओं से मिलने वाले गोबर का उपयोग वे वर्मी कंपोस्ट बनाने में करते हैं।

वर्मी कंपोस्ट से अतिरिक्त आमदनी

चेनराम पिछले करीब 6 वर्षों से गोबर से वर्मी कंपोस्ट तैयार कर रहे हैं। इसका इस्तेमाल वे अपने खेत में करते हैं और अतिरिक्त मात्रा आसपास के किसानों को 10 रुपये प्रति किलो की दर से बेचते हैं। पिछले साल उन्होंने करीब 10 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट बेचकर 10 हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित की। खेत में नियमित रूप से वर्मी कंपोस्ट के इस्तेमाल से रासायनिक उर्वरकों की जरूरत में करीब 50 प्रतिशत तक कमी आई है। इससे खेती की लागत कम होने के साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद मिली है।

परंपरागत कृषि विकास योजना से मिला प्रोत्साहन

कृषि विभाग की परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) के तहत चेनराम को जैविक खेती के लिए हर साल प्रशिक्षण और 5 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि डीबीटी के माध्यम से मिल रही है। इसका उपयोग वे जैविक खेती की तकनीकों को अपनाने और खेत में जैविक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने में कर रहे हैं।

किसान क्रेडिट कार्ड से पशुशाला में सुधार

पशुपालन को बेहतर और वैज्ञानिक तरीके से करने के लिए चेनराम ने किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से पीएसीएस नलखेड़ा से 18 हजार रुपये का ऋण लिया। इस राशि से उन्होंने पशुशाला का फर्श पक्का कराया, पशुओं के लिए पक्की नांद बनवाई और पीने के पानी की ऑटोमेटिक व्यवस्था विकसित की।

खेती, पशुपालन और जैविक खाद को जोड़ा

चेनराम पाटीदार ने खेती, पशुपालन और जैविक खाद निर्माण को एक-दूसरे से जोड़कर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किया है। पशुओं से मिलने वाले गोबर से वर्मी कंपोस्ट तैयार होता है। इसका खेत में उपयोग करने से रासायनिक उर्वरकों की जरूरत कम हुई, जबकि अतिरिक्त वर्मी कंपोस्ट बेचकर उन्हें अतिरिक्त आमदनी भी मिल रही है।

चेनराम पाटीदार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मध्यप्रदेश शासन का आभार जताते हुए कहा कि किसान हितैषी योजनाओं से उन्हें कृषि और पशुपालन को बेहतर तरीके से संचालित करने में सहायता मिली है। उन्होंने बताया कि योजनाओं से मिले प्रशिक्षण, प्रोत्साहन और वित्तीय सुविधा का उपयोग कर वे खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

चेनराम पाटीदार की पहल बताती है कि किसान खेती के साथ पशुपालन और जैविक खाद निर्माण को जोड़कर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे खेती की लागत कम करने और अतिरिक्त आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है। उनका यह प्रयास अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणादायक बन रहा है।

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