Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राज्य कृषि समाचार (State News)

मानसून की सुस्त चाल से खरीफ फसलों पर बढ़ी चिंता, अगले 7–10 दिन होंगे निर्णायक

18 जुलाई 2026, भोपाल: मानसून की सुस्त चाल से खरीफ फसलों पर बढ़ी चिंता, अगले 7–10 दिन होंगे निर्णायक –  मध्य प्रदेश में 9 से 15 जुलाई के बीच मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से खरीफ फसलों को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस अवधि में प्रदेश में सामान्य 67.8 मिमी के मुकाबले केवल 18.2 मिमी वर्षा हुई, जो 73 प्रतिशत कम है। हालांकि 1 जून से 15 जुलाई तक संचयी वर्षा सामान्य से केवल 11 प्रतिशत कम रहने के कारण समय पर हुई शुरुआती बारिश ने खरीफ बुवाई को सुरक्षित बनाए रखा है।

जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई के प्रारंभ में हुई अच्छी वर्षा से प्रदेश में सोयाबीन, धान, मक्का, उड़द, मूंग तथा कपास की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है। लेकिन पिछले सप्ताह वर्षा का लंबा अंतराल फसलों की प्रारंभिक बढ़वार के लिए चुनौती बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि अगले 7 से 10 दिनों में अच्छी वर्षा नहीं होती है तो हल्की एवं मध्यम भूमि वाले क्षेत्रों में मिट्टी की नमी तेजी से घटेगी, जिसका सबसे अधिक असर सोयाबीन, धान और मक्का पर पड़ेगा।

सोयाबीन इस समय अंकुरण एवं प्रारंभिक वृद्धि की अवस्था में है, इसलिए नमी की कमी से पौधों की बढ़वार, पौध संख्या, खरपतवार नियंत्रण तथा उर्वरक प्रबंधन प्रभावित हो सकता है। धान उत्पादक क्षेत्रों में रोपाई कार्य धीमा पड़ सकता है, जबकि मक्का में प्रारंभिक वृद्धि प्रभावित होने की आशंका है। उड़द, मूंग एवं तिल जैसी दलहनी-तिलहनी फसलें अल्पकालिक सूखे को सहन कर सकती हैं, लेकिन लंबे शुष्क दौर से उत्पादन घट सकता है।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

पूर्वी मध्य प्रदेश में पिछले सप्ताह 66 प्रतिशत तथा पूरे मौसम में अब तक 24 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है। रीवा, मैहर, नरसिंहपुर, मंडला, शहडोल, सिंगरौली, कटनी और जबलपुर जैसे जिलों में स्थिति अधिक चिंताजनक है। इसके विपरीत पश्चिमी मध्य प्रदेश में साप्ताहिक वर्षा 80 प्रतिशत कम रहने के बावजूद मौसम की शुरुआत से अब तक वर्षा सामान्य से 2 प्रतिशत अधिक है, जिससे इंदौर, देवास, सीहोर, उज्जैन, हरदा, भोपाल, बुरहानपुर और आगर-मालवा सहित कई जिलों में फसलों को पर्याप्त नमी मिल रही है।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

सबसे अधिक मौसमी वर्षा घाटा अलीराजपुर (-76%), रीवा (-58%), मैहर (-57%), नर्मदापुरम (-42%), नरसिंहपुर (-41%), मंडला (-36%), शहडोल (-35%) और सिंगरौली (-35%) में दर्ज किया गया है। इन जिलों में किसानों को नमी संरक्षण, खरपतवार नियंत्रण, वर्षा होने तक नाइट्रोजन की टॉप ड्रेसिंग टालने तथा धान की रोपाई में उपलब्ध सिंचाई जल का विवेकपूर्ण उपयोग करने की सलाह दी गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ बुवाई फिलहाल सुरक्षित है, लेकिन अब पूरे सीजन की सफलता आने वाले 7–10 दिनों में मानसून की सक्रियता पर निर्भर करेगी। यदि शीघ्र अच्छी वर्षा नहीं हुई तो विशेष रूप से कम वर्षा वाले जिलों में सोयाबीन, मक्का और धान की प्रारंभिक बढ़वार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture