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राज्य कृषि समाचार (State News)

बुरहानपुर: कचरे से जैविक खाद बना रही नगर परिषद शाहपुर, ₹200 में मिल रहा 50 किलो का बैग

15 अक्टूबर 2026, बुरहानपुर: बुरहानपुर: कचरे से जैविक खाद बना रही नगर परिषद शाहपुर, ₹200 में मिल रहा 50 किलो का बैग – घरों से निकलने वाला कचरा अक्सर अनुपयोगी समझकर फेंक दिया जाता है, लेकिन सही प्रबंधन और वैज्ञानिक प्रक्रिया से यही कचरा उपयोगी संसाधन बन सकता है। बुरहानपुर जिले की नगर परिषद शाहपुर में कचरे से जैविक खाद तैयार करने की प्रक्रिया इसका उदाहरण पेश कर रही है। यहां घरों, दुकानों, होटलों और सब्जी मंडी से एकत्रित कचरे का पृथक्करण कर जैविक अपशिष्ट से खाद तैयार की जा रही है। इससे स्वच्छता बनाए रखने के साथ कचरे का उपयोगी रूपांतरण भी हो रहा है।

सुबह से शुरू होती है स्वच्छता की जिम्मेदारी

नगर परिषद शाहपुर में प्रतिदिन सुबह सफाई कार्य की शुरुआत होती है। परिषद परिसर में 60 सफाई मित्र और 10 वाहन चालक एकत्रित होते हैं। निर्धारित रूट चार्ट के अनुसार 9 कचरा संग्रहण वाहन 15 वार्डों में सफाई व्यवस्था के लिए रवाना होते हैं। ये वाहन घरों, दुकानों, होटलों और सब्जी मंडी से कचरा एकत्रित करते हैं। इस व्यवस्था में नागरिकों की सहभागिता भी महत्वपूर्ण है। गीले कचरे को हरे डिब्बे में और सूखे कचरे को नीले डिब्बे में अलग-अलग रखने से कचरे के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलती है।

कचरे का पृथक्करण कर भेजा जाता है रीसाइक्लिंग के लिए

विभिन्न वार्डों से एकत्रित कचरे को ट्रेचिंग ग्राउंड तक पहुंचाया जाता है। यहां निर्धारित प्लेटफॉर्म और शेड में कचरा उतारने के बाद सफाई मित्र दस्ताने और मास्क जैसे सुरक्षा उपकरण पहनकर उसका पृथक्करण करते हैं। इस दौरान प्लास्टिक, कागज, गत्ता, धातु, कांच और कपड़े जैसी सामग्री को अलग किया जाता है। रीसाइक्लिंग योग्य सूखे कचरे को गठानों के रूप में तैयार कर पुनर्चक्रण के लिए भेजा जाता है। वहीं, फल-सब्जियों के छिलके, फूल, चायपत्ती और घरों एवं सार्वजनिक स्थलों से निकलने वाले बचे हुए भोजन जैसे जैविक कचरे को अलग रखा जाता है।

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लगभग 45 दिनों में तैयार होती है जैविक खाद

जैविक कचरे को कम्पोस्ट शेड में निर्धारित स्थान पर विंडरो में रखा जाता है। खाद बनाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए इसमें सूक्ष्मजीव कल्चर के रूप में छाछ और गुड़ के पानी का छिड़काव किया जाता है। इसके साथ ही कचरे की नियमित पलटाई की जाती है तथा नमी और तापमान पर निगरानी रखी जाती है। इस प्रक्रिया के माध्यम से लगभग 45 दिनों में जैविक खाद तैयार हो जाती है। इसके बाद खाद को छलनी मशीन से छाना जाता है, जिससे बारीक और उपयोग के लिए तैयार खाद अलग हो जाती है। बचा हुआ मोटा अंश दोबारा खाद बनाने की प्रक्रिया में शामिल कर दिया जाता है।

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4 रुपये प्रति किलो की दर से मिल रही खाद

खाद तैयार होने के बाद उसकी तौल और पैकिंग की जाती है। पैकेट पर ‘जैविक खाद-नगर परिषद शाहपुर’ का लेबल लगाया जाता है। इसके बाद यह खाद किसानों, उद्यानों, नर्सरियों और नागरिकों को 4 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराई जाती है। एक बैग में 50 किलोग्राम खाद होती है, जिसकी कीमत 200 रुपये निर्धारित है। खाद की बिक्री से प्राप्त राशि का उपयोग नगर परिषद द्वारा नगर के विकास कार्यों और क्षेत्र के नागरिकों की मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए किया जाता है।

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