कपास फसल के लिए सर्वोत्तम: ‘महावीरा ज़िरोन पॉवर प्लस’
20 जून 2026, भोपाल: कपास फसल के लिए सर्वोत्तम: ‘महावीरा ज़िरोन पॉवर प्लस’ – मध्यप्रदेश में कपास की खेती राज्य के अन्य जिलों के अलावा मुख्यतः खंडवा , खरगोन , बड़वानी और धार जिले में बड़े रकबे में की जाती है , फिर भी मध्यप्रदेश में कपास का उत्पादन राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। सफ़ेद सोना समझी जाने वाली कपास की फसल में यदि संतुलित उर्वरक का उपयोग एवं पोषक तत्व प्रबंधन का सही ध्यान रखा जाए तो कपास का अधिकतम उत्पादन लिया जा सकता है। इसमें देश की प्रतिष्ठित कम्पनी आर एम फास्फेट्स एन्ड केमिकल्स प्रा. लि. ( आरएमपीसीएल ) के लोकप्रिय उत्पाद ‘ महावीरा ज़िरोन पॉवर प्लस ‘ बड़ा योगदान है। इस उर्वरक में छः पोषक तत्वों का मिश्रण होता है , जो फसल को न केवल स्वस्थ रखता है , बल्कि डेन्डुओं का आकार बढ़ाने में मदद करता है, जिससे कपास का गुणवत्तापूर्ण उत्पादन मिलने से बाज़ार में दाम भी अधिक मिलता है। यह कहना है आरएमपीसीएल के हेड एग्रोनॉमिस्ट श्री प्रमोद कुमार पांडेय का। श्री पांडेय ने ‘ महावीरा ज़िरोन पॉवर प्लस ‘ की विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
पोषक तत्व प्रबंधन में ‘ महावीरा ज़िरोन पॉवर प्लस ‘ की भूमिका – श्री पांडेय ने बताया कि महावीरा ज़िरोन पॉवर प्लस में छ: पोषक तत्वों फास्फोरस , कैल्शियम, सल्फर , ज़िंक ,बोरोन एवं मैग्नीशियम से मिश्रित सिक्स इन वन खाद है। इसमें फास्फोरस 16 %,कैल्शियम 19 %, सल्फर 11 %, बोरोन 0.2 %, ज़िंक एवं मैग्नीशियम 0.5 % उपलब्ध रहता है। इसके उपयोग से कपास की फसल निरोगी रहती है और अधिक उत्पादन देती है। इसकी कपास फसल में भूमिका इस प्रकार है –
फास्फोरस – जड़ों का विकास करता है। प्रकाश संश्लेषण और कार्बोहाइड्रेट के क्षरण के अलावा पौधे में ऊर्जा हस्तांतरण के लिए आवश्यक तत्व है।
बोरोन – कपास फसल में परागण एवं प्रजनन क्रियाओं में मदद करता है। बोरोन के कारण पौधे बौने नहीं रहते हैं और डेन्डुओं का आकार भी बड़ा होता है।
ज़िंक – प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को बढ़ाता है और क्लोरोफिल के उत्पादन में मदद करता है, जिससे कपास के उत्पादन में 25 -30 % तक की वृद्धि हो जाती है।
कैल्शियम – इससे कपास की जड़ प्रणाली का विकास होता है , जिसके कारण पौधों का अच्छा विकास होता है। सहायक शाखाओं में वृद्धि के साथ ही डेन्डुओं की संख्या में वृद्धि होती है, जिससे उत्पादन बढ़ता है।
सल्फर – मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है। इसके अलावा पौधों में कीटनाशक और टॉनिक की तरह कार्य करता है।
मैग्नीशियम – पौधों को हरा -भरा रखने के साथ ही एक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है।
संतुलित उर्वरक का उपयोग – श्री पांडेय ने बताया कि कपास की बुवाई के समय आधार खाद के रूप में चार बोरी ‘ महावीरा ज़िरोन पॉवर प्लस’ अर्थात 2 क्विंटल / एकड़ उपयोग करना चाहिए। इसके अलावा 40 किलोग्राम पोटाश आवश्यक रूप से देवें। यूरिया , बुवाई के समय 25 किलोग्राम / एकड़ देना चाहिए। यूरिया की शेष मात्रा 40 किलोग्राम 25 -30 दिन बाद एवं 45 -50 दिन बाद 40 किलोग्राम / एकड़ की दर से टॉप ड्रेसिंग करें। उन्होंने कहा कि कपास की फसल में सबसे अधिक लागत कीटनाशकों की आती है। जो किसान महावीरा ज़िरोन पॉवर प्लस’ के साथ कपास की बुवाई करते हैं , उनका कीटनाशक पर होने वाला व्यय न्यूनतम रहता है। यह सिक्स इन वन खाद कपास की बुवाई से लेकर कपास तैयार होने तक फसल को सुरक्षा प्रदान करता है।
निष्कर्ष – श्री पांडेय के अनुसार कपास एक दीर्घ अवधि वाली फसल है,जो 6 माह से अधिक समय तक खेत में खड़ी रहती है। कपास की फसल लम्बी अवधि होने के कारण इसकी उत्पादन लागत अन्य फसलों की तुलना में अधिक आती है। किसान भाई यदि कपास की फसल में संतुलित उर्वरक का उपयोग एवं पोषक तत्व प्रबंधन का ध्यान रख लें तो कपास का बेहतर गुणवत्तापूर्ण उत्पादन लिया जा सकता है। ‘ महावीरा ज़िरोन पॉवर प्लस’ के उपयोग से इसे सिद्ध किया जा सकता है।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

