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राज्य कृषि समाचार (State News)

नीम-गोबर का देसी घोल खेतों की करेगा रखवाली, जंगली जानवरों और कीटों से बचाव का दावा

31 अगस्त 2026, भोपाल: नीम-गोबर का देसी घोल खेतों की करेगा रखवाली, जंगली जानवरों और कीटों से बचाव का दावा – किसानों के लिए फसल उगाने के साथ उसे जंगली जानवरों और कीटों से बचाना भी बड़ी चुनौती बन गया है। नीलगाय, जंगली सुअर, बंदर और आवारा मवेशियों के खेतों में घुसने से कई बार तैयार फसल को नुकसान पहुंच जाता है। खेतों की निगरानी, तारबंदी और कीटनाशकों पर किसानों को अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। ऐसे में कृषि क्षेत्र में कुछ देसी उपाय भी किसानों के बीच उपयोग किए जाते हैं।

इनमें नीम और गोबर से तैयार घोल को खेतों के आसपास छिड़काव के लिए उपयोगी बताया जाता है। इसे तैयार करने के लिए करीब एक किलो नीम की पत्तियों को पीसकर उसमें एक किलो गोबर और 20 लीटर पानी मिलाया जाता है। मिश्रण को करीब 10 घंटे तक छायादार स्थान पर ढककर रखने के बाद छानकर खेत के आसपास या फसल पर छिड़काव किया जा सकता है।

बताया जाता है कि नीम की कड़वाहट और मिश्रण की गंध कई कीटों तथा कुछ जानवरों को खेत से दूर रखने में मदद कर सकती है। नीम में मौजूद प्राकृतिक यौगिकों के कारण इसका उपयोग पारंपरिक रूप से कीट नियंत्रण में भी किया जाता रहा है। किसान चाहें तो इसमें लहसुन या करंज के बीज भी मिलाते हैं, हालांकि इनके प्रभाव और उचित मात्रा के संबंध में स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होगा।

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इस उपाय की खासियत यह है कि इसमें स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है और रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम की जा सकती है। हालांकि इसे जंगली जानवरों या सभी प्रकार के कीटों से शत-प्रतिशत सुरक्षा देने वाला उपाय नहीं माना जाना चाहिए। फसल, कीट और क्षेत्र के अनुसार कृषि विभाग या कृषि वैज्ञानिक की सलाह लेकर ही इसका प्रयोग करना उचित रहेगा।

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