स्टॉक भरपूर, फिर भी किसान परेशान: ई-विकास पोर्टल पर नहीं मिल रही जरूरत की खाद
04 जुलाई 2026, भोपाल: स्टॉक भरपूर, फिर भी किसान परेशान: ई-विकास पोर्टल पर नहीं मिल रही जरूरत की खाद – खरीफ सीजन में सोयाबीन, मक्का और धान की बुवाई के बीच मध्यप्रदेश में उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर सरकार और किसानों के दावे आमने-सामने हैं। एक ओर प्रदेश सरकार का कहना है कि डीएपी, यूरिया, एनपीके सहित सभी प्रमुख उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और ई-विकास पोर्टल के माध्यम से व्यवस्थित वितरण किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर किसानों का आरोप है कि पोर्टल पर आवश्यकता के अनुरूप डीएपी और एनपीके उपलब्ध ही नहीं दिख रहे। ऐसे में बुवाई के सबसे महत्वपूर्ण समय में उन्हें खाद के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
खाड़ी देशों में जारी तनाव, संभावित सुपर अल नीनो और मानसून की अनिश्चितता के बीच प्रदेश सरकार वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मना रही है। ऐसे समय में समय पर उर्वरकों की उपलब्धता किसानों के लिए सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। किसानों का कहना है कि ई-विकास पोर्टल पर कई बार जिस उर्वरक की जरूरत होती है, वह “उपलब्ध नहीं” दर्शाया जाता है। टोकन मिलने के बावजूद पर्याप्त मात्रा में डीएपी या एनपीके नहीं मिलने से उन्हें बार-बार वितरण केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
कई जिलों में सोयाबीन, मक्का और धान की बुवाई तेज होने के साथ डीएपी एवं एनपीके की मांग भी बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि कुछ सहकारी समितियों और बिक्री केंद्रों पर आवश्यक मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं होने से वितरण प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि बुवाई का समय सीमित होता है, इसलिए यदि समय पर उर्वरक नहीं मिला तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है। किसानों ने मांग की है कि सभी वितरण केंद्रों पर आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया जाए।
दूसरी ओर प्रशासन का दावा है कि प्रदेश में लगातार उर्वरकों की रैक पहुंच रही हैं तथा सहकारी समितियों और निजी विक्रेताओं के माध्यम से नियमित वितरण किया जा रहा है। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार किसानों को आवश्यकता के अनुसार समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रतिदिन समीक्षा की जा रही है और जिलों में मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
प्रदेश में उर्वरकों की कीमतों की बात करें तो इस वर्ष एनपीके सहित कुछ जटिल उर्वरकों के दाम पिछले खरीफ सीजन की तुलना में बढ़े हैं। हालांकि, यूरिया और डीएपी पर केंद्र सरकार के मूल्य नियंत्रण तथा अतिरिक्त सब्सिडी के कारण इनके अधिकतम खुदरा मूल्य को स्थिर रखने का प्रयास किया गया है।
कृषि विभाग के अनुसार 30 जून 2026 तक प्रदेश में उर्वरकों की उपलब्धता की स्थिति इस प्रकार रही —
- यूरिया: लगभग 12 लाख मीट्रिक टन उपलब्ध रहा, जिसमें से 6.30 लाख मीट्रिक टन का वितरण किया जा चुका है, जबकि लगभग 5.70 लाख मीट्रिक टन स्टॉक शेष है।
- डीएपी एवं एनपीके: लगभग 4.30 लाख मीट्रिक टन का वितरण किया गया है तथा करीब 3.90 लाख मीट्रिक टन स्टॉक उपलब्ध है।
- एसएसपी: लगभग 1.90 लाख मीट्रिक टन के वितरण के बाद भी करीब 3.60 लाख मीट्रिक टन उपलब्ध है।
- एमओपी: अब तक केवल 22 हजार मीट्रिक टन का वितरण हुआ है तथा लगभग 32 हजार मीट्रिक टन स्टॉक शेष है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार खरीफ 2026 के लिए केवल जुलाई माह में 4 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 1.50 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 50 हजार मीट्रिक टन एसएसपी तथा एमओपी के वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
ई-विकास पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार 1 अप्रैल 2026 से अब तक प्रदेश में लगभग 37 लाख टोकन जनरेट किए जा चुके हैं। इनमें से करीब 27 लाख टोकनों पर किसानों ने लगभग 13 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का उठाव किया है। कृषि विभाग का कहना है कि टोकन आधारित व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ी है और किसानों को व्यवस्थित तरीके से उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है।
हालांकि, किसानों का सवाल है कि जब सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार डीएपी और एनपीके का लाखों मीट्रिक टन स्टॉक उपलब्ध है, तब ई-विकास पोर्टल पर कई स्थानों पर यह उर्वरक उपलब्ध क्यों नहीं दिख रहा और किसानों को बुवाई के दौरान इंतजार क्यों करना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार के पर्याप्त स्टॉक के दावे और किसानों के जमीनी अनुभव के बीच का यह अंतर कृषि विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
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