सोयाबीन की खेती में अपनाई ये खास तकनीक, किसान ने सिर्फ 3 बीघा से कमाया 1 लाख का शुद्ध लाभ
25 जून 2026, विदिशा: सोयाबीन की खेती में अपनाई ये खास तकनीक, किसान ने सिर्फ 3 बीघा से कमाया 1 लाख का शुद्ध लाभ – कृषि क्षेत्र में लगातार बदलती परिस्थितियों के बीच आधुनिक तकनीकों को अपनाने वाले किसान सफलता के नए आयाम स्थापित कर रहे हैं। मध्यप्रदेश के विदिशा जिले के विकासखंड नटेरन की ग्राम पंचायत नानकपुर के प्रगतिशील कृषक उपदेश शर्मा ने सोयाबीन की खेती में नवीन तकनीक अपनाकर न केवल उत्पादन बढ़ाया, बल्कि उल्लेखनीय आर्थिक लाभ भी अर्जित किया। उनकी यह सफलता आज क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
सोयाबीन प्रदेश की प्रमुख खरीफ फसलों में से एक है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसके रकबे में लगातार कमी देखने को मिल रही है। इसका मुख्य कारण पारंपरिक खेती पद्धतियों का उपयोग, वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी का अभाव तथा फसल प्रबंधन में आवश्यक सावधानियों का पालन न करना रहा है। ऐसे समय में उपदेश शर्मा की सफलता यह साबित करती है कि यदि किसान आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाएं तो बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
रिज बेड प्लांटर पद्धति ने बढ़ाया उत्पादन
किसान उपदेश शर्मा ने खरीफ वर्ष 2025 में पहली बार रिज बेड प्लांटर पद्धति से सोयाबीन की बुवाई की। उन्होंने बताया कि इससे पहले वे सामान्य पद्धति से खेती करते थे, जिसमें बीज की मात्रा अधिक लगती थी, खरपतवार और कीटों का प्रकोप ज्यादा होता था तथा दवाओं पर भी अतिरिक्त खर्च करना पड़ता था। अधिक वर्षा या कम वर्षा की स्थिति में फसल को भारी नुकसान होता था और उत्पादन मुश्किल से 2 से 3 क्विंटल प्रति बीघा तक ही सीमित रह जाता था।
रिज बेड प्लांटर तकनीक अपनाने के बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं। इस पद्धति में खेत की विशेष संरचना के कारण जल निकास बेहतर हुआ, पौधों की वृद्धि संतुलित रही और फसल पर प्रतिकूल मौसम का प्रभाव कम पड़ा। परिणामस्वरूप उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
कृषि अधिकारियों के मार्गदर्शन से मिली सफलता
किसान उपदेश शर्मा ने बताया कि वे कृषि विभाग एवं आत्मा परियोजना के अधिकारियों के संपर्क में आए। आत्मा परियोजना की अधिकारी सुश्री तुलसा तथा विकासखंड तकनीकी प्रबंधक नरेंद्र सिंह रघुवंशी द्वारा गांव में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर किसानों को सोयाबीन की नवीन तकनीकों की जानकारी दी गई। इसी दौरान उनके खेत में सोयाबीन का प्रदर्शन प्लॉट लगाया गया, जिसमें रिज बेड प्लांटर पद्धति से बुवाई कराई गई।
इस तकनीक में बीज और उर्वरक की संतुलित मात्रा का उपयोग किया गया। फसल में कीट एवं खरपतवार का प्रकोप नगण्य रहा, जिससे रासायनिक दवाओं पर खर्च लगभग समाप्त हो गया। अधिक वर्षा के बावजूद फसल सुरक्षित रही और उत्पादन बढ़कर लगभग 8 क्विंटल प्रति बीघा तक पहुंच गया।
कम लागत में मिला अधिक लाभ
कृषक उपदेश शर्मा ने बताया कि उन्होंने केवल 8 किलोग्राम बीज प्रति बीघा की दर से 3 बीघा क्षेत्र में कुल 24 किलोग्राम जेएस-2172 किस्म के सोयाबीन बीज की बुवाई की। खेत में जैविक खेती को बढ़ावा देते हुए गोबर खाद का उपयोग किया गया तथा अतिरिक्त रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग नहीं किया गया।
फसल की तैयारी से लेकर कटाई और बिक्री तक की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें लगभग एक लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। कम लागत और अधिक उत्पादन के कारण यह खेती उनके लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुई।
अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा स्रोत
अपनी सफलता से उत्साहित उपदेश शर्मा ने खरीफ वर्ष 2026 में 2.6 हेक्टेयर (लगभग 13 बीघा) क्षेत्र में रिज बेड फरो विधि से सोयाबीन की बुवाई करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उनका मानना है कि आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर किसान उत्पादन लागत घटाने के साथ-साथ आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
वर्ष 2026 में बड़े स्तर पर करेंगे सोयाबीन की खेती
अपनी सफलता से उत्साहित उपदेश शर्मा ने खरीफ वर्ष 2026 में 2.6 हेक्टेयर (लगभग 13 बीघा) क्षेत्र में रिज बेड फरो विधि से सोयाबीन की बुवाई करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उनका मानना है कि आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर किसान उत्पादन लागत घटाने के साथ-साथ आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
उपदेश शर्मा की यह सफलता कहानी दर्शाती है कि कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और किसानों की नवाचार अपनाने की इच्छा से खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है। उनकी उपलब्धि क्षेत्र के किसानों के लिए एक प्रेरक उदाहरण है, जो आधुनिक कृषि की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश देती है।
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