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राज्य कृषि समाचार (State News)

बस्तर में कृषि क्रांति : 25 वर्षों में फसल क्षेत्र दोगुना, बीज वितरण में 10 गुना वृद्धि

09 नवंबर 2025, भोपाल: बस्तर में कृषि क्रांति : 25 वर्षों में फसल क्षेत्र दोगुना, बीज वितरण में 10 गुना वृद्धि – वनों और पहाड़ियों की गोद में बसे बस्तर ने पिछले 25 वर्षों में एक ऐसी कृषि क्रांति देखी है, जिसने जिले की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर ही बदल दी है। कभी जहां खेती-किसानी कठिनाईयों से घिरी थी, वहीं आज खेत लहलहा रहे हैं और किसानों के चेहरों पर खुशहाली की चमक दिखाई दे रही है। यह परिवर्तन बस्तर के मेहनतकश अन्नदाताओं की अथक मेहनत, राज्य सरकार की किसानोन्मुख नीतियों और कृषि विभाग के निरंतर प्रयासों का परिणाम है।

खेती के क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि

वर्ष 2000 में जिले का कुल फसल उत्पादन क्षेत्र 1.58 लाख हेक्टेयर था, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 2 लाख हेक्टेयर से अधिक हो गया है। यानी करीब 26 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि। यह विस्तार बस्तर के उन दुर्गम इलाकों तक पहुँचा है, जहाँ कभी असमतल भूमि और पहाड़ी ढलानों पर खेती करना चुनौतीपूर्ण था। इस बदलाव के पीछे विभाग की योजनाओं, जल संरक्षण कार्यों और किसानों को समय पर तकनीकी सहायता का बड़ा योगदान रहा है।

बीज वितरण में भी दस गुना से अधिक की वृद्धि

वर्ष 2000 में जिले में 3,109 क्विंटल बीज किसानों को उपलब्ध कराए गए थे, जो अब बढ़कर 32 हजार 253 क्विंटल तक पहुँच चुके हैं। कृषि कार्यों में 10 गुना की अद्भुत वृद्धि को दर्शाता है। उच्च गुणवत्ता वाले, रोग-प्रतिरोधी बीजों की उपलब्धता ने किसानों की उत्पादकता को नई ऊँचाई दी है।          लोहंडीगुड़ा विकासखंड के ग्राम गुनपुर के किसान नकुल भारती ने बताया कि पहले अच्छे बीज के लिए शहर जाना पड़ता था, अब गाँव में ही आसानी से मिल जाता है। नई तकनीक और बीजों ने हमारी खेती का रूप ही बदल दिया है।

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सिंचित क्षेत्र में हुई सात गुना की वृद्धि

जहाँ वर्ष 2000 में सिंचाई की सुविधा केवल 3 हजार 669 हेक्टेयर भूमि तक सीमित थी, वहीं आज यह बढ़कर 24 हजार 280 हेक्टेयर तक पहुँच चुकी है। तालाबों के जीर्णाेद्धार, नहरों के विस्तार और ड्रिप एवं स्प्रिंकलर इरिगेशन जैसी आधुनिक तकनीकों ने सूखे इलाकों को भी हरा-भरा बना दिया है। इन प्रयासों से फसल चक्र मजबूत हुआ है और किसानों की जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता भी बढ़ी है। उप संचालक कृषि श्री राजीव श्रीवास्तव ने बताया कि विभाग किसानों को प्रशिक्षण देकर उन्नत तकनीक अपनाने के लिए निरंतर प्रोत्साहित कर रहा है।

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किसान के उत्पादों से मिला आत्मबल

राज्य सरकार द्वारा किसानों को धान का वाजिब दाम दिलाने के लिए की गई नीति सुधारों से बस्तर के किसानों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन आया है। वर्ष 2000 में जहां धान का समर्थन मूल्य मात्र 510 रुपये प्रति क्विंटल था, जो अब बढ़कर 3,100 रुपये तक पहुँच चुका है। इसी प्रकार, ग्रेड-ए धान का मूल्य 540 रुपये से बढ़कर 3,100 रुपये हो गया है। यह छह गुना से अधिक की वृद्धि किसानों के जीवन में आर्थिक सशक्तिकरण का प्रतीक बन चुकी है। ग्राम कलचा की महिला किसान जयंती बघेल ने मुस्कुराते हुए कहा कि पहले खेती से बस गुजारा चलता था, अब बच्चों की पढ़ाई और घर की जरूरतें पूरी हो रही हैं।

आधुनिक तकनीक और नई सोच की दिशा में कदम

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना जैसी योजनाओं ने बस्तर के किसानों को नई दिशा दी है। कृषि विभाग अब मिलेट्स, दलहन और तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के साथ-साथ जैविक खेती पर भी जोर दे रहा है। पिछले 25 वर्षों में बस्तर का यह परिवर्तन केवल कृषि का विकास नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के पुनर्जागरण की कहानी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किसानों के कल्याण को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी है। कृषि, जल संसाधन और सहकारिता विभागों के समन्वित प्रयासों से आज बस्तर आत्मनिर्भर, समृद्ध और हरित हो रहा है।

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