बिहार के मखाने ने समुद्र पार बनाई नई पहचान, कनाडा रवाना हुई फ्लेवर मखाने की पहली खेप
किसानों को 50 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त लाभ मिलने की उम्मीद
01 अगस्त 2026, भोपाल: बिहार के मखाने ने समुद्र पार बनाई नई पहचान, कनाडा रवाना हुई फ्लेवर मखाने की पहली खेप – बिहार के प्रसिद्ध मखाने ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने बिहार के दरभंगा से कनाडा के लिए फ्लेवरयुक्त और वैल्यू-एडेड मखाने की पहली समुद्री निर्यात खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसे बिहार के कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस ऐतिहासिक खेप के तहत दो कंटेनरों में पैक कुल 7 मीट्रिक टन फ्लेवर मखाना गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह के माध्यम से कनाडा भेजा गया है। यह खेप कनाडा की प्रमुख कंपनी जेडकेवी फूड्स के लिए रवाना की गई है। मखाने की प्रोसेसिंग और आकर्षक पैकेजिंग नूट्रीविन एग्रो प्राइवेट लिमिटेड द्वारा अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा के निर्धारित मानकों के अनुरूप की गई है।
इस निर्यात से यह संकेत मिलता है कि बिहार अब केवल कच्चे कृषि उत्पादों के उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि खाद्य प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन, ब्रांडिंग और निर्यात आधारित उद्योगों के क्षेत्र में भी अपनी क्षमता का विस्तार कर रहा है। मखाने को विभिन्न फ्लेवर में तैयार कर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने से उत्पाद का मूल्य बढ़ेगा और इससे पूरी आपूर्ति श्रृंखला को लाभ मिलने की संभावना है।
किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगा मूल्यवर्धन
एपीडा के अनुसार, वैल्यू-एडेड फ्लेवर मखाने के निर्यात से जुड़े किसानों को सामान्य मखाने की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना है। मखाने की सफाई, ग्रेडिंग, प्रसंस्करण, फ्लेवरिंग, आधुनिक पैकेजिंग और ब्रांडिंग के बाद इसका बाजार मूल्य बढ़ जाता है। इसका लाभ किसानों के साथ प्रसंस्करण इकाइयों, स्थानीय उद्यमियों और कृषि आधारित उद्योगों को भी मिल सकता है।
निर्यात खेप को रवाना करने के अवसर पर एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव ने कहा कि यह पहल बिहार के कृषि निर्यात तंत्र को मजबूत करने के साथ राज्य के प्रीमियम कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए किसानों, निर्यातकों, प्रसंस्करण इकाइयों और संबंधित संस्थाओं के संयुक्त प्रयासों की सराहना की।
गुणवत्ता और पौष्टिकता से बनी वैश्विक पहचान
बिहार देश का सबसे बड़ा मखाना उत्पादक राज्य है। राज्य के कई जिलों में मखाने की खेती और उत्पादन बड़े स्तर पर होता है। बिहार का मखाना अपनी गुणवत्ता, स्वाद और पौष्टिक गुणों के कारण देश के साथ विदेशों में भी लोकप्रिय है।
स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में पौष्टिक और हल्के स्नैक्स की मांग लगातार बढ़ रही है। मखाने को कम वसा वाले और पौष्टिक खाद्य विकल्प के रूप में भी पसंद किया जा रहा है। ऐसे में फ्लेवर युक्त और बेहतर पैकेजिंग वाले मखाने की मांग बढ़ने की संभावना है।
दरभंगा से कनाडा के लिए रवाना हुई यह पहली समुद्री खेप बिहार के कृषि क्षेत्र के लिए नए अवसरों का संकेत है। इससे न केवल मखाने को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिलेगी, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करने और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है।
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