राज्य कृषि समाचार (State News)

छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा निर्णय: DAP की कमी पूरी करेगा एनपीके-एसएसपी, खाद वितरण लक्ष्य बढ़ाकर किया 17.18 लाख टन

07 जुलाई 2025, रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा निर्णय: DAP की कमी पूरी करेगा एनपीके-एसएसपी, खाद वितरण लक्ष्य बढ़ाकर किया 17.18 लाख टन – देश में डीएपी (डाय अमोनियम फॉस्फेट) खाद के आयात में आई कमी के कारण चालू खरीफ सीजन में इसकी आपूर्ति पर असर पड़ा है। लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों को खाद की किल्लत से बचाने के लिए वैकल्पिक और मजबूत इंतजाम किए हैं। अब राज्य में DAP की जगह एनपीके और एसएसपी जैसे उर्वरकों के माध्यम से जरूरत पूरी की जाएगी।

राज्य सरकार ने डीएपी की कमी को देखते हुए एनपीके (20:20:0:13 और 12:32:16) और एसएसपी (सिंगल सुपर फॉस्फेट) उर्वरकों का वितरण लक्ष्य बढ़ा दिया है। एनपीके के लक्ष्य को 1.80 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 4.90 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। एसएसपी के लक्ष्य को 2 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 3.53 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। वहीं डीएपी का लक्ष्य 3.10 लाख मीट्रिक टन से घटाकर 1.03 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। हालांकि, यूरिया (7.12 लाख टन) और एमओपी (60 हजार टन) के लक्ष्य में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इन बदलावों के बाद चालू खरीफ सीजन के लिए कुल खाद वितरण लक्ष्य 14.62 लाख टन से बढ़कर 17.18 लाख टन हो गया है।

किसानों को नहीं होगी परेशानी- मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि डीएपी की कमी से घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार ने पूरी व्यवस्था की है ताकि किसानों को समय पर खाद मिले। उन्होंने कहा कि एनपीके और एसएसपी जैसे विकल्पों से फसल उत्पादन में कोई कमी नहीं आएगी। सरकार किसानों को उनकी मांग के अनुसार खाद-बीज की आपूर्ति सुनिश्चित करने में लगी है।

कृषि वैज्ञानिकों का सुझाव: इन उर्वरकों से भी मिलेगा अच्छा उत्पादन

कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग का कहना है कि एनपीके और एसएसपी जैसे उर्वरक डीएपी का बेहतरीन विकल्प हैं। डीएपी की एक बोरी में 23 किलो फॉस्फोरस और 9 किलो नाइट्रोजन होता है। इसके स्थान पर अगर किसान 3 बोरी एसएसपी और 1 बोरी यूरिया का उपयोग करें, तो पौधों को फॉस्फोरस, नाइट्रोजन, सल्फर और कैल्शियम पर्याप्त मात्रा में मिल जाते हैं।

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एसएसपी उर्वरक फसल की गुणवत्ता, जड़ के विकास और उत्पादन बढ़ाने में मददगार होता है। किसानों को जैविक उर्वरकों (जैव खाद) का उपयोग करने की भी सलाह दी गई है, जो मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने में सहायक होता है।

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भंडारण और उपलब्धता की पूरी व्यवस्था

कृषि विभाग के अनुसार, खरीफ 2025 के लिए अभी तक 12.13 लाख मीट्रिक टन खाद का भंडारण किया जा चुका है। इसमें से 7.29 लाख मीट्रिक टन खाद किसानों को वितरित की जा चुकी है। राज्य में अभी भी 4.84 लाख मीट्रिक टन खाद सहकारी और निजी क्षेत्र में उपलब्ध है। राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि सभी सेवा सहकारी समितियों और बिक्री केंद्रों पर खाद-बीज की समय पर आपूर्ति हो, ताकि किसानों को कोई परेशानी न हो।

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