राज्य कृषि समाचार (State News)

बालाघाट : किसानों को दी रेशम पालन की उन्नत तकनीकों की जानकारी

27 अगस्त 2026, बालाघाट: बालाघाट : किसानों को दी रेशम पालन की उन्नत तकनीकों की जानकारी – केंद्रीय रेशम बोर्ड (CSB), वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित “मेरा रेशम, मेरा अभिमान 2.0 (MRMA 2.0)–National Sericulture Technology Transfer Campaign” के अंतर्गत बालाघाट के झांगुल ग्राम स्थित सीता डोंगरी में किसान प्रशिक्षण-सह-प्रौद्योगिकी प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम केंद्रीय रेशम बोर्ड-बेसिक सीड मल्टीप्लीकेशन एंड ट्रेनिंग सेंटर (BSMTC), बालाघाट द्वारा रेशम विभाग, बालाघाट के समन्वय से आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रेशम किसानों तक वैज्ञानिक एवं उन्नत रेशम उत्पादन तकनीकों का प्रत्यक्ष हस्तांतरण करना तथा क्षेत्र में रेशम उत्पादन की क्षमता बढ़ाना रहा। कार्यक्रम में लगभग 50 रेशम किसानों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन केंद्रीय रेशम बोर्ड-बीएसएमटीसी बालाघाट के वैज्ञानिक-बी श्री नवीन चंद्र रेड्डी एवं वरिष्ठ तकनीकी सहायक श्री संतोष कुमार ठाकरे द्वारा किया गया। इस दौरान किसानों को शहतूत एवं टसर रेशम कीट पालन की वैज्ञानिक पद्धतियों, फसल प्रबंधन, रोग नियंत्रण तथा गुणवत्तापूर्ण कोकून उत्पादन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण में रेशम कीट पालन शुरू करने से पहले रीयरिंग हाउस, उपकरणों एवं पालन सामग्री के समुचित कीटाणुशोधन के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। किसानों को बताया गया कि पालन स्थल की स्वच्छता बनाए रखने और आवश्यक कीटाणुशोधन से रोगों की संभावना को कम किया जा सकता है तथा रेशम कीटों के लिए स्वस्थ वातावरण तैयार किया जा सकता है। किसानों को चावकी पालन के महत्व से अवगत कराते हुए रेशम कीटों की प्रारंभिक अवस्था में उचित तापमान, स्वच्छता एवं पर्याप्त पोषण बनाए रखने के वैज्ञानिक उपाय बताए गए। इसके साथ ही मोल्टिंग के दौरान बेड डिसइंफेक्शन के महत्व तथा अनुशंसित बेड डिसइंफेक्टेंट जैसे विजेता एवं चूने के उचित उपयोग की जानकारी भी दी गई। विशेषज्ञों ने किसानों से वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने और रेशमकीट पालन के प्रत्येक चरण में स्वच्छता एवं उचित प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया, ताकि स्वस्थ रेशमकीट तैयार हों और गुणवत्तापूर्ण कोकून का उत्पादन बढ़ाया जा सके।

कार्यक्रम में टसर रेशम उत्पादन के लिए आवश्यक प्राकृतिक होस्ट पौधों की घटती उपलब्धता पर भी चर्चा की गई। किसानों को अर्जुन एवं आसन/साजा सहित टसर होस्ट पौधों के रोपण, संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए प्रेरित किया गया। मानसून के दौरान वन विभाग के समन्वय से अधिक से अधिक टसर होस्ट पौधों का रोपण करने तथा मौजूदा पौधों के संरक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। बताया गया कि पर्याप्त संख्या में होस्ट पौधों की उपलब्धता टसर रेशम उत्पादन को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कार्यक्रम में ऐसे किसानों को भी प्रोत्साहित किया गया, जिन्होंने किसी कारणवश रेशम पालन बंद कर दिया है। उन्हें वैज्ञानिक तकनीकी एवं विभागीय सहयोग के माध्यम से पुनः रेशम उत्पादन शुरू करने के लिए प्रेरित किया गया। किसानों को रेशम विकास के लिए उपलब्ध विभिन्न शासकीय योजनाओं, प्रोत्साहनों एवं अनुदानों की जानकारी भी दी गई।

“मेरा रेशम, मेरा अभिमान 2.0” केंद्रीय रेशम बोर्ड की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय तकनीकी हस्तांतरण पहल है। इसका उद्देश्य आधुनिक एवं प्रमाणित रेशम उत्पादन तकनीकों को सीधे किसानों तक पहुंचाना है, ताकि रेशम उत्पादन की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में वृद्धि के साथ किसानों की आजीविका को अधिक स्थायी एवं मजबूत बनाया जा सके। कार्यक्रम में जिला नोडल अधिकारी श्री सुरेंद्र चिचाम, श्री यशवंत सिंह गुजर, रेशम अधिकारी श्री गोरमरे, विभागीय कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में रेशम किसान उपस्थित रहे। किसानों ने प्रशिक्षण एवं प्रौद्योगिकी प्रदर्शन के माध्यम से प्राप्त जानकारी को रेशम पालन में अपनाने में रुचि दिखाई।

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