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राज्य कृषि समाचार (State News)

मसालों की खेती में छत्तीसगढ़ की बन रही देश में नई पहचान

प्रदेश में मसालों का उत्पादन चार लाख टन, छत्तीसगढ़ से अन्य राज्यों को हो रही है धनिया के बीजों की आपूर्ति

1 मार्च 2023,  रायपुर ।  मसालों की खेती में छत्तीसगढ़ की बन रही देश में नई पहचान – छत्तीसगढ़ में मसालों की खेती का दायरा बढ़ते जा रहा है। राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों का खेती-किसानी के क्षेत्र में असर दिख रहा है। किसान नवाचार की ओर बढ़ रहे हैं। सामान्यतः छत्तीसगढ़ में जो किसान धान तथा अन्य परम्परागत फसलों की खेती करते रहे हैं, वे अब मसालों की खेती की ओर भी रूख कर रहे हैं। मसालों की खेती में छत्तीसगढ़ की देश में नई पहचान बन रही है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार छत्तीसगढ़ की जलवायु मसालों के उत्पादन के अनुकूल है। इसलिए यहां मसालों की खेती लगातार बढ़ती जा रही है। हल्दी, अदरक, लाल मिर्च, अजवाईन, ईमली, लहसून की खेती की जा रही है। हल्दी, धनिया, मेथी, लहसून, मिर्च, अदरक की खेती छत्तीसगढ़ के करीब-करीब सभी क्षेत्रों में की जा रही है। वहीं बलरामपुर, बिलासपुर, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही और मुंगेली में अजवाइन तथा कोंडागांव में काली मिर्च की खेती भी की जा रही है।

हल्दी का उत्पादन सर्वाधिक 

मसालों की खेती के रकबे के साथ-साथ उत्पादन में भी तेजी से इजाफा देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ में अभी 66081 हेक्टेयर में मसालों की खेती हो रही है और लगभग 4 लाख 50 हजार 849 मीट्रिक टन मसालों का उत्पादन हुआ है। छत्तीसगढ़ में हल्दी का रकबा और उत्पादन सबसे अधिक है। उसके बाद अदरक, धनिया, लहसून, मिर्च, इमली की खेती की जा रही है।
मसाले की खेती के लिए किसानों को राष्ट्रीय बागवानी मिशन, राष्ट्रीय कृषि योजना तथा अन्य योजना के तहत सहायता दी जाती है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत 24 जिलों में मसाले की खेती 13302 हेक्टेयर में की गई है और 93114 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ है। वही राज्य में संचालित राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत विगत चार वर्षों में 1837.29 हेक्टेयर में मसाले की खेती की गई एवं औसतन 12861 मीट्रिक टन का उत्पादन प्राप्त हुआ है। इससे लगभग 3500 कृषक लाभान्वित हुए हैं।

मसालों की नई किस्म पर शोध 

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक श्री एस.एच. टूटेजा ने बताया कि बीते सालों में मसालों के बीजों पर शोध किया जा रहा है जिसमें धनिया की दो किस्में सीजी धनिया व सीजी चन्द्राहु धनिया विकसित की गई जिससे अच्छी फसल प्राप्त हो रही है। इसकी स्थानीय स्तर के अलावा अन्य 7 राज्यों में आपूर्ति की जा रही है। इसी तरह हल्दी की भी नई किस्म विकसित की गई है।

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राष्ट्रीय कार्यशाला

छत्तीसगढ़ में मसालों की संभावनाओं और उनकी खेती को प्रोत्साहित करने के लिए बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, सरकंडा, बिलासपुर में 14 एवं 15 मार्च, 2023 को कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इस कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों के विषय विशेषज्ञ शामिल होंगे तथा छत्तीसगढ़ में मसाला एवं सुगंधित फसलों के उत्पादन की संभावनाओं एवं क्षमताओं के संबंध में विचार-विमर्श किया जाएगा।

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